फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Damage to crops... Farmers forced to queue for compensation

Jind News: फसलों को नुकसान... मुआवजे के लिए लाइन में लगने को मजबूर किसान

Thu, 23 Mar 2023 01:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Thu, 23 Mar 2023 01:21 AM IST
विज्ञापन
Damage to crops... Farmers forced to queue for compensation
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

झज्जर। बारिश और ओलों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिले में गेहूं और सरसों की फसल को जबर्दस्त नुकसान हुआ है। थोड़ा मौसम खुलने पर किसान खेत में बारिश में भीगी फसल को सुखाने में जुटा है लेकिन उसे उत्पादन गिरने की चिंता है। पकी हुई सरसों की फसल गिर गई। गेहूं की बालियां टूट गईं। अब मायूस अन्नदाता क्षतिग्रस्त फसल के मुआवजे के लिए आवेदन जमा करने के लिए लाइन में लगने को मजबूर है। उसे ये भी भरोसा नहीं कि उसे मुआवजा मिलेगा भी या नहीं। जिले में अब तक करीब 4572 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। पंजीकरण करने की प्रक्रिया जारी है।

शहर के किसान सदन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फार्म भरने के लिए जिले के सैकड़ो किसान पहुंचे। हालत ये थी कि कार्यालय खुलने से पहले ही सुबह सात बजे से किसान यहां पहुंचने लगे थे। भूखे प्यासे किसान सुबह सवेरे घर से निकल गए थे। बुधवार को करीब 1968 किसानों का सरसों और गेहूं की फसल के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से किया गया है। जिले के 1726 किसानों ने गेहूं का पंजीकरण पोर्टल पर करवाया तो 242 किसानों ने सरसों फसल का पंजीकरण क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज करवाया।
विज्ञापन

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दो तरह से किसानों को मुआवजा देती है। इसमें कटी हुई फसल व खड़ी हुई फसल जो आपदा में खराब हो गई हो। इस दौरान किसान फोटो, प्रार्थना पत्र की आईडी, आधार कार्ड, पॉलिसी पेज नंबर लेकर फॉर्म भरना पड़ता है। जिस पर विभाग ओर से बीमा कंपनी की टीम गठित की जाती है और 14 दिन में सर्वे करने के बाद संबंधित किसान को मुआवजे की राशि दी जाती है। जिला कृषि सहायक सांख्यिकी अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि पंजीकरण होने के 10 से 15 दिन के अंदर तीन कमेटी मेंबर बनाए जाते हैं। जिसमें खंड कृषि अधिकारी , बीमा कंपनी का प्रतिनिधि व स्वयं किसान होता है और वह अपना सर्वे करने के बाद बीमा एजेंसी किसान को मुआवजा देने का काम करती है। पहले फसल का फोटो नहीं लिया जाता था और अब फसल का फोटो भी लिया जा रहा है। जिसके चलते उन्हें दोबारा से खेतों में जाकर फसल का फोटो लाना पड़ेगा ।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed