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Jind News: नजीर... कई देशों के लोग प्राकृतिक खेती सीखने आ चुके
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08जेएनडी31: खेत में आए विदेशी लोगों के साथ राजन चौधरी। संवाद
सुशील टुर्ण
जींद। आज के समय में विदेशों में जाकर लाखों कमाने वालों के लिए उचाना खंड के मंगलपुर निवासी राजन चौधरी मार्गदर्शक बने हैं। उन्होंने अपने बेटे को कनाडा जाने से रोककर अपने साथ काम में लगाया, जबकि उनके बेटे ने आइलेट्स की परीक्षा भी पास की थी। बेटे की जिद पर पिता ने कहा था कि वह गांव में ऐसा काम करेंगे कि विदेशी भी उनसे सीखने के लिए गांव में आएंगे। अब वही करके दिखा भी दिया। अबतक उनके पास कई देशों के लोग प्राकृतिक खेती सीखने आ चुके हैं।
उन्होंने दिल्ली में लगभग 20 वर्ष तक व्यवसाय किया। इसके बाद ज्यादा दौलत कमाने के लिए विदेशों की तरफ रुझान न करके अपनी पैतृक जमीन को ही हथियार बना लिया। इसमें उन्होंने प्राकृतिक खेती शुरू कर विदेशी लोगों को ही गांव में आने पर मजबूर किया। राजन चौधरी ने पिछले दो से तीन वर्ष पहले गांव मंगलपुर में आकर प्राकृतिक खेती शुरू की थी। इसमें उन्होंने सबसे पहले एक एकड़ में अमरूद, तीन एकड़ में नींबू, 500 मिक्स फ्रूट प्लांटस के पौधे लगाकर शुरू किए थे।
अब उन्होंने 3500 से अधिक औषधीय व फूल के पौधे व पेड़ के साथ सब्जी शुरू की। इसके मध्य में गेहूं, गन्ना, हल्दी बिना रसायन के तैयार किए। खेत में ही वैदिक घर तैयार किया। इसमें वैदिक रसोई तैयार कर मिट्टी के बर्तन रखे हैं। फ्रीज, कूलर, एसी की घर में एंट्री भी नहीं है। उन्होंने पशुओं में भी देशी गाय रखी है। इसके पंच गव्य से भी औषधि तैयार करने का काम किया। लोगों को भी प्रकृति से जोड़ने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि प्राचीन पद्धति अपनाकर अपनी खेती से ही कमाई की जा सके।
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20 से ज्यादा देशों के लोग आते हैं जानकारी लेने
राजन चौधरी के इस काम से प्रेरित होकर इसकी जानकारी लेने के लिए अब तक लगभग 20 देशों के लोग उनके पास गांव में आ चुके हैं। वह इन विदेशी लोगों को खाने में बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी, बथुए का रायता, कई तरह की चटनियां व सब्जी की जानकारी देते हैं। इसके अलावा हरियाणवी कपड़ों के पहनने से होने वाले लाभ व खानपान के लाभ भी बताते हैं। यह भी उनकी कमाई का बेहतर हिस्सा है।
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एग्रो टूरिज्म को भी बनाया कमाई का साधन
मंगलपुर गांव में एग्रो टूरिज्म को भी कमाई का साधन बनाया है। यहां पर आने वाले लोगों को जानकारी देने के बदले कमाई कर रहे हैं। इसमें विदेशों के अलावा भारत के भी विभिन्न राज्यों से लोग आते हैं। उनके द्वारा खेतों में तैयार की गई प्राकृतिक खेती से भी मोटी आमदनी होती है। इससे उन्होंने कई लोगों को भी रोजगार दिया है। अब वह आयुर्वेद पर भी रिसर्च कर रहे हैं। इस काम में उनका बेटा तकनीकी काम पिता के साथ कर रहा है और विदेशियों को इस खेती के बारे में जागरूक कर इसकी तरफ उनका भी रूझान बढ़ा रहा है।
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जींद। आज के समय में विदेशों में जाकर लाखों कमाने वालों के लिए उचाना खंड के मंगलपुर निवासी राजन चौधरी मार्गदर्शक बने हैं। उन्होंने अपने बेटे को कनाडा जाने से रोककर अपने साथ काम में लगाया, जबकि उनके बेटे ने आइलेट्स की परीक्षा भी पास की थी। बेटे की जिद पर पिता ने कहा था कि वह गांव में ऐसा काम करेंगे कि विदेशी भी उनसे सीखने के लिए गांव में आएंगे। अब वही करके दिखा भी दिया। अबतक उनके पास कई देशों के लोग प्राकृतिक खेती सीखने आ चुके हैं।
उन्होंने दिल्ली में लगभग 20 वर्ष तक व्यवसाय किया। इसके बाद ज्यादा दौलत कमाने के लिए विदेशों की तरफ रुझान न करके अपनी पैतृक जमीन को ही हथियार बना लिया। इसमें उन्होंने प्राकृतिक खेती शुरू कर विदेशी लोगों को ही गांव में आने पर मजबूर किया। राजन चौधरी ने पिछले दो से तीन वर्ष पहले गांव मंगलपुर में आकर प्राकृतिक खेती शुरू की थी। इसमें उन्होंने सबसे पहले एक एकड़ में अमरूद, तीन एकड़ में नींबू, 500 मिक्स फ्रूट प्लांटस के पौधे लगाकर शुरू किए थे।
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अब उन्होंने 3500 से अधिक औषधीय व फूल के पौधे व पेड़ के साथ सब्जी शुरू की। इसके मध्य में गेहूं, गन्ना, हल्दी बिना रसायन के तैयार किए। खेत में ही वैदिक घर तैयार किया। इसमें वैदिक रसोई तैयार कर मिट्टी के बर्तन रखे हैं। फ्रीज, कूलर, एसी की घर में एंट्री भी नहीं है। उन्होंने पशुओं में भी देशी गाय रखी है। इसके पंच गव्य से भी औषधि तैयार करने का काम किया। लोगों को भी प्रकृति से जोड़ने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि प्राचीन पद्धति अपनाकर अपनी खेती से ही कमाई की जा सके।
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20 से ज्यादा देशों के लोग आते हैं जानकारी लेने
राजन चौधरी के इस काम से प्रेरित होकर इसकी जानकारी लेने के लिए अब तक लगभग 20 देशों के लोग उनके पास गांव में आ चुके हैं। वह इन विदेशी लोगों को खाने में बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी, बथुए का रायता, कई तरह की चटनियां व सब्जी की जानकारी देते हैं। इसके अलावा हरियाणवी कपड़ों के पहनने से होने वाले लाभ व खानपान के लाभ भी बताते हैं। यह भी उनकी कमाई का बेहतर हिस्सा है।
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एग्रो टूरिज्म को भी बनाया कमाई का साधन
मंगलपुर गांव में एग्रो टूरिज्म को भी कमाई का साधन बनाया है। यहां पर आने वाले लोगों को जानकारी देने के बदले कमाई कर रहे हैं। इसमें विदेशों के अलावा भारत के भी विभिन्न राज्यों से लोग आते हैं। उनके द्वारा खेतों में तैयार की गई प्राकृतिक खेती से भी मोटी आमदनी होती है। इससे उन्होंने कई लोगों को भी रोजगार दिया है। अब वह आयुर्वेद पर भी रिसर्च कर रहे हैं। इस काम में उनका बेटा तकनीकी काम पिता के साथ कर रहा है और विदेशियों को इस खेती के बारे में जागरूक कर इसकी तरफ उनका भी रूझान बढ़ा रहा है।