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Jind News: बेटियों के जन्म पर जोर, कम लिंगानुपात वाले गांवों पर रहेगी विशेष नजर

Fri, 25 Sep 2026 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 12:12 AM IST
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Emphasis on the birth of daughters, villages with low sex ratio will be given special attention
जींद। जिले में बेटियों के जन्म को बढ़ावा देने और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए कम लिंगानुपात वाले गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। गर्भाधान-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
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इसके तहत जिले के सभी पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निरीक्षण होगा। वीरवार को एडीसी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक हुई। सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद प्रसव पूर्व निदान तकनीक के नोडल अधिकारी डॉ. रविंद्र मलिक ने जिले के लिंगानुपात की स्थिति बताई।
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अगस्त 2026 तक जन्म पंजीकरण प्रणाली के अनुसार जिले में जन्म के समय लिंगानुपात 898 रहा। सहायक नर्स दाई के आंकड़ों में यह 920 दर्ज किया गया। जिले के नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रों में सहायक नर्स दाई के आंकड़ों के अनुसार सात क्षेत्र हरे और दो पीले क्षेत्र में हैं। कोई क्षेत्र लाल श्रेणी में नहीं है।
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जन्म पंजीकरण के आंकड़ों के अनुसार एक क्षेत्र लाल, तीन पीले और पांच हरे क्षेत्र में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म पंजीकरण के अनुसार लिंगानुपात 910 रहा। सहायक नर्स दाई के आंकड़ों में यह 929 दर्ज हुआ। शहरी क्षेत्रों में दोनों आंकड़े क्रमश: 894 और 884 रहे। बैठक में कम लिंगानुपात वाले गांवों में नियमित निगरानी और सुधारात्मक गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

43 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी निगरानी
जिले में 43 कार्यशील पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। इसके अलावा 25 चिकित्सकीय गर्भसमापन केंद्र संचालित हैं। अब तक प्रसव पूर्व निदान तकनीक से जुड़े 36 छापे मारे गए हैं। चिकित्सकीय गर्भसमापन से संबंधित 29 छापे भी मारे गए हैं। इनमें जिले के भीतर की 20 कार्रवाई शामिल हैं। अधिनियम से संबंधित पांच न्यायालयीन मामले लंबित हैं। चिकित्सकीय गर्भसमापन से जुड़े 13 मामले भी लंबित हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के लिए 13 दल गठित किए गए हैं। सभी केंद्रों की शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जनवरी से अगस्त तक 132 मामलों की हुई जांच
बैठक में चिकित्सकीय गर्भसमापन के मामलों की पिछली कड़ियों की जांच की समीक्षा भी हुई। जनवरी से जून तक 98 मामलों की जांच पूरी हुई। इनमें 19 नोटिस जारी किए गए। जुलाई और अगस्त में 34 मामलों की जांच की गई। इनमें स्वत: गर्भपात, भ्रूण की धड़कन नहीं मिलना, जन्मजात विकृति और गर्भाशय ग्रीवा की कमजोरी के मामले शामिल रहे। एक संदिग्ध गर्भपात मामले में नोटिस भी जारी किया गया।


बेटियों के जन्म पर उत्सव की पहल को सराहा
बैठक में गांव जीतगढ़, लखमीरवाला और रोड की पंचायतों की पहल की सराहना की गई। इन गांवों में बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाया जा रहा है। साथ ही प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। अन्य पंचायतों को भी इस पहल को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायतों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और महिला संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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