फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   crime

मोर्चरी शव ले गए परिजन, भागती रही पुलिस

Fri, 28 Aug 2015 12:38 AM IST
जींद/ अमर उजाला, ब्यूरो
जींद/ अमर उजाला, ब्यूरो Updated Fri, 28 Aug 2015 12:38 AM IST
विज्ञापन
पुलिस मुठभेड़ में भिड़ताना निवासी पवन की मौत के बाद परिजनों ने वीरवार को सामान्य अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने बुधवार देर रात हुई मुठभेड़ को फर्जी बताकर अलेवा थाना प्रभारी और स्टाफ सदस्यों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। नाराज लोगों का कहना था कि शव का पोस्टमार्टम मामला दर्ज होने से पहले नहीं करने देंगे। इस दौरान परिजन शवगृह से शव को निकालकर ले गए। इससे पहले शव को लेकर परिजनों और पुलिस में जमकर झड़प भी हुई।
विज्ञापन


पुलिस ने लोगों को खदेड़ने के लिए जहां लाठी चार्ज किया, वहीं नाराज लोगों ने डीएसपी के गाड़ी के शीशेे तोड़ दिए। बाद में पुलिस ने पीछा कर पवन के शव को गांव सिंधवीखेड़ा के निकट उसके परिजनों ने दोबारा कब्जे में ले लिया। दूसरी तरफ नाराज परिजनों ने गांव ललितखेड़ा पहुंचकर जींद-गोहाना मार्ग पर जाम लगा दिया। इसी दौरान हंगामे को देखकर एसडीएम योगेश मेहत्ता अस्पताल पहुंचे और परिजनों से बातचीत की लेकिन परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया। परिजन शव को जींद-गोहाना मार्ग पर पहुंचे वहां कुछ देर शव रखकर जाम लगाए रखा। इसके बाद देर रात परिजन जाम खोलकर शव को घर ले गए।
विज्ञापन

गांव दालमवाला के निकट देर रात पुलिस से हुई मुठभेड़ का सामान्य अस्पताल में हाई वोल्टेज ड्रामा चला। पवन की मौत और उसके दूसरे साथी गांव गुसाईखेड़ा निवासी संदीप के घायल होने को परिजनों ने फर्जी मुठभेड़ करार दिया। परिजनों के तीखे तेवरों को देखकर कई घंटों तक पुलिस सामान्य अस्पताल में नहीं पहुंची। बाद में काफी देर बाद सदर थाना प्रभारी सज्जन कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे तो परिजनों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इसी दौरान गांव भिड़ताना की काफी संख्या में महिलाएं लाठी और डंडों से लैस होकर अस्पताल पहुंच गईं। मृतक के परिजनों के कड़े तेवर को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुलिस का कहना है कि कैथल में बुधवार रात को कई जगह पर लूटपाट की वारदात हुई थी। वारदात के बाद कैथल पुलिस अपराधियों का पीछा कर रही थी। कैथल पुलिस ने अपराधियों के जींद की तरफ निकलने की बात कही। इस पर अलेवा थाना पुलिस ने गांव नगूरां से बीट गाड़ी का पीछा करना शुरू कर किया और गांव दालमवाला के निकट गाड़ी सवार और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो गई। इसमें गांव भिड़ताना निवासी पवन की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि उसका साथी संदीप घायल हो गया।

उधर परिजनों का कहना है कि पवन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर अलेवा थाना पुलिस पर हत्या करने का आरोप लगाया। इस मामले में अलेवा थाना प्रभारी और उसके स्टाफ पर हत्या करने, 20 लाख रुपये का मुआवजा और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग को लेकर हंगामा शुरू किया। बाद में एसडीएम योगेश मेहत्ता सामान्य अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों को मामले की जांच करने के बाद पुलिस पर मामला दर्ज करने का आश्वासन दिया, लेकिन परिजन इस बात पर अड़े रहे कि जब तक पुलिस कर्मचारियों पर मामला दर्ज नहीं होता तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। बातचीत सिरे नहीं चढ़ने के बाद परिजनों ने शव को सामान्य अस्पताल के शवगृह से निकालकर गाड़ी में रख दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को ले जाने से रोका, लेकिन परिजन नहीं माने। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में पुलिस और परिजनों में झड़प हो गई। परिजन शव को सामान्य अस्पताल से जबरदस्ती बाहर ले आए। इससे पहले महिलाओं ने पथराव कर पुलिस का जमकर विरोध किया। नाराज लोगों ने डीएसपी की गाड़ी क्षतिग्रस्त भी कर दी। पुलिस ने गाड़ी का पीछा करके शव को गांव सिंधवीखेड़ा से वापस लेकर आई। मामला बिगड़ता देखकर एसएसपी अभिषेक जोरवाल, डीएसपी कुलवंत बिश्नोई, दिनेश यादव पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। बाद में पुलिस ने चिकित्सकों के बोर्ड से शव का सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया।

चाचा में लिखित में दी शिकायत
मृतक पवन के रिश्ते में चाचा लगने वाले गांव अनूपगढ़ निवसी शमशेर ने एसडीएम को लिखित में दी शिकायत में कहा कि 26 अगस्त को उसका भतीजा पवन अपने साथी गांव संदीप के साथ किसी कार्यवश नगूरा गांव गए थे। गांव नगूरां में पुलिस की गाड़ियों ने संदीप की गाड़ी के पीछे गोली मारी। संदीप और पवन डर कर गाड़ी समेत कैथल की तरफ भाग निकले। इसके बाद कैथल पुलिस आ गई और मेरा भतीजा पवन और उसका साथी संदीप गाड़ी समेत गांव दालमवाला की तरफ भागे। इस दौरान अलेवा थाना प्रभारी और उसके स्टाफ ने गाड़ी को रुकवाकर पवन और संदीप को मौके पर गोलियां मार दी। इसमें पवन की मौके पर ही मौत हो गई। अलेवा थाना प्रभारी ने पवन के शव को सरकारी अस्पताल में रखवा दिया और संदीप को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। पुलिस ने संदीप को भी जान से मारने की नीति से गोली मारी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर दिखाने के लिए और हत्या के सबूतों को मिटाने के लिए गाड़ी को गांव शाहपुर और नगूरां गांव के बीच में गिरवा कर सबूतों मको खुर्द बुर्द कर दिया। उसने कहा कि उसका भतीजा पवन बेकसूर है और उसके खिलाफ कोई बड़ा आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पवन के मरने के बाद पुलिस ने लाइसेंसी पिस्तौल उठाकर पुलिस पीसीआर पर स्वयं ही गोलियां चलाई। संदीप से पीजीआई में पुलिस कर्मचारी नहीं मिलने दे रहे हैं।
 
महिलाओं के नेतृत्व में अस्पताल से निकाला शव
एनकाउंटर करने वाले पुलिस कर्मचारियों पर मामला दर्ज नहीं होने की सूचना पाकर गांव भिड़ताना की महिलाएं लाठी और डंडों से लैस
होकर अस्पताल पहुंच गईं। परिजनों की तीखे तेवरों को देखकर अस्पताल को पुलिस ने छावनी बना दिया गया, लेकिन महिलाओं ने लाठी और डंडे लेकर शव की गाड़ी को पीछे करके आगे निकल गई। पुलिस ने महिलाओं को रोकने का प्रयास किया। इसके बाद परिजनों के साथ पुलिस की झड़प शुरू हो गई। परिजनों के तीखे तेवरों को देखकर पुलिस पीछे हट गई और परिजन शव को लेकर वहां से निकल लिए। शव को अस्पताल से बाहर निकलते ही पुलिस की सांसें फूल गई और गाड़ी का पीछा करना शुरू किया। शव वाली गाड़ी ने गांव सिंधवीखेड़ा के निकट तक पुलिस की दो जिप्सियों को साइड नहीं दी, काफी मशक्कत के बाद पुलिस की जिप्सियां आगे निकली और गाड़ी को रोककर शव को वापस सामान्य अस्पताल लेकर आए।

पैदल ही दो किलोमीटर दौड़ी पुलिस
सामान्य अस्पताल से परिजनों द्वारा शव निकालने के बाद वहां पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान डीएसपी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों पर कड़ी फटकार लगाकर कहा कि शव किस तरह से अस्पताल से बाहर निकल गया। डीएसपी की कड़ी फटकार के बाद पुलिस कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान काफी संख्या में पुलिस कर्मचारी पैदल ही गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया, लेकिन परिजनों ने गाड़ी की रफ्तार को बढ़ा दी। पुलिस कर्मचारी सामान्य अस्पताल से लेकर गोहाना रोड बाईपास से आगे तक पैदल ही दौड़ते रहे। लेकिन बाद में शव की गाड़ी पकड़ने की सूचना के बाद पैदल चल रहे पुलिस कर्मचारियों के लिए पुलिस लाइन से बस भेजी गई और उनको फिर से सामान्य अस्पताल लाया गया। पुलिस ने शव वाले वाहन का पीछा करते समय गोहाना रोड पर पवन के परिजनों पर लाठियां भांजी। दूसरी ओर से भी पथराव किया गया। इसमें कई लोगों को चोटें आई हैं।

