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सर्व धर्म सभा में किसानों ने लिया फैसला जजपा और भाजपा का किया जाएगा विरोध

Fri, 27 Aug 2021 12:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 12:29 AM IST
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Farmers took decision in Sarva Dharma Sabha, JJP and BJP will be opposed
पुरानी मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन मंदिर में आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन में पहुंचे लोग। संवाद - फोटो : Jind
किसान आंदोलन के नौ महीने पूरे होने पर पुरानी मंडी में महाराजा अग्रसेन मंदिर धर्मशाला में सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता ताराचंद खान ने की। सर्वसम्मति से पांच सितंबर को यूपी के मुज्जफरनगर में होने वाली महापंचायत में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का फैसला लिया। इस सम्मेलन में विभिन्न प्रस्ताव पास किए गए। सम्मेलन के माध्यम से केंद्र सरकार को संदेश दिया कि किसान कृषि कानून वापसी पर ही घर वापसी करेंगे। इसके अलावा जब तक यह आंदोलन चलेगा तब तक जेजेपी व भाजपा का नेता अगर गांव में आता है तो उसका विरोध किया जाएगा। कृषि कानूनों को रद्द करने, एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने, किसानों पर दर्ज मामलों को रद्द करने, आंदोलन के दौरान जान गवाने वाले किसानों के परिवार को एक करोड़ आर्थिक मदद एवं आश्रित एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बारिश से खराब हुई कपास और धान की फसल की स्पेशल गिरदावरी करवा कर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने, प्रदेश सरकार द्वारा जो भूमि अधिग्रहण बिल लाया गया है, उसे वापस करने की मांग भी शामिल रही। हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई एकता को बरकरार रखने का प्रण भी सम्मेलन में लिया गया। किसान व मजदूर के कर्ज माफ करने की मांग भी की गई। किसान नेता आजाद पालवां ने कहा कि देश की आजादी के बाद यह सबसे बड़ा आंदोलन है। किसानों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन जन आंदोलन बन चुका है। अंग्रेजों के समय शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह की अगुवाई में 1907 में किसानों ने आंदोलन किया था। यह आंदोलन नौ महीने चला था। इस आंदोलन में किसानों की जीत हुई थी। आजादी के बाद जो आंदोलन अब चल रहा है, उसमें निश्चित रूप से किसान व मजदूर जीतेगा। पांच सितंबर को मुज्जफर नगर में किसान महापंचायत होगी उसको लेकर हलके के सभी गांवों के दौरे किए जाएंगे। हर गांव से अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। महिला किसान नेता सिक्किम सफाखेड़ी ने कहा कि अब से पहले महिलाएं सिर्फ घरों तक सीमित थी। इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर है। महिलाएं खेत भी संभाल रही हैं तो घर के कामकाज करके धरनों व प्रदर्शनों में शामिल हो रही हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए यह जन आंदोलन चलाया जा रहा है। दिल्ली बॉर्डर पर नौ महीनों से किसान धरने पर हैं, लेकिन केंद्र सरकार आंखें बंद किए हुए हैं। इस मौके पर सूरजमल आर्य खटकड़, टेकराम छात्तर, राजा डूमरखां, दलबीर श्योकंद, बलराज नगूरां, रामफल दहिया, जयदीप चहल, टेकराम आर्य, बलिंद्र उचाना कलां, बीरा घोघडिय़ां, वेदप्रकाश शर्मा, पाला खटकड़, अमरजीत खटकड़, रोहताश, प्रताप, वीरेंद्र पीपलथा, इमरान खान, शरीफ खान, फिरोज खान व सुरेंद्र देवी मौजूद रहे।
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