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Jind News: 31 लाख फूंककर भी बंदरों का उत्पात नहीं हुआ बंद
Fri, 12 Sep 2025 11:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:43 PM IST
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12जेएनडी34-जुलाना में खाली प्लॉट की दीवारों पर बैठे बंदर। संवाद
जुलाना। कस्बे में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बाजार से लेकर गली-मोहल्लों तक बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। इन बंदरों के हमले से अब तक कई लोग घायल भी हो चुके हैं।
रोजाना पुरानी अनाज मंडी और स्कूलों के आस-पास बंदरों का जमावड़ा बना रहता है। कई बार बंदर लोगों के हाथ से सामान छीन ले जाते हैं और हमला भी कर देते हैं। कस्बे के लोगों का कहना है कि समस्या अब असहनीय हो चुकी है। कस्बे के लोगों ने बताया कि सुबह-शाम बंदरों का झुंड घर की छतों पर कूदते व फांदते रहता है। कई बार बच्चों को काट भी चुके हैं। कस्बे के लोग परेशान हैं। महिलाएं छत पर कपड़े सुखाने या सब्जियां रखने भी नहीं जा पाते। हर समय डर बना रहता है कि कहीं बंदर हमला न कर दें।
1700 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से पकड़े 1847 बंदर
जुलाना में एक साल पहले 1700 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से 1847 बंदर पकड़े गए थे। बंदर पकड़ने पर 31 लाख 39 हजार 900 रुपये की लागत आई थी। इसके बावजूद लगभग तीन हजार बंदर घुम रहे हैं। प्रशासन का बंदरों की ओर कोई ध्यान नहीं है। कस्बे के लोगों की मांग है कि बंदरों को पकडक़र सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सके ताकि उन्हें हो रही परेशानी से निजात मिल सके।
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वर्जन
बंदरों को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से संपर्क किया जा रहा है। आगामी हाउस मीटिंग में एजेंडा पास करवाया जाएगा और बंदरों को पकड़ कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा। -सौरभ जैन, सचिव नपा जुलाना।
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रोजाना पुरानी अनाज मंडी और स्कूलों के आस-पास बंदरों का जमावड़ा बना रहता है। कई बार बंदर लोगों के हाथ से सामान छीन ले जाते हैं और हमला भी कर देते हैं। कस्बे के लोगों का कहना है कि समस्या अब असहनीय हो चुकी है। कस्बे के लोगों ने बताया कि सुबह-शाम बंदरों का झुंड घर की छतों पर कूदते व फांदते रहता है। कई बार बच्चों को काट भी चुके हैं। कस्बे के लोग परेशान हैं। महिलाएं छत पर कपड़े सुखाने या सब्जियां रखने भी नहीं जा पाते। हर समय डर बना रहता है कि कहीं बंदर हमला न कर दें।
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1700 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से पकड़े 1847 बंदर
जुलाना में एक साल पहले 1700 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से 1847 बंदर पकड़े गए थे। बंदर पकड़ने पर 31 लाख 39 हजार 900 रुपये की लागत आई थी। इसके बावजूद लगभग तीन हजार बंदर घुम रहे हैं। प्रशासन का बंदरों की ओर कोई ध्यान नहीं है। कस्बे के लोगों की मांग है कि बंदरों को पकडक़र सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सके ताकि उन्हें हो रही परेशानी से निजात मिल सके।
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बंदरों को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से संपर्क किया जा रहा है। आगामी हाउस मीटिंग में एजेंडा पास करवाया जाएगा और बंदरों को पकड़ कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा। -सौरभ जैन, सचिव नपा जुलाना।