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जींद: 1509 धान के दाम एक हजार रुपये तक हुए कम, किसानों ने दिया धरना, बोले- खरीदार साजिशन किसानों को लूट रहे
Wed, 04 Oct 2023 11:15 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सफीदों, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सफीदों, जींद (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 04 Oct 2023 11:15 PM IST
सार
सफीदों मंडी में किसानों ने विरोध में नारेबाजी की। कहा कि धान के खरीदार साजिशन किसानों को लूट रहे हैं। किसान नारेबाजी करते हुए मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे और सचिव अनिल कुमार से मिलकर कार्रवाई की मांग की।
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नारेबाजी करते हुए मार्केट कमेटी की तरफ कूच करते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के जींद की सफीदों मंडी में 1509 धान के रेट 3800 से लुढ़ककर 2800 रुपये प्रति क्विंटल आ गए। इसके कारण क्षेत्र के किसान आक्रोशित हो गए और उन्होंने इसके विरोध में नई अनाज मंडी परिसर में गुरुद्वारा गेट पर धरना देकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नारेबाजी करते हुए मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे और सचिव अनिल कुमार से मिलकर कार्रवाई की मांग की।
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किसानों ने प्रशासन को चेताया कि धान के खरीदारों की मिलीभगत को बंद करके धान के रेट ठीक करवाएं, अन्यथा वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसान अजीतपाल, शेर सिंह रामपुरा व गगनदीप निमनाबाद समेत अन्य किसानों का आरोप है कि सफीदों मंडी में 1509 धान के रेट 3800 रुपये चल रहे थे और वह रेट अब 2800 रुपये रह गए हैं। इसके पीछे धान के खरीदारों की साजिश है। धान के खरीदार आपस में मिले हुए हैं और अपनी मनमर्जी के रेट लगाकर किसानों को लूटने का काम कर रहे हैं।
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1509, 1692 व 1847 तीनों एक ही किस्में हैं और किसानों को किस्मों में उलझाकर रेट का अंतर करके किसानों को सरेआम ठगा जा रहा है, जबकि किसानों इन तीनों किस्मों का बीज 300 रुपये प्रति किलो इन व्यापारियों से खरीदकर खेतों में लगाया हुआ है। इसके अलावा मंडी में जो कंबाइन का माल आ रहा है उसमें भी 500 से 600 रुपये रेट का अंतर हरे दाने के नाम का किया जा रहा है और कई दिनों तक उनकी फसलें नहीं खरीदी जाती। इसके कारण उनकी फसलें मंडी में खराब हो रही हैं।
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किसानों का कहना था कि सरकार का नियम है कि किसान का माल बोली के ऊपर बिकना चाहिए, लेकिन सफीदों मंडी में फसल की कोई बोली नहीं हो रही। बोली के नाम पर एक-दो दुकानों की बोली करवाई जाती है और उसके बाद मिलीभगत के तहत बोली तोड़ दी जाती है। किसानों का कहना था कि सभी खरीदार बोली पर माल खरीदेंगे तो उनकी फसल के दाम सही मिल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सफीदों प्रशासन केवल पराली न जलाने की बात पर बैठक लेने में व्यस्त है, लेकिन मंडी में क्या धांधली चल रही है। इसको जानने की लिए कोई अधिकारी मंडी का निरीक्षण नहीं कर रहा। इसके अलावा किसानों ने यह भी बताया कि सफीदों मंडी में पीआर धान की खरीद में भी भारी धांधली चल रही है।
पीआर धान में गीला होने या अन्य कमियां निकालकर 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कट लगाया जा रहा है। किसान को पर्चा तो सरकारी रेट का दिया जा रहा है, लेकिन उससे 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कट के नाम का नकद लेकर सरेआम लूटा जा रहा है। इसकी तरफ सरकार व प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
किसानों ने कहा कि उनकी सारी फसल बोली पर बिकवाई जाए, खरीददार व्यापारियों की मिलीभगत का पर्दाफाश करके उनके खिलाफ कार्रवाई हो, पीआर धान में कट के नाम पर अवैध वसूली बंद हो और उनका माल सही रेट पर हर रोज की रोज खरीदा जाए, अन्यथा वह बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। किसानों की बात सुनकर मार्केट कमेटी सचिव अनिल कुमार ने उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
सफीदों मंडी में धान बोली पर ही बिक रहा है। एक आध आढ़ती ने शरारत करके बोली को तोड़ दिया था। उन आढ़तियों को नोटिस जारी किया गया है। मंडी एसोसिएशन व धान खरीदारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह बिना बोली कोई भी माल नहीं खरीदेगा। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता हुआ पाया गया तो उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। -अनिल कुमार मार्केट कमेटी सचिव।