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सफीदों की 11 ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी

Wed, 31 Aug 2022 12:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2022 12:45 AM IST
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Disturbances in the development works of 11 gram panchayats of Safidon
सफीदों की 11 ग्राम पंचायतों में ग्रामीण विकास के साढ़े नौ लाख रुपये के बजट को हेराफेरी कर हड़प लिए जाने के मामले की जांच में उत्तरदायी पाए 13 कर्मचारियों व अधिकारियों से डीसी ने 128605 रूपये रिकवरी करने के दिए आदेश दिए है। बीडीपीओ सफीदों को जारी पत्र में डीसी ने कहा है कि खंड सफीदों की 11 ग्राम पंचायतों में करवाए गए विकास कार्यों में धोखाधड़ी करने बारे जांच एडीसी एवं अध्यक्ष जिला स्तरीय सर्तकता समिति जींद द्वारा जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार रिकवरी की 10 फरवरी 2016 से 15 जून 2022 तक 21 प्रतिशत के हिसाब से 128605 रुपये की जो राशि संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से रिकवर करके संबंधित ग्राम पंचायतों में जमा करवाई जानी बनती है।
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हेराफेरी कर नौ लाख रुपये की हुई थी गड़बड़ी
सफीदों खंड के गांव करसिंधु, रामनगर, मलिकपुर, बागडू कलां, बागडू खुर्द, बड़ौद, बसीनी, सिंघाना, खरकड़ा, खातला व कुरड़ में छह वर्ष पहले के वाटर कूलर, वेलकम गेट और सीसी बेंच आदि के निर्माण या खरीद में करीब नौ लाख रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई थी। हेराफेरी जांच में साबित हुई तो आरोपियों पर मामला दर्ज कराने व उनसे गबन की मूल व 21 प्रतिशत वार्षिक दर की ब्याज राशि वसूलने का आदेश सीएम विंडो से हुआ लेकिन कुछ आरोपियों ने केवल मूल राशि जमा कराकर विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर ली और ब्याज राशि, जो मूल से भी ज्यादा (करीब 14 लाख रुपए है), जमा नहीं कराई। इस मामले में बीडीपीओ ने आरोपियों को एक नोटिस तो भेजा गया लेकिन उसमें कोई समय सीमा निर्धारित नहीं और नोटिस पर अमल ना करने की स्थिति के परिणाम का कोई जिक्र नहीं किया गया। इस मामले में इस खंड में विवाद की अवधि में सेवा दे चुके बीडीओ शंकर गोयल, सेवानिवृत्त बीडीओ धर्मबीर सिंह, ग्राम सचिव अजमेर सिंह, ग्राम सचिव राजेंद्र सिंह, ग्राम सचिव सतीश कुमार, ग्राम सचिव ईश्वर सिंह, ग्राम सचिव कर्मबीर सिंह, ग्राम सचिव कंवर सिंह, ग्राम सचिव सुभाष चंद्र, ग्राम सचिव अमित, ग्राम सचिव कुलदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता दलबीर सिंह व कनिष्ठ अभियंता सुनील कुमार को दोषी पाया गया था जिनमे से ज्यादातर यहां से तबादला होकर जा चुके हैं।
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मामले की लीपापोती करने की जा रही कोशिश
इस गंभीर मामले की जांच के बावजूद उच्चाधिकारियों ने अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया है। लाखों रुपये की हेराफेरी के इस मामले में दो पूर्व खंड अधिकारियों, सात ग्राम सचिवों व दो कनिष्ठ अभियंताओं को गबन की गई राशि व उसके ब्याज की वसूली करके मामले की लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है। मामला वर्ष 2016 के उन दिनों का है जब ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो जाने पर इनका कामकाज खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों के हाथ मे था। तब लगभग सभी गांवों के लिए करोड़ों रुपये के कूड़ादान व अन्य सामान की खरीद की गई थी। इस खंड के 11 गांवों करसिंधु, रामनगर, मलिकपुर, बसीनी, बागडूकला, बड़ोद, सिंघाना, खरकड़ा, खातला, कुरड़ व बागडू खुर्द के लिए खरीदे कूड़ेदानों की जानकारी लेकर गांव कारखाना के पूर्व सरपंच रणबीर सिंह ने सीएम विंडो में शिकायत भेजकर गबन का आरोप लगा जांच व कार्रवाई मांगी थी। तत्कालीन उपायुक्त ने इसकी जांच जिला चौकसी कमेटी से कराई थी जिसमें दो खंड अधिकारियों, सात ग्राम सचिवों व दो कनिष्ठ अभियंताओं को दोषी पाया गया था। सीएम विंडो से दोषियों से गबन की मूल राशि, इसका ब्याज वसूलने के साथ दोषियों पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश हुआ था लेकिन जिला कमेटी ने केवल वसूली की कार्रवाई ही की। दोषी मूल राशि संबंधित ग्राम पंचायत के खाते में जमा करा चुके अब उन्हें ब्याज की राशि, जो करीब 12 लाख रुपये बनती है, जमा कराने का नोटिस सफीदों के बीडीपीओ सुरिंदर खत्री द्वारा भेजा गया है।
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गबन राशि वसूल नहीं हुई तो करवाया जाएगा केस दर्ज
इस मामले में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजकुमार चांदना का कहना है कि जिला चौकसी कमेटी ने वसूली का निर्देश ही दिया था। लक्ष्य तो सरकारी पैसे की वसूली का ही है। यदि आरोपी से गबन की गई राशि वसूल नहीं होती है तो ही उसके विरुद्ध गबन का मामला दर्ज कराया जाना बनता है और यदि राशि जमा नहीं हुई तो यह करवाया जाएगा। वहीं विधि विशेषज्ञों का कहना है कि गबन अपराध है और ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध होने पर सबसे पहले दोषी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए।
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