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प्राकृतिक खेती से ही संभव है जमीन, मनुष्य व पशुओं का अच्छा स्वास्थ्य : डॉ. रणजीत
Thu, 11 Sep 2025 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 11 Sep 2025 11:40 PM IST
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11जेएनडी25-हमेटी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन पर मौजूद अधिकारी। स्रोत हमेटी
जींद। हमेटी में निदेशक डॉ. कर्मचंद के दिशा निर्देशन में कृषि अधिकारियों एवं किसानों के लिए तीन दिन से चल रहे प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण का वीरवार को समापन हुआ। हमेटी के उपनिदेशक डॉ. रंजीत सिंह सग्गू ने कहा कि खेती में रासायनिक कीटनाशकों व उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग ने जमीन, मनुष्यों और पशुओं के स्वास्थ्य को बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भूमि बंजर होती जा रही है। मनुष्यों व पशुओं में भयंकर जानलेवा बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है।
भूमि, मनुष्यों व पशुधन के स्वास्थ्य को केवल प्राकृतिक खेती से ही बचाया जा सकता है। डॉ. सग्गू ने कहा कि हम जो भोजन करते हैं उसमें फल, सब्जी, अनाज व दालों का सेवन इसीलिए करते हैं कि हमारे शरीर को प्रोटीन, विटामिन व विभिन्न मिनरल सब कुछ मिले। आज फल, सब्जी, अनाज व दालों सभी में ये सब चीजे कम मात्रा में पाई जाती हैं जिसका सीधा प्रभाव हमारे शारीरिक विकास पर पड़ रहा है।
इसका कारण इन सब तत्वों का भूमि में ही कम हो जाना है। जहरीले रसायनों के प्रभाव ने भूमि में इन सब आवश्यक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित कर दी है। उल्टा इन फल, सब्जी व अनाज आदि में कीटनाशकों के रसायनों के अवशेषों की मात्रा बढ़ गई है जिसने मनुष्य के शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर दी है। यही कारण है कि आज कैंसर, हृदय घात, ब्लड शुगर व उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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इन सबसे बचने के लिए आज प्राकृतिक खेती को अपनाना अनिवार्य हो गया है। हमेटी में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्रशिक्षण में किसानों व अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के वे सभी तरीके सिखाए जाते हैं जो प्रकृति, वातावरण, भूमि, मनुष्य व हर जीव के लिए सुरक्षित होते हैं। गाय के गोबर व गोमूत्र की मदद से जीवामृत व धन जीवामृत बनाकर लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ाने व उनसे पौधों के लिए आवश्यक तत्वों की उपलब्धता करवाना सिखाया जाता है।
फसलों को कीड़ों व बीमारियों से बचाने के लिए भी नीम, आक व धतूरा आदि प्राकृतिक पौधों से बगैर खर्च के जहर मुक्त व जैविक कीटनाशक बनाने सिखाए जाते हैं। डॉ. सुभाष ने बताया कि जहर मुक्त तरीकों से पैदा किए गए फ ल, सब्जी व अनाज आदि की गुणवत्ता उत्तम प्रकार की होती हैं और यह खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं।
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भूमि, मनुष्यों व पशुधन के स्वास्थ्य को केवल प्राकृतिक खेती से ही बचाया जा सकता है। डॉ. सग्गू ने कहा कि हम जो भोजन करते हैं उसमें फल, सब्जी, अनाज व दालों का सेवन इसीलिए करते हैं कि हमारे शरीर को प्रोटीन, विटामिन व विभिन्न मिनरल सब कुछ मिले। आज फल, सब्जी, अनाज व दालों सभी में ये सब चीजे कम मात्रा में पाई जाती हैं जिसका सीधा प्रभाव हमारे शारीरिक विकास पर पड़ रहा है।
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इसका कारण इन सब तत्वों का भूमि में ही कम हो जाना है। जहरीले रसायनों के प्रभाव ने भूमि में इन सब आवश्यक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित कर दी है। उल्टा इन फल, सब्जी व अनाज आदि में कीटनाशकों के रसायनों के अवशेषों की मात्रा बढ़ गई है जिसने मनुष्य के शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर दी है। यही कारण है कि आज कैंसर, हृदय घात, ब्लड शुगर व उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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इन सबसे बचने के लिए आज प्राकृतिक खेती को अपनाना अनिवार्य हो गया है। हमेटी में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्रशिक्षण में किसानों व अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के वे सभी तरीके सिखाए जाते हैं जो प्रकृति, वातावरण, भूमि, मनुष्य व हर जीव के लिए सुरक्षित होते हैं। गाय के गोबर व गोमूत्र की मदद से जीवामृत व धन जीवामृत बनाकर लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ाने व उनसे पौधों के लिए आवश्यक तत्वों की उपलब्धता करवाना सिखाया जाता है।
फसलों को कीड़ों व बीमारियों से बचाने के लिए भी नीम, आक व धतूरा आदि प्राकृतिक पौधों से बगैर खर्च के जहर मुक्त व जैविक कीटनाशक बनाने सिखाए जाते हैं। डॉ. सुभाष ने बताया कि जहर मुक्त तरीकों से पैदा किए गए फ ल, सब्जी व अनाज आदि की गुणवत्ता उत्तम प्रकार की होती हैं और यह खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं।