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आफत : कोरोना संक्रमितों की मौत का बढ़ रहा आंकड़ा, एक की मौत
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सफीदों। यूनियन बैंक में फर्जी कागजातों के सहारे ऋण लेने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। लगातार चौथे दिन बैंक मैनेजर दीनदयाल ने फिर दो लोगों के खिलाफ फर्जी कागजातों के सहारे 10 लाख रुपये का ऋण लेने की शिकायत दी है। पुलिस ने बैंक मैनेजर की शिकायत पर गांव मुआना निवासी दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
सफीदों पुलिस को दी शिकायत में बैंक मैनेजर दीनदयाल ने कहा कि गांव मुआना निवासी कर्ण सिंह व सुरेंद्र ने बैंक शाखा से दस लाख रुपये का ऋण लिया। जो कागजात उन्होंने बैंक में प्रस्तुत किए, उन पर पहले ही आरोपियों ने ऋण लिया हुआ था। कहा कि आरोपियों ने अपने ऋण के आवेदन में कहा कि कृषि कार्य के लिए बैंक से लोन लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने 2005-06, 2010-11, 2015-16 की जमाबंदी व गिरदवारी की सत्यापित कॉपी पेश की थी, जोकि बाद में फर्जी पाई गई है। आरोपियों के द्वारा अपनी जमीन के संबंध में एक सर्च रिपोर्ट व एनओसी पेश की गई, जिसमें उनकी जमीन पर किसी प्रकार का कोई ऋण नहीं दिखाया गया था, जबकि आरोपियों ने कोटेक महेंद्र बैंक असंध शाखा से 70 लाख रुपये का ऋण लिया हुआ है। आरोपियों द्वारा फर्जी रेवेन्यू रिकॉर्ड तैयार करके बैंक में दिया गया, जिसमें 70 लाख के ऋण का कोई जिक्र नहीं था। बैंक ने 14 फरवरी 2017 को आरोपियों को 10 लाख रुपये का ऋण दे दिया। जब वह लोग ऋण की रिकवरी के लिए गए तो यह खुलासा हुआ। पुलिस ने कर्ण सिंह व सुरेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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सफीदों पुलिस को दी शिकायत में बैंक मैनेजर दीनदयाल ने कहा कि गांव मुआना निवासी कर्ण सिंह व सुरेंद्र ने बैंक शाखा से दस लाख रुपये का ऋण लिया। जो कागजात उन्होंने बैंक में प्रस्तुत किए, उन पर पहले ही आरोपियों ने ऋण लिया हुआ था। कहा कि आरोपियों ने अपने ऋण के आवेदन में कहा कि कृषि कार्य के लिए बैंक से लोन लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने 2005-06, 2010-11, 2015-16 की जमाबंदी व गिरदवारी की सत्यापित कॉपी पेश की थी, जोकि बाद में फर्जी पाई गई है। आरोपियों के द्वारा अपनी जमीन के संबंध में एक सर्च रिपोर्ट व एनओसी पेश की गई, जिसमें उनकी जमीन पर किसी प्रकार का कोई ऋण नहीं दिखाया गया था, जबकि आरोपियों ने कोटेक महेंद्र बैंक असंध शाखा से 70 लाख रुपये का ऋण लिया हुआ है। आरोपियों द्वारा फर्जी रेवेन्यू रिकॉर्ड तैयार करके बैंक में दिया गया, जिसमें 70 लाख के ऋण का कोई जिक्र नहीं था। बैंक ने 14 फरवरी 2017 को आरोपियों को 10 लाख रुपये का ऋण दे दिया। जब वह लोग ऋण की रिकवरी के लिए गए तो यह खुलासा हुआ। पुलिस ने कर्ण सिंह व सुरेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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