कोरोना का खौफ: हरियाणा में पोल्ट्री उद्योग चौपट, जिंदा मुर्गियां दफन, 1000 करोड़ का नुकसान
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कोरोना को लेकर जहां देश भर में अलर्ट घोषित किया गया गया है वहीं पोल्ट्री उद्योग पर भी इसका असर देखा जा रहा है। उत्तर भारत के सबसे बड़े पोल्ट्री हब जींद में पोल्ट्री उद्योग पूरी तरह से ठंडा पड़ चुका है। हालत यह है कि हैचरी व्यवसायी चूजों को पालने की बजाये नष्ट करने पर लगे हैं। इसके लिए चूजों व तैयार मुर्गों को जिंदा ही दफनाया जा रहा है। पिछले दिनों जहां जींद जिले में प्रतिदिन करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा था, वहीं अब दो करोड़ रुपये से भी कम हो रहा है।
जींद जिला में सफीदों क्षेत्र के आसपास सबसे अधिक पोल्ट्री फार्म व हैचरी हैं। जिला में 105 हैचरी, 500 पोल्ट्री फार्म व 40 लेयर फार्म हैं। हैचरी में अंडे से चूजा तैयार किया जाता है तो पोल्ट्री फार्म में चूजे से मुर्गा तैयार किया जाता है। वहीं लेयर फार्म में मुर्गी से अंडा लिया जाता है। जिला में प्रतिदिन नौ लाख चूजे, डेढ़ लाख मुर्गे व करीब 30 लाख अंडे का उत्पादन किया जाता है।
मुर्गा सप्लाई के लिए प्रतिदिन 200 गाड़ियां दिल्ली जाती थी, लेकिन पिछले करीब 25 दिन में इनकी संख्या लगातार गिरी है। अब प्रतिदिन 25 गाड़ियां ही जा रही हैं। इसके साथ ही मुर्गी फीड व इसके सहायक कारोबार को भी बड़ झटका लगा है। पोल्ट्री व्यवसायियों के अनुसार 25 दिन पहले तैयार मुर्गा 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता था, लेकिन अब यह महज 20 रुपये प्रति किलोग्राम भी नहीं बिक रहा है। हालांकि पिछले दो दिन में इसमें कुछ सुधार हुआ है।
सस्ते बिक रहे हैं ओवर वेट मुर्गे
कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार सामान्यतौर पर दो किलोग्राम का मुर्गा होता है। यह 35 दिन में तैयार हो जाता है। वहीं अब मुर्गा अधिक समय का हो चुका है। इससे यह तीन से साढ़े तीन किलोग्राम वजन का हो गया है। इससे मुर्गे को रखना भी महंगा पड़ रहा है। अधिक वजन का होने के कारण मुर्गे की कीमत भी कम हो जाती है।
हो रहा है घाटे का कारोबार
पोल्ट्री कारोबारी जितेंद्र ढुल के अनुसार यह कारोबार घाटे का सौदा हो रहा है। इसके चलते काफी कारोबारियों ने औने-पौने दाम पर माल निकाला है। जो चूजा 20 रुपये का बिक रहा था, उसको कोई लेने वाला नहीं है। न ही उसे हैचरी में रखा जा सकता है। वहीं अंडा साढ़े तीन रुपये प्रति पीस बिक रहा था, लेकिन अब दो रुपये तक बिक रहा है। अंडे को भी अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है। चिकन 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था, जो अब 20-25 रुपये तक बिक रहा है। इसके चलते बचे हुए माल को फार्मर नष्ट कर रहे हैं।
अब तक एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान
जींद जिला में पोल्ट्री उद्योग का बड़ा कारोबार है। पिछले करीब 25 दिन में इसमें एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इससे पोल्ट्री उद्योग टूट गया है। अधिकतर फार्म खाली पड़े हैं। हैचरी व लेयर फार्म को खाली किया जा रहा है। बचे हुए माल को फार्मर जमीन में दफना रहे हैं।
ठेके पर लेकर भी चलाते हैं मुर्गी फार्म
काफी लोग मुर्गी फार्म किराये पर लेकर भी मुर्गी पालन का काम करते हैं। इनको दोहरा नुकसान हो रहा है। मुर्गी की मांग नहीं रहने से कम रेट पर माल बेचा गया है। अब फार्म खाली पड़े हैं। वहीं किराये के पैसे मालिक को देने ही पड़ेंगे। ऐसे लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है।
चिकन से कोरोना का खतरा नहीं
चिकन से कोरोना का खतरा नहीं है। यह महज अफवाह है। अभी तक एक भी ऐसा केस नहीं आया है। इसके अलावा हमारे देश में लोग पका हुआ चिकन खाते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। लोग चिकन खा सकते हैं। - डॉ. राजू शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक, पशुपालन विभाग।