{"_id":"602abf8d8ebc3ee96e7cf041","slug":"crsu-registrar-relieved-will-return-to-mdu-jind-news-rtk595571592","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीआरएसयू के रजिस्ट्रार हुए कार्यमुक्त, वापस एमडीयू में देंगे सेवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीआरएसयू के रजिस्ट्रार हुए कार्यमुक्त, वापस एमडीयू में देंगे सेवाएं
विज्ञापन
प्रोफेसर राजेश पूनिया।
- फोटो : Jind
चौधरी रणबीर सिंह विवि के रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजेश पूनिया को सरकार ने कार्य मुक्त कर दिया है। अब वह दोबारा एमडीयू में अपनी सेवाएं देंगे। पूनिया करीब 14 महीने पहले सीआरएसयू में रजिस्ट्रार बने थे। वहीं कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में अब कुरुक्षेत्र विवि के कुलपति को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। अब विवि में न तो नियमित कुलपति है और न ही रजिस्ट्रार।
गौरतलब है कि छह महीने पहले सीआएसयू में भर्तियों को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय सीआरएसयू के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने पूर्व कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी व रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजेश पूनिया पर मनमाने ढंग से भर्ती करने के आरोप लगाए थे। हालांकि दोनों ने ही इन आरोपों को नकार दिए थे। प्रोफेसर संदीप बेरवाल अपने चहेते को नौकरी लगवाने के आरोप लगाए थे। इसके बाद ही पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजबीर मोर व प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने सरकार व राज्यपाल को शिकायत दी थी। माना जा रहा है कि इसके चलते ही यह फैसला लिया गया है।
सरकार ने पूछी थी राय
सरकार द्वारा राय पूछी गई थी कि यहां रहना चाहते हो या नहीं। इस पर मैंने सीआरएसयू में नहीं रहने की राय दी थी। इस पर सोमवार को पत्र आया है। इसके बाद मैंने एमडीयू में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं।
विज्ञापन
प्रोफेसर राजेश पूनिया।
विज्ञापन
गौरतलब है कि छह महीने पहले सीआएसयू में भर्तियों को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय सीआरएसयू के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने पूर्व कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी व रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजेश पूनिया पर मनमाने ढंग से भर्ती करने के आरोप लगाए थे। हालांकि दोनों ने ही इन आरोपों को नकार दिए थे। प्रोफेसर संदीप बेरवाल अपने चहेते को नौकरी लगवाने के आरोप लगाए थे। इसके बाद ही पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजबीर मोर व प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने सरकार व राज्यपाल को शिकायत दी थी। माना जा रहा है कि इसके चलते ही यह फैसला लिया गया है।
विज्ञापन
सरकार ने पूछी थी राय
सरकार द्वारा राय पूछी गई थी कि यहां रहना चाहते हो या नहीं। इस पर मैंने सीआरएसयू में नहीं रहने की राय दी थी। इस पर सोमवार को पत्र आया है। इसके बाद मैंने एमडीयू में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं।
विज्ञापन
प्रोफेसर राजेश पूनिया।