पोस्टमार्टम की करवाई के लिए की घोषणा
शव को सामान्य अस्पताल में लाने के बाद एसएसपी अभिषेक जोरवाला, एसडीएम योगेश मेहत्ता अस्पताल में पहुंचे। यहां पर लाउड स्पीकर से घोषणा की गई कि शव का चिकित्सकों के बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। अगर मृतक का परिजन पोस्टमार्टम की कार्रवाई में शामिल होना चाहता है तो जल्द से जल्द पहुंच जाए। लेकिन मृतक का कोई भी मरीज अस्पताल में मौजूद नहीं होने के कारण पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में चिकित्सकों के बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम करवा दिया।

पवन की मौत की सूचना रात तीन बजे गांव में पहुंची। पुलिस के अनुसार गाड़ी और दोनों युवकों की तलाशी लेने पर एक पर्ची मिली, जिसमें पवन का भिड़ताना गांव का होने का पता चला। इस पर पुलिस ने अपना कर्मचारी गांव में पता करने के लिए भेजा, जो रात तीन बजे गांव में पहुंचा।

गोहाना मार्ग जाम
शव पुलिस द्वारा कब्जे में लिए जाने के बाद परिजन गांव ललितखेड़ा के बस अड्डे पर पहुंच गए और ग्रामीणों को बुलाकर जींद-गोहाना मार्ग पर सफेदे के पेड़ काटकर जाम लगा दिया। मार्ग जाम होने के चलते मार्ग के दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। कई घंटों मार्ग जाम रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जाम खुलवाने के लिए वहां पर नहीं पहुंचा। जाम लगा रहे लोगों का कहना था कि जब तक पुलिस कर्मचारियों पर मामला दर्ज नहीं होता तब तक वह जाम नहीं खोलेंगे।

शव को अस्पताल से उठाकर रखा सड़क पर
मृतक पवन के परिजनों की डीसी अजित बालाजी जोशी और एसएसपी अभिषेक जोरवाल से बातचीत हुई। दोनों ही अधिकारियों ने पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और परिजनों पर हुई लाठीचार्ज की जांच का आश्वासन दिया। इस पर वीरवार देर शाम परिजन शव को सामान्य अस्पताल से उठाकर ले गए। परिजन अस्पताल से उठाने के बाद शव का अंतिम संस्कार करने की बजाए गांव ललितखेड़ा में लगाए जाम वाले स्थल पर पहुंच गए। वहां पर परिजनों ने शव को जींद-गोहाना मार्ग पर रखकर जमा लगाया हुआ है।

संदीप पर दर्ज केसों की सूची
पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए गोसाई खेड़ा निवासी संदीप के खिलाफ दर्जन भर केस विभिन्न थानों में दर्ज हैं। सबसे अधिक वारदात पानीपत की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार संदीप बचपन से ही आपराधिक पृष्ठभूमि से रहा है। संदीप के खिलाफ 19 फरवरी 1998 में पानीपत के मॉडल टाऊन पुलिस थाना में 103 नंबर मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें संदीप पर 379 धारा लगी है। दो फरवरी 1998 को ही मॉडल टाऊन थाना पानीपत में दूसरा मुकदमा भी दर्ज हुआ है। 23 नवंबर 1999 को पानीपत के ही मॉडल टाऊन पुलिस थाना में दर्ज  मुकदमा नंबर 521 में संदीप पर अवैध हथियार रखने के आरोप लगे हैं। 26 नवंबर 2001 को मॉडल टाऊन पुलिस थाना पानीपत में दर्ज केस नंबर 394 में संदीप पर हत्या, अवैध हथियार रखने और हमला करने के आरोप में केस दर्ज है। पानीपत शहर थाना पुलिस में दर्ज केस नंबर 43 में संदीप के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पंजाब के राजपुरा में 19 जुलाई 2007 को दर्ज केस में संदीप पर अवैध हथियार रखने का मुकदमा दर्ज है। 19 जुलाई 2007 को पंजाब के राजपुरा में संदीप के खिलाफ एक और केस दर्ज हुआ है। 23 जुलाई 2007 को संदीप के खिलाफ अंबाला शहर थाना में दर्ज मुकदमा नंबर 237 में जानलेवा हमला करने सहित अन्य धाराओं के तहत केस
दर्ज हैं। दो फरवरी 2010 को अंबाला शहर थाना में संदीप के खिलाफ 223/224 धाराओं के तहत केस दर्ज है। जुलाना थाना में 14 मार्च 2010 को दर्ज केस नंबर 78 में संदीप पर लूटपाट का केस दर्ज है। सोनीपत शहर थाना में 17 अप्रैल 2010 को दर्ज के में संदीप पर लूटपाट सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज है। दो मई 2011 को मधुबन थाना में संदीप के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के केस दर्ज हैं।

