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Jind News: लद्दाख और जम्मू कश्मीर की सामाजिक आर्थिक-स्थिति पर हुआ मंथन

Thu, 29 Dec 2022 05:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Dec 2022 05:00 AM IST
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Brainstorming on the socio-economic condition of Ladakh and Jammu and Kashmir
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथि। संवाद - फोटो : Jind
जींद। लद्दाख और जम्मू कश्मीर की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर चौ. रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू) में बुधवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कुलपति डॉ. रणपाल सिंह की अध्यक्षता में किया गया। संगोष्ठी के माध्यम से अनेक विद्यार्थियों व शोधार्थियों को जम्मू कश्मीर की सामाजिक आर्थिक स्थिति से अवगत करवाया गया। इसमें मुख्यातिथि के तौर पर डॉ. शिव पूजन सहायक एसोसिएट प्रोफेसर ने शिरकत की।
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इसमें संयोजक डॉ. सुनील फोगाट ने बताया कि लद्दाख, जम्मू और कश्मीर भारत में समाचारों में हमेशा एक ज्वलंत मुद्दे के रुप में रहते हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख, जम्मू और कश्मीर लगभग हर पहलू से पीड़ित रहा है, चाहे वह सामाजिक-आर्थिक विकास हो या शिक्षा, स्वास्थ्य या कोई अन्य पहलू। सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के अलावा सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव सामरिक और सुरक्षा पहलू भी है। पिछले कुछ दशकों में कारगिल और लेह ने असाधारण सामरिक महत्व को दिखाया है। कारगिल और लेह में पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ भारत की साझा और विवादित सीमा है। दोनों ही देश अपनी नीतियों में भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहे हैं।
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डॉ. जसबीर दलाल ने कहा कि लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र पुख्ता जानकारी उपलब्ध करवाने में अहम योगदान देता है। जम्मू और कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण अंग रहा है, केवल 1947 से नहीं, भारत की सनातन परंपरा से यह अंग रहा है। मुख्यातिथि डॉ. शिव पूजन ने कहा कि विभाजन के बाद जम्मू एवं कश्मीर का 46 प्रतिशत हिस्सा भारत के पास है। वर्तमान समय में प्रत्येक दिन अनेक घटनाएं देश की सीमा पर घटित होती हैं। हमारे देश का सैनिक, जवान देश की सीमा पर खड़ा होकर हमारी सुरक्षा कर रहा है। जम्मू कश्मीर आर्थिक दृष्टि से भी संपन्न है। पर्यटन की दृष्टि से जम्मू कश्मीर का अपना अलग महत्व है। वर्तमान समय में आवश्यकता है एकीकरण की। वर्तमान समय में जम्मू-कश्मीर की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को लेकर आज हमें जागरूक होने की आवश्यकता है।
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