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12 नई बसें आने के इंतजार में अगस्त महीना गुजरा, अब सितंबर से बंधी उम्मीद
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रोडवेज बेड़े में 12 नई बसें शामिल होंगी। डिपो और यात्री यही उम्मीद अगस्त में लगाए हुए थे लेकिन अगस्त गुजरने को है अब तक डिपो में एक भी नई बस नहीं पहुंची है। इसका जवाब डिपो प्रबंधन के पास भी नहीं है। हालांकि डिपो ने सवा तीन करोड़ रुपये के लगभग नई बसों को लेकर जमा भी करवाए हुए हैं। फिर भी नई बसें डिपो में नहीं भेजी है। इससे पहले डिपो प्रबंधन द्वारा अगस्त महीने नई बसें मिलने का दावा किया जा रहा था। अगस्त महीना गुजर जाने के बाद अब डिपो और यात्रियों की सितंबर महीने से उम्मीद बंधी है। उम्मीद है कि सितंबर महीने में डिपो के बेड़े में कुछ नई बसें शामिल हो जाए, जिससे यात्रियों और डिपो को सौगात मिले।
प्रदेश सरकार ने रोडवेज डिपो समेत अन्य डिपो के बेड़े में नई बसें शामिल करने की घोषणा की थी। इससे यात्रियों और डिपो प्रबंधन में आस जगी थी कि नई बसें शामिल होने से डिपो का बेड़ा बढ़ेगा। जींद डिपो में 12 नई बसें शामिल होनी थी। इसको लेकर जून महीने में खरीद के लिए परिवहन विभाग के निदेशालय ने डिपो को 3 करोड़ 39 लाख रुपये जारी कर दिए थे। यह राशि जींद डिपो को बसों की चेसिस और बॉडी तैयार करवाने के लिए एचआरईसी गुरुग्राम में जमा करवा दी थी। इसके बाद अगस्त तक 12 बसें डिपो में पहुंचने की उम्मीद थी। अब अगस्त महीना बीत चुका है लेकिन अब तक बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हो पाई है।
बसों की कमी से दूसरे राज्यों के पड़े रूट बंद
रोडवेज डिपो में हर महीने बसें घट रही हैं। कार्य सीमा पूरी होने के बाद बसों को कंडम घोषित किया जा रहा है। ऐसे में डिपो में 145 के लगभग बसें बची हैं जिनमें 35 बसें तो किलोमीटर स्कीम वाली हैं। उनको ही लंबे रूटों पर भेजा रहा है जबकि रोडवेज बसें लोकल तथा एक डिपो से दूसरे डिपो तक आती-जाती हैं। इससे पहले डिपो में 200 बसें होती थी। बसों की कमी की वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई दूसरे राज्यों वाले रूट और ग्रामीण रूट बंद पड़े हैं। यात्रियों को समय पर बसें नहीं मिल पाती। जम्मू कटरा, जालंधर, जयपुर, मथुरा, देहरादून और पटियाला रूट कई सालों से बंद पड़े हैं।
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पहले जाती थी 10-10 बसें, अब भेजने के लिए बसें नहीं
डिपो की रोडवेज बसें लंबे रूटों पर कम ही दिखाई दे रही है। 7-8 साल पहले जो लंबे रूटों पर दिनभर में 10-10 बसें जाती थी उन्हीं रूटों पर आजकल मात्र 8-9 रोडवेज बसें आ-जा रही है। कई बार तो ऐसा होता है कि लंबे रूटों पर भेजने के लिए डिपो में बसें ही नहीं मिल पाती। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लंबे रूट तो ऐसे हैं जिन पर जींद डिपो की बसें बिलकुल बंद हो गई है। वहीं कुछ रूटों पर रोडवेज बसों की संख्या घटा दी है। सोनीपत, असंध, करनाल, रोहतक और हिसार रूट भी बसों की कमी से यात्रियों की मारामारी रहती है।
आबादी अनुसार चाहिए 100 ओर बसें
डिपो में फिलहाल 145 के लगभग कुल बसें हैं, जिनमें 35 बसें किलोमीटर स्कीम वाली बसें हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी बसें हैं जो काफी कंडम हालत में हैं उनको केवल लोकल रूटों पर ही चलाया जाता है जबकि लंबे रूट पर भेजने के लिए बसें ही नहीं मिल पाती। जिले की आबादी के अनुसार डिपो को 100 बसें ओर चाहिए। 100 बसें डिपो के बेड़े में शामिल होने के बाद ही बसों की कमी पूरी हो पाएगी और यात्रियों को सभी रूटों पर बेहतर परिवहन सेवा मिल पाएगी।
