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पुलिस भर्ती में प्रश्रपत्र के लीक होने की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर जनसंगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सरकार का फूंका
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सरकार का पुतला फुंकते एसएफआई व भारत जनवादी नौजवान सभा के सदस्य। संवाद।
- फोटो : Jind
जींद। भारत की जनवादी नौजवान सभा, एसएफआई और जनवादी महिला समिति ने भर्ती परीक्षाओं के लगातार लीक हो रहे प्रश्नपत्रों के विरोध में बस अड्डे से लेकर लघु सचिवालय परिसर तक प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सरकार का पुतला भी फूंका।
इस दौरान संगठनों के सदस्यों ने 20 अगस्त को चंडीगढ़ में भी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया और एचएसएससी की परीक्षा को लीक करवाने की भूमिका पर शंका जताते हुए इस बोर्ड को भंग कर उच्च स्तर की न्यायिक जांच की मांग की है।
तीनों संगठनों के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि राज्य में विभिन्न पदों पर होने वाली भर्ती परीक्षाओं के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया स्थापित करने का दायित्व एचएसएससी के जिम्मे है। इस संबंध में विफलता के लिए एचएसएससी की प्रमुख जवाबदेही बनती है। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होना कोई पहला मामला नहीं है।
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हर बार जांच के नाम पर कुछ छोटे अपराधियों को गिरफ्तार कर मामले को दबा दिया जाता है। किसी भी मामले में एचएसएससी और संस्थान की भूमिका और जवाबदेही की जांच नहीं की गई है। एसएफआई के जिला सचिव मनीष ने कहा कि राज्य में भयंकर बेरोजगारी के चलते जब भी कोई सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगे जाते हैं तो लाखों युवक-युवतियां फार्म भरते हैं। इससे सरकार को हर बार करोड़ों रुपये की कमाई होती है।
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इस दौरान संगठनों के सदस्यों ने 20 अगस्त को चंडीगढ़ में भी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया और एचएसएससी की परीक्षा को लीक करवाने की भूमिका पर शंका जताते हुए इस बोर्ड को भंग कर उच्च स्तर की न्यायिक जांच की मांग की है।
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तीनों संगठनों के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि राज्य में विभिन्न पदों पर होने वाली भर्ती परीक्षाओं के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया स्थापित करने का दायित्व एचएसएससी के जिम्मे है। इस संबंध में विफलता के लिए एचएसएससी की प्रमुख जवाबदेही बनती है। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होना कोई पहला मामला नहीं है।
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हर बार जांच के नाम पर कुछ छोटे अपराधियों को गिरफ्तार कर मामले को दबा दिया जाता है। किसी भी मामले में एचएसएससी और संस्थान की भूमिका और जवाबदेही की जांच नहीं की गई है। एसएफआई के जिला सचिव मनीष ने कहा कि राज्य में भयंकर बेरोजगारी के चलते जब भी कोई सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगे जाते हैं तो लाखों युवक-युवतियां फार्म भरते हैं। इससे सरकार को हर बार करोड़ों रुपये की कमाई होती है।