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Jind News: हीमोफीलिया के मरीजों के लिए जरूरी फैक्टर आठ इंजेक्शन खत्म
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21जेएनडी29-नागरिक अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक का फोटो।
जींद। हीमोफीलिया के मरीजों के लिए जरूरी फैक्टर आठ और नौ इंजेक्शन की जींद अस्पताल में कमी हो गई है। नागरिक अस्पताल में 42 मरीज फेक्टर आठ व नौ के रजिस्टर्ड हैं। इनमें फैक्टर आठ के 40 तथा फेक्टर नौ के दो मरीज हैं। हालांकि नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा फेक्टर इंजेक्शन को लेकर उच्च अधिकारियों को डिमांड भेजी जा चुकी है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार आगामी एक या दो दिन में मांग के अनुरूप अस्पताल को फेक्टर इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे। जो आगामी तीन माह तक का स्टॉक होगा। फिलहाल फैक्टर आठ व नौ के इंजेक्शन नहीं होने से हीमोफीलिया मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हीमोफीलिया के मरीज को फेक्टर 8-9 इंजेक्शन बेहद जरूरी होता है। ऐसे मरीज को चोट लग जाए तो रक्त के स्त्राव को रोकना बेहद मुश्किल होता है। रक्त के स्त्राव को रोकने के लिए इन मरीजों को फैक्टर 8, 9 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन मरीजों को मुफ्त लगाए जाते हैं, लेकिन अगर बाजार से यह इंजेक्शन लगाए जाएं तो बहुत महंगे पड़ते हैं। बाजार में में इंजेक्शन की एक डोज लगभग 12 हजार रुपये में उपलब्ध है। एक डोज में चार इंजेक्शन होते हैं। इससे एक सप्ताह का काम चल जाता है। बतां दे कि हीमोफीलिया दो तरह का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती और हीमोफीलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। ये एक दुर्लभ बीमारी है। एक समय तक हीमोफीलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिये डाला जा सकता है। अगर हीमोफीलिया बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से भी इलाज हो सकता है। ऐसे में चिकित्सकों का कहना है कि आमजन को हीमोफीलिया के प्रति सचेत रहना चाहिए।
बॉक्स..........
मरीजों को नहीं आने दी जाएगी कोई परेशानी
हीमोफीलिया के मरीजों के लिए जरूरी फेक्टर आठ और नौ इंजेक्शन की डिमांड भेज दी गई है। लोकल स्तर पर भी फैक्टर इंजेक्शन खरीदने के लिए बजट मुहैया करवाया जाएगा। हीमोफीलिया के मरीजों को इंजेक्शन के लिए किसी भी स्तर पर कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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-डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल जींद।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार आगामी एक या दो दिन में मांग के अनुरूप अस्पताल को फेक्टर इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे। जो आगामी तीन माह तक का स्टॉक होगा। फिलहाल फैक्टर आठ व नौ के इंजेक्शन नहीं होने से हीमोफीलिया मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हीमोफीलिया के मरीज को फेक्टर 8-9 इंजेक्शन बेहद जरूरी होता है। ऐसे मरीज को चोट लग जाए तो रक्त के स्त्राव को रोकना बेहद मुश्किल होता है। रक्त के स्त्राव को रोकने के लिए इन मरीजों को फैक्टर 8, 9 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन मरीजों को मुफ्त लगाए जाते हैं, लेकिन अगर बाजार से यह इंजेक्शन लगाए जाएं तो बहुत महंगे पड़ते हैं। बाजार में में इंजेक्शन की एक डोज लगभग 12 हजार रुपये में उपलब्ध है। एक डोज में चार इंजेक्शन होते हैं। इससे एक सप्ताह का काम चल जाता है। बतां दे कि हीमोफीलिया दो तरह का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती और हीमोफीलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। ये एक दुर्लभ बीमारी है। एक समय तक हीमोफीलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिये डाला जा सकता है। अगर हीमोफीलिया बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से भी इलाज हो सकता है। ऐसे में चिकित्सकों का कहना है कि आमजन को हीमोफीलिया के प्रति सचेत रहना चाहिए।
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मरीजों को नहीं आने दी जाएगी कोई परेशानी
हीमोफीलिया के मरीजों के लिए जरूरी फेक्टर आठ और नौ इंजेक्शन की डिमांड भेज दी गई है। लोकल स्तर पर भी फैक्टर इंजेक्शन खरीदने के लिए बजट मुहैया करवाया जाएगा। हीमोफीलिया के मरीजों को इंजेक्शन के लिए किसी भी स्तर पर कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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-डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल जींद।