गुुरुग्राम में नई बसों को तैयार किया जा रहा
पहले अगस्त माह में नई बसें आने की उम्मीद थी। गुुरुग्राम में नई बसों को तैयार किया जा रहा है। सितंबर माह में 12 नई बसें आ जाएंगी। डिपो ने 35 नई बसों की मांग की गई थी। 12 बसों के आने के बाद फिर से ओर नई बसें मंगवाई जाएंगी। नई बसों के आने से यात्रियों को अच्छी परिवहन सेवा मिल पाएगी।
-अशोक कौशिक, महाप्रबंधक, जींद।
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प्रदेश सरकार ने रोडवेज डिपो समेत अन्य डिपो के बेड़े में नई बसें शामिल करने की घोषणा की थी। इससे यात्रियों और डिपो प्रबंधन में आस जगी थी कि नई बसें शामिल होने से डिपो का बेड़ा बढ़ेगा। जींद डिपो में 12 नई बसें शामिल होनी थी। इसको लेकर जून महीने में खरीद के लिए परिवहन विभाग के निदेशालय ने डिपो को 3 करोड़ 39 लाख रुपये जारी कर दिए थे। यह राशि जींद डिपो को बसों की चेसिस और बॉडी तैयार करवाने के लिए एचआरईसी गुरुग्राम में जमा करवा दी थी। इसके बाद अगस्त तक 12 बसें डिपो में पहुंचने की उम्मीद थी। अब अगस्त महीना बीत चुका है लेकिन अब तक बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हो पाई है।
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बसों की कमी से दूसरे राज्यों के पड़े रूट बंद
रोडवेज डिपो में हर महीने बसें घट रही हैं। कार्य सीमा पूरी होने के बाद बसों को कंडम घोषित किया जा रहा है। ऐसे में डिपो में 145 के लगभग बसें बची हैं जिनमें 35 बसें तो किलोमीटर स्कीम वाली हैं। उनको ही लंबे रूटों पर भेजा रहा है जबकि रोडवेज बसें लोकल तथा एक डिपो से दूसरे डिपो तक आती-जाती हैं। इससे पहले डिपो में 200 बसें होती थी। बसों की कमी की वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई दूसरे राज्यों वाले रूट और ग्रामीण रूट बंद पड़े हैं। यात्रियों को समय पर बसें नहीं मिल पाती। जम्मू कटरा, जालंधर, जयपुर, मथुरा, देहरादून और पटियाला रूट कई सालों से बंद पड़े हैं।
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पहले जाती थी 10-10 बसें, अब भेजने के लिए बसें नहीं
डिपो की रोडवेज बसें लंबे रूटों पर कम ही दिखाई दे रही है। 7-8 साल पहले जो लंबे रूटों पर दिनभर में 10-10 बसें जाती थी उन्हीं रूटों पर आजकल मात्र 8-9 रोडवेज बसें आ-जा रही है। कई बार तो ऐसा होता है कि लंबे रूटों पर भेजने के लिए डिपो में बसें ही नहीं मिल पाती। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लंबे रूट तो ऐसे हैं जिन पर जींद डिपो की बसें बिलकुल बंद हो गई है। वहीं कुछ रूटों पर रोडवेज बसों की संख्या घटा दी है। सोनीपत, असंध, करनाल, रोहतक और हिसार रूट भी बसों की कमी से यात्रियों की मारामारी रहती है।
आबादी अनुसार चाहिए 100 ओर बसें
डिपो में फिलहाल 145 के लगभग कुल बसें हैं, जिनमें 35 बसें किलोमीटर स्कीम वाली बसें हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी बसें हैं जो काफी कंडम हालत में हैं उनको केवल लोकल रूटों पर ही चलाया जाता है जबकि लंबे रूट पर भेजने के लिए बसें ही नहीं मिल पाती। जिले की आबादी के अनुसार डिपो को 100 बसें ओर चाहिए। 100 बसें डिपो के बेड़े में शामिल होने के बाद ही बसों की कमी पूरी हो पाएगी और यात्रियों को सभी रूटों पर बेहतर परिवहन सेवा मिल पाएगी।
गुुरुग्राम में नई बसों को तैयार किया जा रहा
पहले अगस्त माह में नई बसें आने की उम्मीद थी। गुुरुग्राम में नई बसों को तैयार किया जा रहा है। सितंबर माह में 12 नई बसें आ जाएंगी। डिपो ने 35 नई बसों की मांग की गई थी। 12 बसों के आने के बाद फिर से ओर नई बसें मंगवाई जाएंगी। नई बसों के आने से यात्रियों को अच्छी परिवहन सेवा मिल पाएगी।
-अशोक कौशिक, महाप्रबंधक, जींद।