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Jind News: आशा वर्करों ने लंबित मांगों को लेकर नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन किया
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20जेएनडी23-12 फरवरी की हड़ताल को लेकर उप सिविल सर्जन को नोटिस देती आशा वर्कर। स्रोत कर्मचारी
जींद। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा संबंधित सीटू के आह्वान पर मंगलवार को आशा वर्करों ने नागरिक अस्पताल में लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने 12 फरवरी को होने वाली हड़ताल को लेकर उप सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल को नोटिस सौंपा।
मंगलवार सुबह जिलेभर की आशा वर्कर्स नागरिक अस्पताल के पार्क में एकत्रित हुई। यहां एक जनसभा की, जिसकी अध्यक्षता मुकेश अलेवा ने की व संचालन जिला सचिव राजबाला ने किया।
सीटू जिला उपाध्यक्ष कपूर सिंह ने कहा कि आशा वर्कर्स ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। फिर भी उन्हें मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। राजबाला ने बताया कि सरकार लगातार ऑनलाइन काम का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन आशा वर्कर सभी तरह के ऑनलाइन काम का बहिष्कार करती हैं और ऑनलाइन काम नहीं करेंगी। साल 2023 में की गई 73 दिनों की लंबी हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए।
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उन्होंने कहा की जननी सुरक्षा योजना की डिलीवरी के पैसे लाभार्थी नहीं डाले जाते तब तक आशा की पेमेंट रोक दी जाती है ऐसा ना किया जाए। ऑपरेशन वाले दिन रिपोर्ट जल्दी देने की कोशिश की जाए। एचआरपी (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) वाली डिलीवरी अगर पीयूटी में हो जाती है तो उसका 45 दिन का फॉलोअप करने दिया जाए।
उन्होंने मांग की कि पक्का सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाए। पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ सुनिश्चित करने की मांग कर रही हैं। वर्तमान में मिलने वाला सीमित मानदेय (प्रोत्साहन आधारित) महंगाई के दौर में अपर्याप्त है जबकि उनका कार्यभार लगातार बढ़ रहा है।
आशा वर्करों ने नए श्रम कानूनों की वापसी और पुराने श्रम कानूनों की बहाली की मांग की। उन्होंने चेचेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो वे 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेंगी।
इस अवसर पर कोषाध्यक्ष जगवंती, राजबाला, मुकेश, रोशनी, सुमन, महेंद्रो, गायित्री, बबीता, मोनिका, सुदेश, सुनीता, सावित्री, मंजू, संतोष, मुन्नी मौजूद रही।
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मंगलवार सुबह जिलेभर की आशा वर्कर्स नागरिक अस्पताल के पार्क में एकत्रित हुई। यहां एक जनसभा की, जिसकी अध्यक्षता मुकेश अलेवा ने की व संचालन जिला सचिव राजबाला ने किया।
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सीटू जिला उपाध्यक्ष कपूर सिंह ने कहा कि आशा वर्कर्स ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। फिर भी उन्हें मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। राजबाला ने बताया कि सरकार लगातार ऑनलाइन काम का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन आशा वर्कर सभी तरह के ऑनलाइन काम का बहिष्कार करती हैं और ऑनलाइन काम नहीं करेंगी। साल 2023 में की गई 73 दिनों की लंबी हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए।
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उन्होंने कहा की जननी सुरक्षा योजना की डिलीवरी के पैसे लाभार्थी नहीं डाले जाते तब तक आशा की पेमेंट रोक दी जाती है ऐसा ना किया जाए। ऑपरेशन वाले दिन रिपोर्ट जल्दी देने की कोशिश की जाए। एचआरपी (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) वाली डिलीवरी अगर पीयूटी में हो जाती है तो उसका 45 दिन का फॉलोअप करने दिया जाए।
उन्होंने मांग की कि पक्का सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाए। पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ सुनिश्चित करने की मांग कर रही हैं। वर्तमान में मिलने वाला सीमित मानदेय (प्रोत्साहन आधारित) महंगाई के दौर में अपर्याप्त है जबकि उनका कार्यभार लगातार बढ़ रहा है।
आशा वर्करों ने नए श्रम कानूनों की वापसी और पुराने श्रम कानूनों की बहाली की मांग की। उन्होंने चेचेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो वे 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेंगी।
इस अवसर पर कोषाध्यक्ष जगवंती, राजबाला, मुकेश, रोशनी, सुमन, महेंद्रो, गायित्री, बबीता, मोनिका, सुदेश, सुनीता, सावित्री, मंजू, संतोष, मुन्नी मौजूद रही।