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Jind News: नई कृषि नीति के विरोध में किसानों ने किया प्रदर्शन

Mon, 13 Jan 2025 11:49 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 11:49 PM IST
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Farmers demonstrated against the new agricultural policy
जींद। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले भारतीय किसान यूनियन ने नई कृषि बाजार नीति के विरोध में लघु सचिवालय के सामने एकत्रित होकर नई कृषि नीति ड्राफ्ट की प्रतियां जलाई। इस दौरान किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान किसान नेताओं ने की अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन की अध्यक्षता भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला ने की।
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रामफल कंडेला ने कहा कि 25 नवंबर को केंद्र सरकार ने नई कृषि बाजार नीति का एक मसौदा तैयार किया है। इसका सीधा असर प्रत्येक राज्य की मंडियों पर पड़ेगा और मंडियां बंद भी होंगी, जबकि मंडियों का विस्तार आज के समय की जरूरत है। औद्योगिक घरानों के लिए सरकार यह नीति ला रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार औद्योगिक घरानों के लिए काम करती है। सरकार इनका तो 16 लाख करोड़ रुपये का ऋण माफ कर सकती है, लेकिन मध्यम व गरीब पर तरह-तरह से भारी टैक्स लगाती है। आज डीजल और पेट्रोल के दाम, बढ़ती महंगाई से हर आम नागरिक परेशान है। उन्होंने कहा कि हर राज्य में किसानों को मुख्यमंत्रियों के आवासों का घेराव करना होगा।
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उन्होंने किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए अपने बच्चों को कृषि क्षेत्र में लेकर आएं। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा अब एक हो गया है। उन्होंने कहा कि आज संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी, जो कॉल आएगी उसका हर हाल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारी, किसान व मजदूर विरोधी है। उन्होंने मांग की है कि पूरे देश के किसानों के लिए सभी फसलों पर एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के भाव तय किए जाएं। किसानों और मजदूरी की पूर्ण कर्जमुक्ति की जाए। लखीमपुर खीरी नरसंहार के दोषियों को सजा एवं पीड़ित सिकानों को न्याय दिया जाए और 2020-21 के किसान आंदोलन के सभी मुकदमे रद्द किए जाएं। किसानों और खेत मजदूरों की दस हजार रुपये महीना पेंशन दी जाए। इस अवसर पर छाजूराम, प्रकाश व अन्य किसान मौजूद रहे।
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