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फाइलें रोकने पर ऑटो अपील सॉफ्टवेयर होगा सक्रिय

Sun, 14 Nov 2021 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 11:51 PM IST
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Auto appeal software will be activated when files are stopped
जींद। डीसी नरेश नरवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने सेवा का अधिकार अधिनियम को सख्ती से लागू करने के लिए हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग का ऑटो अपील सॉफ्टवेयर (एएएस) लॉन्च किया है। इस सॉफ्टवेयर के शुरू होने से अब लोगों को अधिकारियों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रह जाएगी।
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इस व्यवस्था के तहत सेवा के लिए निर्धारित अवधि के अंदर नोडल अधिकारी को सेवा प्रदान करनी होगी। ऐसा नहीं होने पर वह स्वयं अपील में उच्चाधिकारी के पास पहुंच जाएगी और संबंधित अधिकारी देरी के लिए खुद जिम्मेदार होगा। अब कोई अधिकारी फाइल को नहीं रोक सकेगा।
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उन्होंने कहा है कि ऑटो अपील नाम का सॉफ्टवेयर बहुत महत्वपूर्ण है। इस सॉफ्टवेयर के लॉन्च होने से अब कोई भी अधिकारी फाइल को नहीं रोक सकेगा। जनता से जुड़े किसी काम की फाइल अधिकारी ने यदि तय समय में नहीं निपटाई तो वह खुद वरिष्ठ अधिकारी के पास चली जाएगी। अगर वहां भी काम नहीं हुआ तो यह फाइल राइट-टू सर्विस कमीशन अर्थात हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के पास पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं, अगर कोई अधिकारी व कर्मचारी फाइल रोकता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी और तीन बार जुर्माना लगा तो संबंधित अधिकारी की नौकरी भी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह ऑटो अपील सॉफ्टवेयर आमजन के लिए फायदेमंद साबित होगा। डीसी ने कहा है कि अधिनियम के तहत अगर कोई अधिकारी निर्धारित समय में सेवाएं उपलब्ध नहीं करवाता है अथवा आवेदन को रद्द करता है तो इस स्थिति में संबंधित नागरिक 30 दिन के भीतर प्रथम कष्ट निवारण अथॉरिटी के पास अपील कर सकता है। अथॉरिटी इस संबंध में आवेदक को एक सप्ताह में सेवाएं उपलब्ध करवाने के आदेश दे सकता है।
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लगाया जा सकता है जुर्माना
अगर आवेदक इस स्तर पर भी संतुष्ट नहीं होता है तो वह प्रथम कष्ट निवारण अथॉरिटी के फैसले के 60 दिन के भीतर द्वितीय कष्ट निवारण अथॉरिटी के पास अपील कर सकता है। अधिनियम के अनुसार अगर आवेदक यहां भी संतुष्ट नहीं होता है तो वह 90 दिन में हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करवा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर संबंधित अधिकारी दोषी पाया जाता है तो आयोग उस पर 250 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आयोग को अधिकारी का रवैया ठीक प्रतीत नहीं होता है तो वह देरी के लिए 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भी कर सकता है।
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