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Jind News: सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर किया पिंडदान

Thu, 03 Oct 2024 04:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 04:09 AM IST
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Devotees took bath and offered Pind Daan on Sarvapitri Shraddha Amavasya.
जींद। सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर बुधवार को हजारों श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए महाभारत कालीन ऐतिहासिक तीर्थ पांडू पिंडारा स्थित पवित्र सरोवर में स्नान कर पिंडदान किया। सनातन धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व है। अगर किसी को अपने पितरों की पुण्यतिथि याद नहीं है तो वह सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध कर सकता है। मान्यता है कि इस धर्मशालाओं में भजन-कीर्तन का किया गया आयोजन दिन श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
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ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर मंगलवार शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग और कीर्तन का आयोजन चलता रहा। दूसरे जिलों से पिंडदान करने आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मशालाओं में रुके। रातभर भजन कीर्तन करने के बाद बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान करना शुरू कर दिया। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। लोगों ने आचार्यों की मदद से पिंडदान और तर्पण का कार्य संपन्न किया। इस मौके पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। साथ ही सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की।
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मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी

पांडू पिंडारा तीर्थ पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने यहां लगे मेले में जमकर खरीदारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। बच्चों व महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। अमावस्या पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने यहां विशेष इंतजाम किए थे। सरोवर पर पुलिस कर्मियों को यातायात नियंत्रण के लिए तैनात किया गया था।
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क्या है महत्व

पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु आते हैं।
फोटो 02जेएनडी01 से 03
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