पुलिस की कहानी           
1. प्रशासन के साथ बातचीत के लिए भाजपा नेता राजू मोर के नेतृत्व में पहुंची कमेटी के समक्ष डीएसपी विरेंद्र सांगवान ने कहा कि संदीप और पवन ने राजौंद थाना क्षेत्र में लूटपाट की घटना को अंजाम देकर अलेवा क्षेत्र की ओर आ गए। इसकी वीटी होने पर अलेवा पुलिस भी हरकत में आ गई। कैथल पुलिस से मिली वीटी के अनुसार एक बीट गाड़ी में लुटेरे भागे हैं। ऐसे में अलेवा पुलिस ने गाड़ी का पीछा किया। इस दौरान पुलिस ने करीब सात-आठ राउंड फायरिंग की। इसमें से एक गोली बीट गाड़ी की डिग्गी में लगकर सीट का चीरती हुई पवन को लगी है। जिसकी मौत हो गई। इसके अलावा दो गोलियां संदीप को लगी हैं, जो घायल है। डीएसपी विरेंद्र सांगवान के अनुसार अभी यह भी साफ नहीं है कि पवन की मौत गोली से हुई है या एक्सीडेंट से। पुलिस का कहना है कि गाड़ी सड़क किनारे खंभे से टकराई है।
2. पुलिस के अनुसार गाड़ी बिना टायर के सिर्फ लोहे के रिम पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से चल रही थी। इसके कारण एक्सीडेंट हुआ है।
----------------------------
परिजनों के सवाल
1. परिजन पुलिस की कहानी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस सूत्रों से उन्हें पता चला है कि पवन को पहले पकड़ कर गोली मारी गई है और फिर गाड़ी को शाहपुर गांव के पास लाया गया है।
2. परिजनों का कहना है कि बिना टायर के गाड़ी इतनी अधिक गति से नहीं चल सकती। यदि ऐसा होता तो गाड़ी का रिम खराब होता, जो सही है। यहां तक की सड़क पर रिम के स्क्रैच भी नहीं हैं।
3. परिजनों का कहना है कि उन्हें पुलिस सूत्रों से पता चला है कि गाड़ी रोक कर एक पुलिसकर्मी ने चालक सीट की ओर जाकर कारबाइन से गोली मारी है। इस पर डीएसपी विरेंद्र सांगवान ने कहा कि एफएसएल से यह साबित हो जाएगा कि गोली कारबाइन से लगी है या दूसरे हथियार से, क्योंकि इस कार्रवाई में कारबाइन का प्रयोग नहीं हुआ।
4. परिजनों का कहना है कि गाड़ी बिजली के पोल से टकराई और इससे पोल टूट गया, लेकिन गाड़ी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इससे साफ है कि कार्रवाई में कुछ गड़बड़ी है।

पवन की मां और पत्नी ने पूछा पुलिस कसूर बताए
दोपहर तक भी शव का पोस्टमार्टम नहीं होने पर पवन के परिवार की काफी महिलाएं सामान्य अस्पताल में ही आ पहुंची। इस दौरान पवन मां बिमला और पत्नी पूनम ने पुलिस से पूछा कि उन्हें बताया जाए, आखिर पवन का क्या कसूर था। पवन की मां ने कहा कि पवन उसके परिवार का अकेला कमाने वाला था। उसे बिना किसी कसूर के ही पुलिस ने मार डाला।



वर्जन
पवन के साथ गाड़ी में मौजूद संदीप के खिलाफ काफी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। संदीप और पवन ने कैथल में आपराधिक घटना को अंजाम देकर जींद में प्रवेश किया था। इस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में पवन की मौत हो गई। परिजनों के आरोपों को पुलिस ने गंभीरता से लिया है और इसकी निष्पक्ष जांच होगी।
अभिषेक जोरवाला, एसएसपी जींद।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed