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Jind News: पराली जलाने वाले दो किसानों पर लगाया जुर्माना
Mon, 16 Oct 2023 10:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 16 Oct 2023 10:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सफीदों। सफीदों के एसडीएम मनीष कुमार फोगाट ने रविवार को उपमंडल के गांव भंभेवा, मोरखी, गांगोली, भागखेड़ा, कालवा, कलावती, बिटानी, हाट, बुड्ढा खेड़ा, रोजला व मलार समेत एक दर्जन गांवों का दौरा किया। इस दौरान जिन खेतों में पराली में आग लगी मिली उसे बुझवाया और उन खेतों के मालिक किसानों को जुर्माना भी लगाया। एसडीएम ने गांव हाट व बुड्ढाखेड़ा के दो किसानों को 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाया।
इस मौके पर कृषि विभाग के एसडीओ सुशील कुमार और एडीओ संजीत मौजूद थे। एसडीएम ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है, जिसके कारण मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु और केचुआ आदि मर जाते हैं। नतीजतन मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है। पराली जलाने की वजह से जहां एक तरफ प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पराली ना जलाने की स्थिति में सरकार भी आर्थिक सहायता दे रही है। इसके अलावा पराली ना जलाने को लेकर सरकार ने अनेक स्कीमें चलाई हुईं हैं। किसान स्ट्रॉबेलर मशीन बुक करवाकर पराली की गांठें बनवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को धान की फसल के अवशेष जलाना भारी पड़ सकता है।
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सफीदों। सफीदों के एसडीएम मनीष कुमार फोगाट ने रविवार को उपमंडल के गांव भंभेवा, मोरखी, गांगोली, भागखेड़ा, कालवा, कलावती, बिटानी, हाट, बुड्ढा खेड़ा, रोजला व मलार समेत एक दर्जन गांवों का दौरा किया। इस दौरान जिन खेतों में पराली में आग लगी मिली उसे बुझवाया और उन खेतों के मालिक किसानों को जुर्माना भी लगाया। एसडीएम ने गांव हाट व बुड्ढाखेड़ा के दो किसानों को 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाया।
इस मौके पर कृषि विभाग के एसडीओ सुशील कुमार और एडीओ संजीत मौजूद थे। एसडीएम ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है, जिसके कारण मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु और केचुआ आदि मर जाते हैं। नतीजतन मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है। पराली जलाने की वजह से जहां एक तरफ प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पराली ना जलाने की स्थिति में सरकार भी आर्थिक सहायता दे रही है। इसके अलावा पराली ना जलाने को लेकर सरकार ने अनेक स्कीमें चलाई हुईं हैं। किसान स्ट्रॉबेलर मशीन बुक करवाकर पराली की गांठें बनवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को धान की फसल के अवशेष जलाना भारी पड़ सकता है।
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