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Jind News: ब्रांड से नहीं साल्ट नेम से दवाइयां लिखेंगे चिकित्सक
Tue, 11 Mar 2025 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 11 Mar 2025 01:20 AM IST
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10जेएनडी13: नागरिक अस्पताल के बाहर स्थापित किया गया जनऔषधि केंद्र। संवाद
- फोटो : संवाद
जींद। नागरिक अस्पताल में जन औषधि केंद्र खुल चुका है। ऐसे में ओपीडी कर रहे चिकित्सक दवा के ब्रांड से नहीं बल्कि साल्ट नेम प्रिस्क्राइब करेंगे, ताकि जिन्हें समझने में परेशानी नहीं होगी। जन औषधि केंद्र खोलने का मुख्य उद्देश्य ही आमजन को गुणवत्ता युक्त कम दाम में जेनरिक दवाएं उपलब्ध करवाना है।
अब अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र में दवाइयों सहित कंज्यूमेबल आइटम की संख्या धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं ताकि लोगों को सस्ती दरों पर अधिक से अधिक दवाएं उपलब्ध हो सकें। आमतौर पर ब्रांडेड दवाएं (पेटेंट दवाएं) महंगी होती हैं, जबकि जेनरिक दवाएं सस्ती होती हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में जेनेरिक दवाएं ही होती हैं और 80 प्रतिशत तक सस्ती ही होती हैं। जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण लोग उसकी क्वालिटी और उसके पावर पर शक करने लगते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जेनरिक दवाओं का असर भी ब्रांडेड दवाओं के समान ही होता है, क्योंकि इन दवाओं में भी वही सॉल्ट होता है, जो ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं में होता है।
300 प्रकार की दवाइयां और 80 मेडिकल डिवाइस उपलब्ध
जन औषधी केंद्रों में करीब 1800 प्रकार की दवाइयां और 285 मेडिकल डिवाइस रखे जाते हैं। इस समय जींद के जन औषधी केंद्र पर फिलहाल 300 प्रकार की दवाइयां और 80 मेडिकल डिवाइस उपलब्ध हैं। पहले यह दवाइयां 100 तरह की रखी गई थी। धीरे-धीरे इनकी संख्या को बढाया जा रहा है।
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अस्पताल में कार्यरत चिकित्सा ब्रांड से नहीं बल्कि सॉल्ट नेम से दवाइयां लिख रहे हैं। ओपीडी में मौजूद कोई भी डॉक्टर ब्रांड नही बल्कि साल्ट नेम से दवाइयां प्रिस्क्राइब करेगा। जिन्हें समझने में परेशानी नहीं होगी। जन औषधि केंद्र खोलने का मुख्य उद्देश्य ही आमजन को गुणवत्ता युक्त कम दाम में जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराना। अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र में दवाइयों सहित कंज्यूमेबल आइटम की संख्या धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं।
डाॅ. राजेश भोला डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल जींद।
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अब अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र में दवाइयों सहित कंज्यूमेबल आइटम की संख्या धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं ताकि लोगों को सस्ती दरों पर अधिक से अधिक दवाएं उपलब्ध हो सकें। आमतौर पर ब्रांडेड दवाएं (पेटेंट दवाएं) महंगी होती हैं, जबकि जेनरिक दवाएं सस्ती होती हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में जेनेरिक दवाएं ही होती हैं और 80 प्रतिशत तक सस्ती ही होती हैं। जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण लोग उसकी क्वालिटी और उसके पावर पर शक करने लगते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जेनरिक दवाओं का असर भी ब्रांडेड दवाओं के समान ही होता है, क्योंकि इन दवाओं में भी वही सॉल्ट होता है, जो ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं में होता है।
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300 प्रकार की दवाइयां और 80 मेडिकल डिवाइस उपलब्ध
जन औषधी केंद्रों में करीब 1800 प्रकार की दवाइयां और 285 मेडिकल डिवाइस रखे जाते हैं। इस समय जींद के जन औषधी केंद्र पर फिलहाल 300 प्रकार की दवाइयां और 80 मेडिकल डिवाइस उपलब्ध हैं। पहले यह दवाइयां 100 तरह की रखी गई थी। धीरे-धीरे इनकी संख्या को बढाया जा रहा है।
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अस्पताल में कार्यरत चिकित्सा ब्रांड से नहीं बल्कि सॉल्ट नेम से दवाइयां लिख रहे हैं। ओपीडी में मौजूद कोई भी डॉक्टर ब्रांड नही बल्कि साल्ट नेम से दवाइयां प्रिस्क्राइब करेगा। जिन्हें समझने में परेशानी नहीं होगी। जन औषधि केंद्र खोलने का मुख्य उद्देश्य ही आमजन को गुणवत्ता युक्त कम दाम में जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराना। अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र में दवाइयों सहित कंज्यूमेबल आइटम की संख्या धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं।
डाॅ. राजेश भोला डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल जींद।