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Jind News: हर गर्भवती की होगी निगरानी, एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान को मिलेगी गति
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जींद। जिले में गर्भवतियों की मृत्यु दर कम करने, किशोरियों में एचपीवी वैक्सीन का दायरा बढ़ाने और अधिक पात्र लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिलाने को लेकर मंगलवार को जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने की।
डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाए।
बैठक में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान को लेकर भी चर्चा हुई। डीसी ने कहा कि अधिक से अधिक छात्राओं तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए स्कूलों के मुख्याध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम सरपंचों का सहयोग लिया जाए। गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी सरपंचों को पत्र भेजा जाएगा।
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मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिन गर्भवतियों की मृत्यु हुई उनमें कई मामलों में अन्य गंभीर बीमारियां भी सामने आई थीं। कुछ महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हुई।
डीसी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण किया जाए। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच हो और जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने गर्भवतियों और उनके परिजनों की काउंसलिंग, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और समय पर टीकाकरण पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बीमारियों की समय पर पहचान होने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग सभी स्तरों पर बेहतर तालमेल के साथ काम करे। बैठक में एडीसी प्रदीप कुमार, सीएमओ डॉ. सुमन कोहली, डॉ. रवि राणा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में चिकित्सकों की कमी का मुद्दा भी उठा
बैठक में सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने जिले में चिकित्सकों की कमी का मुद्दा रखा। इस पर डीसी ने कहा कि चिकित्सकों की आवश्यकता को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। जिला प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए हर संभव सहयोग करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी सरकारी अस्पताल में जरूरी दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
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डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाए।
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बैठक में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान को लेकर भी चर्चा हुई। डीसी ने कहा कि अधिक से अधिक छात्राओं तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए स्कूलों के मुख्याध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम सरपंचों का सहयोग लिया जाए। गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी सरपंचों को पत्र भेजा जाएगा।
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मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिन गर्भवतियों की मृत्यु हुई उनमें कई मामलों में अन्य गंभीर बीमारियां भी सामने आई थीं। कुछ महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हुई।
डीसी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण किया जाए। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच हो और जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने गर्भवतियों और उनके परिजनों की काउंसलिंग, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और समय पर टीकाकरण पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बीमारियों की समय पर पहचान होने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग सभी स्तरों पर बेहतर तालमेल के साथ काम करे। बैठक में एडीसी प्रदीप कुमार, सीएमओ डॉ. सुमन कोहली, डॉ. रवि राणा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में चिकित्सकों की कमी का मुद्दा भी उठा
बैठक में सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने जिले में चिकित्सकों की कमी का मुद्दा रखा। इस पर डीसी ने कहा कि चिकित्सकों की आवश्यकता को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। जिला प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए हर संभव सहयोग करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी सरकारी अस्पताल में जरूरी दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।