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Jind News: टीबी मुक्त जिले के लिए 3.2 लाख लोगों की स्क्रीनिंग, 75 मिले संक्रमित

Tue, 15 Jul 2025 11:46 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jul 2025 11:46 PM IST
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Dr. Himanshu has written 10 books and has received the title of Powerful Woman of Haryana
15जेएनडी11: डॉ. जेके मान।
जींद। टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सात दिसंबर से शुरू किए गए अभियान के तहत 294 शिविर लगाकर 3 लाख 20 हजार 257 लोगों की स्क्रीनिंग की। इसमें 7679 लोगों के एक्सरे किए गए। 2822 लोगों के बलगम की जांच की गई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग को टीबी के 75 नए मरीज संक्रमित मिले। इनका इलाज शुरू किया गया है।
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इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्पेशल टीम तैयार की गई है। इसमें एक एनयू, एक एनसीडी, एक एमएनयू, एक टीबी स्पेशलिस्ट, एक इम्युनाइजेशन कर्मी को शामिल किया गया है। यह टीम विभिन्न तरह से जांच कर मरीजों की पहचान करेगी।
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अब टीबी मरीज को 500 रुपये की बजाय एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जहां टीबी के मरीज मिलने की संभावना ज्यादा है वहां स्पेशल एमनएनयू की गाड़ी जा रही है। जांच के दौरान जो भी सर्दी खांसी के मरीज मिलेंगे उनकी स्पेशल जांच की जा रही है।
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तीन सप्ताह से ज्यादा समय से खांसी वाले मरीजों की स्पेशल स्क्रीनिंग की जा रही है। इनका मौके पर ही आरआईयू सिस्टम से एक्स-रे किया जा रहा है। अगर वहां एआई सिस्टम यह बताता है कि उसे टीबी की संभावना हो सकती है तो मौके पर ही बलगम का सैंपल लेकर सीबी नेट मशीन से जांच की जा रही है।
एक मरीज को ठीक होने में छह महीने का समय लगता है। टीबी विभाग की टीम प्रत्येक असुरक्षित क्षेत्र में जा रही है। अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रम, रेन बसेरे, जिला जेल, ईंट भट्ठे, कारखाने और मलिन बस्ती में जांच की जा रही है।
बाक्स

इस तरह दी जाती है टीबी के मरीजों को दवाइयां

25 से 34 किलो भारवर्ग वाले मरीजों को 2 टेबलेट, 35 से 49 किलो वालों को 3 टेबलेट, 50 से 64 किलो वालों को 4 टेबलेट, 65 से 75 किलो को 5 टेबलेट और 75 से ज्यादा किलोभार के मरीज को छह टेबलेट दी जाती है। टीबी की पहचान उसके लक्षणाें से भी की जा सकती है। इसमें मरीज को 15 दिन तक खांसी, हल्का बुखार, भूख कम लगना व वजन कम होना मुख्य हैं।

वर्जन
अभियान के दौरान विभाग के कर्मियों की ओर से घर-घर पहुंचकर टीबी के मरीजों की जांच कर रही है। जिले में तीन एमएमयू जगह-जगह जांच कर रही हैं। -डाॅ. जेके मान, जिला क्षय रोग अधिकारी, जींद।
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