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Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Demanding restoration of 16-kanal pond land, villagers protested against the Panchayat.

Jind News: 16 कनाल तालाब की भूमि बहाल करने की मांग, ग्रामीणों ने पंचायत के खिलाफ किया प्रदर्शन

Thu, 09 Jul 2026 02:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 02:00 AM IST
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Demanding restoration of 16-kanal pond land, villagers protested against the Panchayat.
फोटो 8एसएफडीएम2 पंचायत द्वारा नाम मात्र छोड़े गए तालाब के समीप खड़े होकर प्रदर्शन करते हुए गां
सफीदों। क्षेत्र के गांव कुरड़ में 16 कनाल पंचायती तालाब की भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण नाम मात्र के छोड़े गए तालाब के पास एकत्रित हुए और पंचायत के खिलाफ प्रदर्शन किया। 16 कनाल क्षेत्र में तालाब की खुदाई कराने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे सफीदों एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से तालाब की भूमि को खेती के लिए बोली पर दे दिया जबकि यह भूमि वर्षों से तालाब और धार्मिक आस्था से जुड़ी रही है। उनका कहना है कि पूरे रकबे में तालाब विकसित करने के बजाय केवल एक छोटा हिस्सा तालाब के रूप में छोड़ दिया गया जिससे गांववासियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
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भारतीय किसान यूनियन (हल्का सफीदों) के प्रधान नवीन कुमार के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में सिल्लू, राकेश, रणधीर सिंह, टीकाराम, जैकी, दलबीर सिंह, सुरेंद्र, नरेंद्र सिंह, मनजीत, अंकित मलिक, कृष्ण, प्रवीण, हरदीप सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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प्राचीन तीर्थ स्थल पर आज भी हैं 52 पौड़ियां, किसान ने धान लगाने से किया इन्कार
गांव कुरड़ के ग्रामीणों ने दावा किया है कि तालाब के लिए आरक्षित 16 कनाल पंचायती भूमि (किला नंबर 97, खेवट नंबर 564) केवल सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बल्कि गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार इसी स्थान पर पहले गांव का प्राचीन तीर्थ हुआ करता था जहां आज भी कांच की 52 पौड़ियां मौजूद हैं और दूर-दराज से संत-महात्मा साधना के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि किसान नरेंद्र ने इस भूमि को बोली पर लिया था उसने भी धान की रोपाई करने से इन्कार कर दिया है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से तालाब की पूरी खुदाई नहीं कराई गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पंचायती भूमि पर जल्द से जल्द तालाब की खुदाई कराई जाए और भूमि का मूल स्वरूप बहाल किया जाए।
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