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नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में किया प्रदर्शन

Thu, 19 Dec 2019 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2019 11:45 PM IST
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demonstration against the citizenship amendment act and nrc
शहर में प्रदर्शन करते वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता। - फोटो : Jind
जींद। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में माकपा और भाकपा ने वीरवार को शहर में प्रदर्शन किया। वामपंथी नेताओं ने कहा कि सरकार के इस फैसले का असर देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर पड़ेगा।
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इस दौरान माकपा और भाकपा कार्यकर्ताओं ने नेहरू पार्क में जनसभा की। इसके बाद शहर के बाजारों में प्रदर्शन करते हुए पर्चे बांटे।
माकपा नेता रमेश चंद्र ने कहा कि सरकार ने सांप्रदायिक नफरत और विभाजन पैदा करने के लिए राम मंदिर, गोहत्या, लव जिहाद, फर्जी राष्ट्रवाद के मुद्दे उठाने और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अब नागरिकता कानून में संशोधन करके एक और बड़ा षड्यंत्र किया है। विपक्षी पार्टियों के विरोध के बावजूद और संसदीय समिति में चर्चा किए बिना केंद्र सरकार ने संसद के दोनों सदनों में अपने संख्या बल के आधार पर नागरिकता संशोधन बिल को पास करके नया कानून बना दिया है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक देश में गैर कानूनी तरीके से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को भारत की नागरिकता प्रदान कर दी गई है। इसमें सिर्फ मुसलमानों को बाहर रखा गया है। यह कानून देश की नागरिकता को व्यक्ति विशेष के धर्म से जोड़ता है जो संविधान के धर्म निरपेक्षता के सिद्धांत के विपरीत है। देशभर में इस कानून संशोधन के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनआरसी की मूल धारणा है कि इस देश की पूरी जनता की नागरिकता की छानबीन करके तथाकथित गैर भारतीयों को बाहर कर दिया जाए। अब सभी को एनआरसी की परीक्षा पास करनी पड़ेगी। सभी को सालों साल दफ्तरों के सामने लाइन बनाकर भारतीयता का प्रमाण देने के लिए खड़ा होना पड़ेगा। देश का सारा काम ठप हो जाएगा। जनता के असली मुद्दे पीछे छूट जाएंगे। आज भी देश के करोड़ों लोगों के पास पैतृक जमीन-जायदाद व मकान की मिलकियत नहीं है। इस दौरान सुधीर शास्त्री, फूल सिंह, कपूर सिंह, संदीप, वीरभान, प्रेम मौजूद रहे।

  शहर में प्रदर्शन करते वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता।

शहर में प्रदर्शन करते वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता।- फोटो : Jind

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