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जम्मू-कश्मीर में तैनात बीएसएफ के एएसआई दलबीर की हृदय गति रूकने से मौत
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दलबीर सिंह।
- फोटो : Jind
जम्मू-कश्मीर में बीएसएफ में तैनात पोंकरी खेड़ी गांव निवासी 55 वर्षीय एएसआई दलबीर सिंह की बुधवार रात को हृदय गति रुकने से मौत हो गई। दलबीर सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार को गांव पहुंचेगा। हालांकि रात को ही शव हिसार कैंट आने की संभावना है। इसके बाद शुक्रवार को गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दलबीर सिंह के भतीजे प्रदीप ने बताया कि बुधवार शाम को उनकी अपने ताऊ से फोन पर बात हुई थी। उस समय आवाज ठीक नहीं आने के कारण फोन काट दिया गया। इसके बाद वह रात तक फोन मिलाता रहा, लेकिन बता नहीं हो पाई। सुबह सूचना मिली कि रात में हृदय गति रुकने से मौत हो गई है। जिस समय दलबीर सिंह की मौत हुई वह ड्यूटी पर तैनात थे।
डेढ़ साल में बेटे से मिल सके थे दलबीर सिंह
दलबीर सिंह के तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा दीपक जाट रेजिमेंट में अरुणाचल प्रदेश में तैनात है। वहीं छोटा बेटा बीए प्रथम वर्ष का छात्र है और बेटी की शादी हो चुकी है। प्रदीप के अनुसार दीपक के सेना भर्ती होने के बाद इसी माह पहली बार दलबीर सिंह की मुलाकात हो सकी थी। दलबीर सिंह छुट्टी काटकर दो अप्रैल को ही ड्यूटी पर गए थे। एक सप्ताह बाद ही उनका निधन हो गया।
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गांव में शोक की लहर
दलबीर सिंह के निधन का समाचार मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। दलबीर सिंह कुछ साल में सेवानिवृत्त होने वाले थे। उनका स्वभाव बहुत ही मिलनसार था। ऐसे में उनके निधन से गांव में हर कोई दुखी है।
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दलबीर सिंह के भतीजे प्रदीप ने बताया कि बुधवार शाम को उनकी अपने ताऊ से फोन पर बात हुई थी। उस समय आवाज ठीक नहीं आने के कारण फोन काट दिया गया। इसके बाद वह रात तक फोन मिलाता रहा, लेकिन बता नहीं हो पाई। सुबह सूचना मिली कि रात में हृदय गति रुकने से मौत हो गई है। जिस समय दलबीर सिंह की मौत हुई वह ड्यूटी पर तैनात थे।
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डेढ़ साल में बेटे से मिल सके थे दलबीर सिंह
दलबीर सिंह के तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा दीपक जाट रेजिमेंट में अरुणाचल प्रदेश में तैनात है। वहीं छोटा बेटा बीए प्रथम वर्ष का छात्र है और बेटी की शादी हो चुकी है। प्रदीप के अनुसार दीपक के सेना भर्ती होने के बाद इसी माह पहली बार दलबीर सिंह की मुलाकात हो सकी थी। दलबीर सिंह छुट्टी काटकर दो अप्रैल को ही ड्यूटी पर गए थे। एक सप्ताह बाद ही उनका निधन हो गया।
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गांव में शोक की लहर
दलबीर सिंह के निधन का समाचार मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। दलबीर सिंह कुछ साल में सेवानिवृत्त होने वाले थे। उनका स्वभाव बहुत ही मिलनसार था। ऐसे में उनके निधन से गांव में हर कोई दुखी है।