{"_id":"66d22fba4c978f0ac500cb54","slug":"by-teaching-non-academic-books-children-will-get-rid-of-the-habit-of-watching-reels-on-mobile-jind-news-c-199-1-sroh1006-122250-2024-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: नॉन अकादमिक किताबें पढ़ाकर बच्चों की छुड़ाएंगे मोबाइल पर रील देखने की आदत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: नॉन अकादमिक किताबें पढ़ाकर बच्चों की छुड़ाएंगे मोबाइल पर रील देखने की आदत
Sat, 31 Aug 2024 02:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 31 Aug 2024 02:16 AM IST
विज्ञापन
30जेएनडी15-राजकीय संस्कृति मॉडल सीनियर सेकंडरी स्कूल गोल स्कूल का फोटो।
जींद। मोबाइल फोन पर बच्चों के रील आदि देखने और गेम खेलने की आदत छुड़ाने के लिए सीबीएसई ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीबीएसई ने इस पर पहल करते हुए बच्चों को नॉन अकादमिक किताबें पढ़वाने के निर्देश दिए हैं।
डिजिटल प्लेटफार्म पर मिलने वाली इन किताबों को बच्चों ने कितनी देर और क्या पढ़ा, इसकी भी निगरानी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप की मदद ली जाएगी। इसको बच्चों तक पहुंचाने के लिए बोर्ड की ओर से जल्द ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें स्कूल की ओर से नियुक्त किए गए एक शिक्षक को ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बताया जा सके कि यह एप कैसे बच्चों के लिए फायदेमंद होगा।
खास बात यह है कि इस एप पर बच्चा कितना समय रहा। इसकी ट्रैकिंग भी होगी। उसी आधार पर उसे रिवॉर्ड पॉइंट भी दिए जाएंगे। इसी को लेकर सीबीएसई ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है। पत्र में कहा गया है कि इसके लिए अपने स्कूल का एक नोडल अफसर तैनात करें। उसे ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन इस एप के बारे में जानकारी दें।
विज्ञापन
कोरोना के बाद दिया ऑनलाइन शिक्षा पर जोर
वर्ष 2020 में आए कोरोना बीमारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा पर जोर दिया गया था, क्योंकि उन दिनों स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद थे। कोरोना काल में लगभग हर बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन आ गया और वह इसी के माध्यम से पढ़ने भी लगा। यह सुविधा आज भी जारी है और बच्चों को मोबाइल पर ही ग्रुप बनाकर पढ़ाया जा रहा है। स्थिति यह है कि अब अधिकतर कार्य मोबाइल पर ऑनलाइन ही होने लगे हैं, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। बच्चे मोबाइल पर रील आदि देखने में समय बिता रहे हैं, जबकि कई तो इस पर गेम खेलने के भी आदी हो चुके हैं। इसी को बदलने के लिए यह कदम उठाया है
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय में 3 से 8, 9 से 11, 12 से 14 व 11 से 18 आयु वर्ग के लिए पुस्तकें दी गई हैं। यह सारी नॉन अकादमिक यानी पाठ्यक्रम से हटकर हैं। इसमें आयु वर्ग के हिसाब से कहानियां, ऑटो बायोग्राफी, साइंस फिक्शन, नावेल आदि अपलोड किए गए हैं। जो बच्चे इस प्लेटफार्म पर आएंगे वे आगे चलकर रिडर्स क्लब का भी हिस्सा बनेंगे। -रीटा अरोड़ा, प्राचार्य, महाराजा अग्रसेन कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
विज्ञापन
डिजिटल प्लेटफार्म पर मिलने वाली इन किताबों को बच्चों ने कितनी देर और क्या पढ़ा, इसकी भी निगरानी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप की मदद ली जाएगी। इसको बच्चों तक पहुंचाने के लिए बोर्ड की ओर से जल्द ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें स्कूल की ओर से नियुक्त किए गए एक शिक्षक को ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बताया जा सके कि यह एप कैसे बच्चों के लिए फायदेमंद होगा।
विज्ञापन
खास बात यह है कि इस एप पर बच्चा कितना समय रहा। इसकी ट्रैकिंग भी होगी। उसी आधार पर उसे रिवॉर्ड पॉइंट भी दिए जाएंगे। इसी को लेकर सीबीएसई ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है। पत्र में कहा गया है कि इसके लिए अपने स्कूल का एक नोडल अफसर तैनात करें। उसे ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन इस एप के बारे में जानकारी दें।
विज्ञापन
कोरोना के बाद दिया ऑनलाइन शिक्षा पर जोर
वर्ष 2020 में आए कोरोना बीमारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा पर जोर दिया गया था, क्योंकि उन दिनों स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद थे। कोरोना काल में लगभग हर बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन आ गया और वह इसी के माध्यम से पढ़ने भी लगा। यह सुविधा आज भी जारी है और बच्चों को मोबाइल पर ही ग्रुप बनाकर पढ़ाया जा रहा है। स्थिति यह है कि अब अधिकतर कार्य मोबाइल पर ऑनलाइन ही होने लगे हैं, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। बच्चे मोबाइल पर रील आदि देखने में समय बिता रहे हैं, जबकि कई तो इस पर गेम खेलने के भी आदी हो चुके हैं। इसी को बदलने के लिए यह कदम उठाया है
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय में 3 से 8, 9 से 11, 12 से 14 व 11 से 18 आयु वर्ग के लिए पुस्तकें दी गई हैं। यह सारी नॉन अकादमिक यानी पाठ्यक्रम से हटकर हैं। इसमें आयु वर्ग के हिसाब से कहानियां, ऑटो बायोग्राफी, साइंस फिक्शन, नावेल आदि अपलोड किए गए हैं। जो बच्चे इस प्लेटफार्म पर आएंगे वे आगे चलकर रिडर्स क्लब का भी हिस्सा बनेंगे। -रीटा अरोड़ा, प्राचार्य, महाराजा अग्रसेन कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।