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Jind News: जिले के चार साहित्यकार होंगे राष्ट्रीय साहित्य सम्मान समारोह में सम्मानित
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जींद। निराला साहित्यिक एवं कला मंच कलानौर, भिवानी और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह 2025 का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम रोहतक के कलानौर में होगा। इसमें जींद से साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाले चार साहित्यकारों को राष्ट्रीय साहित्य सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
इसमें जींद से साहित्यकार डॉ. सुशीला जांगड़ा, शंकुतला काजल, ओम प्रकाश चौहान और नरेंद्र अत्री को सम्मानित किया जाना है। सुशीला जांगड़ा और शकुंतला काजल को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ''निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान'' से सम्मानित किया जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र ''संतोषी'' की हिंदी और हरियाणवी में अभी तक एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें हरियाणवी खंडकाव्य ''पन्नाधाय'', बालगीत ''पेड़ों पर लटके रसगुल्ले'', व्यंग-विनोद आलेख-संग्रह ''साइकिल की सनक'' और ''विविधायन'' विशेष रूप से चर्चित रही हैं।
उनके हरियाणवी काव्य संग्रह ''पल्लू सरक गया'' पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में एमफिल की जा चुकी है और उनके समग्र साहित्य पर शोध कार्य किया जा रहा है। इन्हें हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पं दीनदयाल उपाध्याय ग्रंथ श्री सम्मान साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान द्वारा ''हिंदी काव्य शिरोमणि सम्मान'' के अतिरिक्त अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। कार्यक्रम में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को गति प्रदान करने के लिए हरियाणा के दिग्गज साहित्यकार अपने-अपने विचार व सुझाव रखेंगे। इसमें हरियाणवी के विद्वान और बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबू राम और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के हिंदी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत करेंगे। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ सुशीला जांगड़ा की पुस्तक (लोक- रश्मियां) का विमोचन भी किया जाएगा। इनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और 10 साझा संकलनों में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं और चार पांडुलिपी तैयार हुई हैं।
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इसमें जींद से साहित्यकार डॉ. सुशीला जांगड़ा, शंकुतला काजल, ओम प्रकाश चौहान और नरेंद्र अत्री को सम्मानित किया जाना है। सुशीला जांगड़ा और शकुंतला काजल को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ''निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान'' से सम्मानित किया जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र ''संतोषी'' की हिंदी और हरियाणवी में अभी तक एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें हरियाणवी खंडकाव्य ''पन्नाधाय'', बालगीत ''पेड़ों पर लटके रसगुल्ले'', व्यंग-विनोद आलेख-संग्रह ''साइकिल की सनक'' और ''विविधायन'' विशेष रूप से चर्चित रही हैं।
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उनके हरियाणवी काव्य संग्रह ''पल्लू सरक गया'' पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में एमफिल की जा चुकी है और उनके समग्र साहित्य पर शोध कार्य किया जा रहा है। इन्हें हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पं दीनदयाल उपाध्याय ग्रंथ श्री सम्मान साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान द्वारा ''हिंदी काव्य शिरोमणि सम्मान'' के अतिरिक्त अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। कार्यक्रम में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को गति प्रदान करने के लिए हरियाणा के दिग्गज साहित्यकार अपने-अपने विचार व सुझाव रखेंगे। इसमें हरियाणवी के विद्वान और बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबू राम और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के हिंदी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत करेंगे। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ सुशीला जांगड़ा की पुस्तक (लोक- रश्मियां) का विमोचन भी किया जाएगा। इनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और 10 साझा संकलनों में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं और चार पांडुलिपी तैयार हुई हैं।
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