{"_id":"657f54b25a35537948075e58","slug":"first-aid-box-kit-not-in-roadways-buses-jind-news-c-199-1-sroh1009-10327-2023-12-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: रोडवेज बसों में नहीं फर्स्ट एड बॉक्स किट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: रोडवेज बसों में नहीं फर्स्ट एड बॉक्स किट
Mon, 18 Dec 2023 01:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 18 Dec 2023 01:36 AM IST
विज्ञापन
17जेएनडी28: रोडवेज बस में रखे फस्र्ट एड बाक्स में नहीं दवाईयां।
जींद। डिपो की अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स किट नहीं हैं तो वहीं कुछ में दवाइयां नहीं हैं। इसके कारण बसों में सफर करने वाले यात्रियों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकतर महिलाओं व पुरूषों की बसों में सफर करने के दौरान तबीयत खराब हो जाती है। जिसके लिए बस में प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स का होना जरूरी है, ताकि समय पर इस तरह के यात्रियों को दवाइयां दी जा सके, लेकिन रोडवेज के चालक व परिचालक इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देते।
विभाग के नियमानुसार बसों में सफर के दौरान फर्स्ट एड किट में डिटॉल, रूई, पट्टी समेत अन्य कई तरह की दवाइयां होनी चाहिए। रोडवेज बसों में इस तरह की किट अनिवार्य लागू कर रखे हैं, लेकिन अधिकारियों को भी पता नहीं हैं कि इनकी क्या स्थिति है। किट में आपात स्थिति में उपयोग आने वाली दवाइयां रखनी जरूरी हैं। सिर व पेट दर्द, उल्टी, जी मिचलाने के लिए फर्स्ट रिलीफ की दवाईयां, चोट लगने की स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए बैंडेड, डिटॉल, रुई, पट्टी, आयोडेक्स समेत अन्य दवाइयां रखनी होती हैं। किट रखने के लिए बस में चालक के पीछे वाले हिस्से में एक बॉक्स लगा हुआ रहता है तथा उस पर फर्स्ट एड बॉक्स लिखा होता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री परिचालक या ड्राइवर की मदद से इसमें रखी दवाइयां का उपयोग हो सके। जींद डिपो की इस समय 197 रोडवेज बस ऑनरूट हैं। इनमें से नई व पुरानी अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स किट में दवाइयां नहीं है। रोडवेज बसों में प्रतिदिन 15 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। जिनसे डिपो को लाखों रुपये की आमदनी होती है। इसके बावजूद भी इसकी तरफ डिपो अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
कुछ बसों में दवाइयां नहीं हैं, उनको निर्देश दिए गए हैं
डिपो की अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स किट में दवाइयां हैं। अगर कुछ बसों में दवाइयां व फर्स्ट एड किट नहीं है तो उनके चालक व परिचालकों को यह किट रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन बसों में दवाइयां नहीं हैं उनके बारे में पता कर दवाइयों की किट रखवाई जाएगी, ताकि यात्रियों को सफर में जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया जा सके।
विज्ञापन
-- अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर जींद डिपो।
विज्ञापन
विभाग के नियमानुसार बसों में सफर के दौरान फर्स्ट एड किट में डिटॉल, रूई, पट्टी समेत अन्य कई तरह की दवाइयां होनी चाहिए। रोडवेज बसों में इस तरह की किट अनिवार्य लागू कर रखे हैं, लेकिन अधिकारियों को भी पता नहीं हैं कि इनकी क्या स्थिति है। किट में आपात स्थिति में उपयोग आने वाली दवाइयां रखनी जरूरी हैं। सिर व पेट दर्द, उल्टी, जी मिचलाने के लिए फर्स्ट रिलीफ की दवाईयां, चोट लगने की स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए बैंडेड, डिटॉल, रुई, पट्टी, आयोडेक्स समेत अन्य दवाइयां रखनी होती हैं। किट रखने के लिए बस में चालक के पीछे वाले हिस्से में एक बॉक्स लगा हुआ रहता है तथा उस पर फर्स्ट एड बॉक्स लिखा होता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री परिचालक या ड्राइवर की मदद से इसमें रखी दवाइयां का उपयोग हो सके। जींद डिपो की इस समय 197 रोडवेज बस ऑनरूट हैं। इनमें से नई व पुरानी अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स किट में दवाइयां नहीं है। रोडवेज बसों में प्रतिदिन 15 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। जिनसे डिपो को लाखों रुपये की आमदनी होती है। इसके बावजूद भी इसकी तरफ डिपो अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
विज्ञापन
कुछ बसों में दवाइयां नहीं हैं, उनको निर्देश दिए गए हैं
डिपो की अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स किट में दवाइयां हैं। अगर कुछ बसों में दवाइयां व फर्स्ट एड किट नहीं है तो उनके चालक व परिचालकों को यह किट रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन बसों में दवाइयां नहीं हैं उनके बारे में पता कर दवाइयों की किट रखवाई जाएगी, ताकि यात्रियों को सफर में जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया जा सके।
विज्ञापन