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Jind News: अस्पताल में कूड़ा जलाने पर रोक, पुरानी एजेंसी को मिला नया टेंडर
Mon, 03 Nov 2025 12:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 03 Nov 2025 12:49 AM IST
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02जेएनडी06: नागरिक अस्पताल में जलाया जा रहा कूड़ा। फाइल फोटो
जींद। अस्पताल प्रशासन ने कूड़ा उठान की पुरानी एजेंसी का टेंडर रिन्यू कर दिया है। लंबे समय से नागरिक अस्पताल में उठान निस्तारण की व्यवस्था सही न होने से यहां कूड़े को जलाया जा रहा है। उमर उजाना से यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
इसके अलावा, नागरिक अस्पताल से प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल कूड़ा निकलता है। इसको अस्पताल के कर्मचारी ही नए भवन के पीछे खाली जगह में डालते थे। जहां पर कई बार तो नशेड़ी प्रवृति के लोग व कई बार अस्पताल कर्मी ही इसमें आग लगाकर इसका निस्तारण कर देते थे।
अब पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने के बाद भी अस्पताल में कई बार कूड़ा जलता पाया गया तो सीएमओ ने इसको गंभीरता से लिया और कूड़ा जलाने पर कर्मियों से जवाब भी मांगा। इसके बाद इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए काम किया गया। इसको लेकर अस्पताल में एसकेएस की बैठक हुई।
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इसमें कूड़ा उठान की पुरानी एजेंसी का टेंडर रिन्यू कर दिया है। इससे अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, छह माह से कूड़े के निपटारे की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। अस्पताल में रोजाना उत्पन्न होने वाला बायोमेडिकल कचरा, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट खुले में फेंका जा रहा था।
कर्मचारी इसे नए भवन के पीछे एकत्रित कर जलाने को मजबूर थे। इससे निकलने वाला धुआं और दुर्गंध पूरे परिसर में फैलती थी जो मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन रही थी। विशेष रूप से, अस्पताल के साथ बने वार्डों में भर्ती गंभीर मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही थीं।
एक कदम स्वच्छता की ओर
इस कदम से न केवल अस्पताल की स्वच्छता बढ़ेगी, शहर के पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। खुले में कूड़ा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, डाइऑक्सिन जैसे हानिकारक गैसें निकलती हैं जो वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बनती हैं। ऐसे कदमों से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का प्रसार भी रोका जा सकता है क्योंकि कूड़े के ढेर में मच्छर पनपते हैं।
वर्जन
नागरिक अस्पताल में खुले में कूड़ा जलाने का मामला संज्ञान में आया था। इसको गंभीरता से लेते हुए कूड़ा उठान का टेंडर शुरू कर दिया गया ताकि यहां पर मरीजों व अन्य लोगों को धुएं से परेशानी न रहे। अब प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े का साथ ही उठान किया जाएगा। -डॉ. रघुवीर सिंह पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल, जींद
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इसके अलावा, नागरिक अस्पताल से प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल कूड़ा निकलता है। इसको अस्पताल के कर्मचारी ही नए भवन के पीछे खाली जगह में डालते थे। जहां पर कई बार तो नशेड़ी प्रवृति के लोग व कई बार अस्पताल कर्मी ही इसमें आग लगाकर इसका निस्तारण कर देते थे।
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अब पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने के बाद भी अस्पताल में कई बार कूड़ा जलता पाया गया तो सीएमओ ने इसको गंभीरता से लिया और कूड़ा जलाने पर कर्मियों से जवाब भी मांगा। इसके बाद इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए काम किया गया। इसको लेकर अस्पताल में एसकेएस की बैठक हुई।
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इसमें कूड़ा उठान की पुरानी एजेंसी का टेंडर रिन्यू कर दिया है। इससे अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, छह माह से कूड़े के निपटारे की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। अस्पताल में रोजाना उत्पन्न होने वाला बायोमेडिकल कचरा, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट खुले में फेंका जा रहा था।
कर्मचारी इसे नए भवन के पीछे एकत्रित कर जलाने को मजबूर थे। इससे निकलने वाला धुआं और दुर्गंध पूरे परिसर में फैलती थी जो मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन रही थी। विशेष रूप से, अस्पताल के साथ बने वार्डों में भर्ती गंभीर मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही थीं।
एक कदम स्वच्छता की ओर
इस कदम से न केवल अस्पताल की स्वच्छता बढ़ेगी, शहर के पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। खुले में कूड़ा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, डाइऑक्सिन जैसे हानिकारक गैसें निकलती हैं जो वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बनती हैं। ऐसे कदमों से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का प्रसार भी रोका जा सकता है क्योंकि कूड़े के ढेर में मच्छर पनपते हैं।
वर्जन
नागरिक अस्पताल में खुले में कूड़ा जलाने का मामला संज्ञान में आया था। इसको गंभीरता से लेते हुए कूड़ा उठान का टेंडर शुरू कर दिया गया ताकि यहां पर मरीजों व अन्य लोगों को धुएं से परेशानी न रहे। अब प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े का साथ ही उठान किया जाएगा। -डॉ. रघुवीर सिंह पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल, जींद