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Jind News: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और एसआईआर रद्द करने की मांग उठाई
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फोटो 06जेएनडी12-जिला पार्टी कार्यालय में एकजुट हुए कांग्रेसी और अन्य दल नेता। संवाद
जींद। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों को लेकर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मंगलवार को कांग्रेस जिला कार्यालय में संयुक्त प्रेस वार्ता की। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने समेत पांच मांगें रखीं। उन्होंने आठ अक्तूबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का एलान किया।
कांग्रेस जिला प्रधान ऋषिपाल हैबतपुर, पूर्व मंत्री रामभज, महावीर गुप्ता, बलराम कटवाल, माकपा नेता का. रमेश चंद्र, जिला सचिव का. कपूर सिंह, सीपीआई के का. सतपाल सरोहा और सीपीआई (एमएल) के कामरेड विनोद ने संबोधित किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हालिया फैसलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।
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उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। दूसरी मांग एसआईआर को रद्द कर कथित तौर पर मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र लोगों के नाम दोबारा शामिल करने की रही।
हालांकि, बाद में संसद द्वारा बनाए गए 2023 के कानून में चयन समिति की संरचना बदलकर प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली व्यवस्था की गई।
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के मत अलग-अलग रहे और मामला बड़ी पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया है। इस अवसर पर महासचिव पवन दुहन, धर्मपाल प्रधान, वजीर पानू, महिपाल कौशिक, सत्तू संगतपुरा, सुमन लता, सुशील शर्मा, मंजीत आशन, जयदीप लाठर और विनोद रेढू मौजूद रहे।
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कांग्रेस जिला प्रधान ऋषिपाल हैबतपुर, पूर्व मंत्री रामभज, महावीर गुप्ता, बलराम कटवाल, माकपा नेता का. रमेश चंद्र, जिला सचिव का. कपूर सिंह, सीपीआई के का. सतपाल सरोहा और सीपीआई (एमएल) के कामरेड विनोद ने संबोधित किया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हालिया फैसलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।
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उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। दूसरी मांग एसआईआर को रद्द कर कथित तौर पर मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र लोगों के नाम दोबारा शामिल करने की रही।
हालांकि, बाद में संसद द्वारा बनाए गए 2023 के कानून में चयन समिति की संरचना बदलकर प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली व्यवस्था की गई।
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के मत अलग-अलग रहे और मामला बड़ी पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया है। इस अवसर पर महासचिव पवन दुहन, धर्मपाल प्रधान, वजीर पानू, महिपाल कौशिक, सत्तू संगतपुरा, सुमन लता, सुशील शर्मा, मंजीत आशन, जयदीप लाठर और विनोद रेढू मौजूद रहे।