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Jind News: मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूह के स्टॉल से खरीदी मिट्टी की बोतल
Thu, 08 Aug 2024 04:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 08 Aug 2024 04:40 AM IST
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जींद। तीज उत्सव को लेकर नई अनाज मंडी को पूरी तरह हरियाणवी संस्कृति के रूप में सजाया गया था। चारों तरफ झूले और हरियाणवी परिधान में नृत्य करतीं महिलाएं दिखाई दे रही थीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जब स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का निरीक्षण किया तो वह भी खरीदारी करने से खुद को नहीं रोक पाए। उन्होंने स्टॉल से मिट्टी की एक बोतल खरीदी। सीएम ने खरीदारी के बाद पैसे के रूप में दो स्टॉल पर महिलाओं को बंद लिफाफा दिया।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को भी ध्यान से देखा। अनाज मंडी में जगह-जगह झूले लगाए गए थे। पूरे पंडाल में भी कहीं पतंग तो कहीं शादी जैसी सजावट की गई थी।
52 कली का दामन, कुर्ता व चुंदड़ पहनकर किया महिलाओं ने किया नृत्य
तीज महोत्सव में 101 पारंपरिक झूले डाले गए थे। सभी रंग-बिरंगे झूलों को फूलों से सजाया गया था, जिन पर महिलाओं ने पींग भरी। वहीं तीज पर घरों में बनने वाले गुलगुले, पूड़े और सुहाली भी बनी, जिनका स्वाद चखने को मिला। महोत्सव में तीज के गीतों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे गए। ग्रामीण महिलाओं ने कंठी, तगड़ी, छलकड़े, न्योरी जैसे पारंपरिक आभूषण पहनकर एक झुंड बनाकर सावन के लोकगीत गाए। इसके अलावा कुछ महिलाएं प्राचीन परिधान 52 कलियों का दामन, कुर्ता, चुंदड़ पहनकर लोकनृत्य करती दिखाई दी। प्राचीन कहावत के अनुसार तीज का त्योहार बिना झूल पर झूले अधूरा माना जाता है।
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इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को भी ध्यान से देखा। अनाज मंडी में जगह-जगह झूले लगाए गए थे। पूरे पंडाल में भी कहीं पतंग तो कहीं शादी जैसी सजावट की गई थी।
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52 कली का दामन, कुर्ता व चुंदड़ पहनकर किया महिलाओं ने किया नृत्य
तीज महोत्सव में 101 पारंपरिक झूले डाले गए थे। सभी रंग-बिरंगे झूलों को फूलों से सजाया गया था, जिन पर महिलाओं ने पींग भरी। वहीं तीज पर घरों में बनने वाले गुलगुले, पूड़े और सुहाली भी बनी, जिनका स्वाद चखने को मिला। महोत्सव में तीज के गीतों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे गए। ग्रामीण महिलाओं ने कंठी, तगड़ी, छलकड़े, न्योरी जैसे पारंपरिक आभूषण पहनकर एक झुंड बनाकर सावन के लोकगीत गाए। इसके अलावा कुछ महिलाएं प्राचीन परिधान 52 कलियों का दामन, कुर्ता, चुंदड़ पहनकर लोकनृत्य करती दिखाई दी। प्राचीन कहावत के अनुसार तीज का त्योहार बिना झूल पर झूले अधूरा माना जाता है।
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