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गायत्री परिवार के युग निर्माण आंदोलन के 100 वर्ष, आत्म-सुधार से समाज निर्माण की अनूठी पहल
Wed, 28 Oct 2026 11:44 PM IST
Heera
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक
Published by: Heera
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:44 PM IST
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गायत्री परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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गायत्री परिवार के कार्यक्रमों में गूंजने वाला नारा—"हम बदलेंगे, युग बदलेगा। हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा"-आज केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और आध्यात्मिक आंदोलन बन चुका है। वर्ष 1926 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा आगरा के आँवलखेड़ा से शुरू की गई साधना और 1958 में गायत्री तपोभूमि, मथुरा के विशाल यज्ञ के साथ इस 'युग निर्माण आंदोलन' की औपचारिक नींव पड़ी थी। आज यह अभियान व्यक्ति-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण का सशक्त माध्यम है।
इस आंदोलन का मूल दर्शन यह मानता है कि समाज में सुधार बाहरी बदलावों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्म-सुधार से संभव है। 'स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज' के लक्ष्य के साथ आंदोलन ने 18 संकल्पों का एक आचार-संहिता रूपी 'सत्संकल्प' तैयार किया है। इसके अंतर्गत साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, नारी जागरण, पर्यावरण संरक्षण और व्यसन मुक्ति जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों में देश भर में जमीनी कार्य किए जा रहे हैं। दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची और नशे के खिलाफ जन-जागरण के साथ-साथ 'वृक्ष गंगा' और 'निर्मल गंगा' जैसे अभियानों से करोड़ों लोग जुड़े हैं।
वर्तमान में गायत्री परिवार अखंड दीप, आचार्यश्री की साधना और माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के सौ वर्ष पूरे होने पर त्रि-शताब्दी समारोह मना रहा है। आंदोलन का प्रतीक 'लाल मशाल' संगठित सज्जन-शक्ति का संदेश देती है। आज 5,000 से अधिक केंद्रों और 1.5 लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों के साथ यह आंदोलन दुनिया बदलने से पहले खुद को बदलने की प्रेरणा दे रहा है।
इस आंदोलन का मूल दर्शन यह मानता है कि समाज में सुधार बाहरी बदलावों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्म-सुधार से संभव है। 'स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज' के लक्ष्य के साथ आंदोलन ने 18 संकल्पों का एक आचार-संहिता रूपी 'सत्संकल्प' तैयार किया है। इसके अंतर्गत साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, नारी जागरण, पर्यावरण संरक्षण और व्यसन मुक्ति जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों में देश भर में जमीनी कार्य किए जा रहे हैं। दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची और नशे के खिलाफ जन-जागरण के साथ-साथ 'वृक्ष गंगा' और 'निर्मल गंगा' जैसे अभियानों से करोड़ों लोग जुड़े हैं।
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वर्तमान में गायत्री परिवार अखंड दीप, आचार्यश्री की साधना और माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के सौ वर्ष पूरे होने पर त्रि-शताब्दी समारोह मना रहा है। आंदोलन का प्रतीक 'लाल मशाल' संगठित सज्जन-शक्ति का संदेश देती है। आज 5,000 से अधिक केंद्रों और 1.5 लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों के साथ यह आंदोलन दुनिया बदलने से पहले खुद को बदलने की प्रेरणा दे रहा है।
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