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सीआरएसयू की छात्राओं ने बनाया विशेष प्रकार का शीशा

Mon, 25 May 2020 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 11:48 PM IST
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CRSU girl made special type of mirror
जानकारी देते कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी। - फोटो : Jind
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की दो छात्राओं ने ऐसा शीशा बनाया है जो इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में काम आ सकेगा। इसका मुख्यतौर पर एलईडी लाइट्स व लेजर में इस्तेमाल हो सकता है। इस विधि से शीशा बनाने से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार सस्ते चीनी माल को बेहतर गुणवत्ता के साथ कड़ी चुनौती दे सकेगा। इस खोज का अभी प्रयोग में लाने में समय लगेगा, लेकिन इससे भविष्य के रास्ते खुल गए हैं। जल्द ही इस खोज पर आधारित शोध पत्र नीदरलैंड के शोध जर्नल में प्रकाशित होगा। सीआरएसयू के कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है कि अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नलल में स्नातकोत्तर कोर्स तक के पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों का शोध प्रकाशित होगा।
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सोमवार को सीआरएसयू में आयोजित पत्रकारवार्ता में कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी ने बताया कि अनुसंधान के विषय में विवि की यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। इसके लिए विवि की टीम ने काफी कड़ी मेहनत व प्रयास किए हैं। इस पर विवि की द्वितीय वर्ष की छात्रा करनाल निवासी शिवानी जागलान व हिसार जिला के राजस्थल गांव निवासी पूनम बिसला ने काम किया है। आरबी सोलंकी ने कहा कि जर्नल ऑफ नॉन क्रिस्टलाइन सॉलिड में प्रकाशित होगा। अनुसंधान के क्षेत्र में पूरे देश के विश्वविद्यालयों में जींद विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार एमएससी स्तर के विद्यार्थियों द्वारा इस तरह की उपलब्धि प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी अपनाओ के संदेश को सार्थक सहयोग निभाने पर भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश पुनिया एवं प्राध्यापक डॉ. निशा को भी अनुसंधान में छात्राओं का सहयोग करने पर सराहना की।
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पाठ्यक्रम में छिपा है सफलता का राज
इस दौरान ऑनलाइन पत्रकार वार्ता से जुड़े भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश पुनिया ने कहा कि सीआरएसयू का पाठ्यक्रम बहुत ही खास ढंग से तैयार किया गया है। इसमें तीसरे सेमेस्टर में ही अनुसंधान का कार्य करवाया जाता है, जबकि देश के अन्य विश्वविद्यालयों में चौथे सेमेस्टर में यह कार्य करवाया जाता है। इसी का परिणाम है कि दोनों छात्राओं ने काफी अच्छा काम किया है।
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इस अनुसंधान में बोरो सिलिकेट ग्लास के बारे में बताया गया
इस अनुसंधान में बोरो सिलिकेट ग्लास के विषय में बताया कि इसका प्रयोग स्क्रीन, एलईडी व लेजर इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के क्षेत्र में अति उपयोगी सिद्ध होगा। जिससे इसकी ज्यादा तापमान में स्क्रीन खराब नहीं होगी। इस शीशे की टेस्टिंग आंध्र प्रदेश एवं दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में करवाई गई। जिससे थोड़े खर्च पर अधिक ऊर्जा की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों व उनके प्राध्यापकों ने कड़ी मेहनत व ईमानदारी से काम किया। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान जींद विश्वविद्यालय को मिली है।
डॉ. निशा, सहायक प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, सीआरएसयू।
नोबेल पुरस्कार जीतने के बराबर
अभी तक शोध पत्रों व जर्नल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। फिर निशा ने इसके बारे में बताया और ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय जर्नल का अध्ययन शुरू किया। पता चला कि इस प्रकार जर्नल में शोध पत्र प्रकाशित होना कितनी बड़ी बात है। यह सब नोबेल पुरस्कार जीतने के बराबर है।

पूनम बिसला, छात्रा।
बेहद खुशी के क्षण
इस प्रयोग में विवि के कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी, रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजेश पूनिया, प्रोफेसर निशा का पूरा मार्गदर्शन मिला है। यह शोधपत्र जिस स्तर पर प्रकाशित हो रहा है यह बहुत ही खुसी की बात है। शिक्षकों के मार्गदर्शन में यह सब हो पाया है।
शिवानी जागलान, छात्रा।
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