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Jind News: उचाना में किसानों ने पराली न जलाने की ली शपथ
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फोटो 24जेएनडी24-कार्यक्रम में बांटे गए फलदाद पौधे। स्रोत कर्मचारी
उचाना। फाउंडेशन फॉर डेवलपमेंट इनिशिएटिव्स (एफडीआई) ने प्रोजेक्ट समृद्धि के तहत उचाना खुर्द में जिलास्तरीय किसान गोष्ठी की। इसका उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, पराली न जलाने और मिट्टी, पानी एवं पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक करना था। गोष्ठी में 150 से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया।
कृषि विकास अधिकारी भूपेंद्र गिल ने किसानों को धान की पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में बताया। उन्होंने सीआरएम सब्सिडी, इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि एफडीआई गांव रामराय में एक मुफ्त पराली प्रशिक्षण केंद्र भी चला रहा है। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पराली से उपयोगी चीजें बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। दुर्गेश ने कहा कि पराली सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि एक काम का संसाधन है। इसका सही इस्तेमाल किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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एफडीआई के साहिल शर्मा ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण बचाने पर बात की। उन्होंने कहा कि पराली न जलाना सिर्फ खेत बचाने की कोशिश नहीं है। यह हमारी मिट्टी, पानी, हवा और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। अंत में किसानों ने पराली न जलाने और फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने की शपथ ली। पर्यावरण बचाने का संदेश देने के लिए किसानों को 200 फलदार पौधे भी बांटे गए।
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कृषि विकास अधिकारी भूपेंद्र गिल ने किसानों को धान की पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में बताया। उन्होंने सीआरएम सब्सिडी, इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी भी दी।
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उन्होंने बताया कि एफडीआई गांव रामराय में एक मुफ्त पराली प्रशिक्षण केंद्र भी चला रहा है। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पराली से उपयोगी चीजें बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। दुर्गेश ने कहा कि पराली सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि एक काम का संसाधन है। इसका सही इस्तेमाल किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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एफडीआई के साहिल शर्मा ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण बचाने पर बात की। उन्होंने कहा कि पराली न जलाना सिर्फ खेत बचाने की कोशिश नहीं है। यह हमारी मिट्टी, पानी, हवा और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। अंत में किसानों ने पराली न जलाने और फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने की शपथ ली। पर्यावरण बचाने का संदेश देने के लिए किसानों को 200 फलदार पौधे भी बांटे गए।