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Jind News: घोषणा के बाद भी ग्रामीण चौकीदारों को नहीं जारी किए ईएसआई व पीएफ कार्ड
Wed, 03 Apr 2024 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 03 Apr 2024 12:57 AM IST
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घोषणा के कई माह बाद भी ग्रामीण चौकीदारों के ईएसआई व पीएफ कार्ड नहीं नहीं किए जारी -देश के संसाध
जींद। हरियाणा ग्रामीण चौकीदार सभा संबंधित सीटू के बैनर के तहत जिले के चौकीदारों ने मंगलवार को नेहरू पार्क में बैठक की। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान जयकरण और संचालन जिला सचिव सावन ने किया।
यूनियन के राज्य महासचिव कलीराम और सीटू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा की पूर्व मुख्यमंत्री ग्रामीण चौकीदारों के बारे में कहते थे कि वे प्रदेश की आंख, कान व नाक हैं। वह गांव की हर प्रकार की सूचना सरकार के पास पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन भाजपा सरकार में इन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद भी कई महीने बाद भी ग्रामीण चौकीदारों के ईएसआई और पीएफ कार्ड जारी नहीं किए गए हैं। न ही उनको समय पर मानदेय मिलता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को रद्द कर चार लेबर कोड में बदल कर मजदूरों व कर्मचारियों को पूंजीपतियों व मालिकों के गुलाम बनाने का पक्का प्रबंध कर दिया है। भाजपा ने खेती कानूनों को बदलने का मकसद एक तरह से पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाना और दूसरी तरफ किसान आबादी को खेती से उजाड़कर उसे मजदूर के रूप में शहरों व कस्बों में धकेलना है। जनता को राहत देने के बजाय सरकार ने देश के संसाधनों, सार्वजनिक व सरकारी क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है। जनता के पैसों से बने सरकारी उद्योगों, रेल, कोयला, बिजली, परिवहन, बीमा, बैंक सब पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। इस अवसर पर मंजीत सिंह, दिलबाग, पिंकू अलेवा, सुमित सफीदों, सतीश उचाना, रमेश,पप्पू मौजूद रहे।
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यूनियन के राज्य महासचिव कलीराम और सीटू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा की पूर्व मुख्यमंत्री ग्रामीण चौकीदारों के बारे में कहते थे कि वे प्रदेश की आंख, कान व नाक हैं। वह गांव की हर प्रकार की सूचना सरकार के पास पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन भाजपा सरकार में इन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद भी कई महीने बाद भी ग्रामीण चौकीदारों के ईएसआई और पीएफ कार्ड जारी नहीं किए गए हैं। न ही उनको समय पर मानदेय मिलता है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को रद्द कर चार लेबर कोड में बदल कर मजदूरों व कर्मचारियों को पूंजीपतियों व मालिकों के गुलाम बनाने का पक्का प्रबंध कर दिया है। भाजपा ने खेती कानूनों को बदलने का मकसद एक तरह से पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाना और दूसरी तरफ किसान आबादी को खेती से उजाड़कर उसे मजदूर के रूप में शहरों व कस्बों में धकेलना है। जनता को राहत देने के बजाय सरकार ने देश के संसाधनों, सार्वजनिक व सरकारी क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है। जनता के पैसों से बने सरकारी उद्योगों, रेल, कोयला, बिजली, परिवहन, बीमा, बैंक सब पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। इस अवसर पर मंजीत सिंह, दिलबाग, पिंकू अलेवा, सुमित सफीदों, सतीश उचाना, रमेश,पप्पू मौजूद रहे।

घोषणा के कई माह बाद भी ग्रामीण चौकीदारों के ईएसआई व पीएफ कार्ड नहीं नहीं किए जारी -देश के संसाध
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