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अंधेरा होते ही शहर की सड़कों पर कब्जा जमा लेते हैं बेसहारा गोवंश
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लघु सचिवालय के सामने चौराहे पर कब्जा जमाए खड़े बेसहारा पशु। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। शहर में अंधेरा होते ही सड़कों पर बेसहारा पशुओं का कब्जा हो जाता है। सड़क के बीचों बीच बैठे यह पशु सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसके अलावा सड़कों पर यह पशु आपस में लड़ते रहते हैं, जिसके कारण इनकी चपेट में कई बार लोग आ चुके हैं। हर साल नगर परिषद द्वारा इन पशुओं को गोशाला में छोडने के लिए टेंडर छोड़े जाते हैं लेकिन इसके बावजूद यह पशु फिर से सड़कों पर आ जाते हैं। यठेकेदार नगर परिषद से पशु छोडने की एवज में पैसे वसूल कर लेता है लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर इन पशुओं का आना ठेकेदार की कर्तव्यनिष्ठा पर सवालिया निशान लगाता है।
अकेले जींद शहर में लगभग पांच हजार बेसहारा पशु घूम रहे हैं। हर कॉलोनी की गलियों व सड़कों पर यह पशु देखे जा सकते हैं। शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर तो जेल से लेकर रेलवे स्टेशन पर रात के समय इन पशुओं का जमावड़ा हो जाता है। शहर की स्ट्रीट लाइट अधिकतर समय खराब रहती हैं। इस कारण कई वाहन इन पशुओं से टकरा जाते हैं। इससे पशु को तो चोट लगती ही है, साथ ही वाहन चालक भी घायल हो जाते हैं। शहर के लोग बार-बार इन पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोडने की गुहार लगाते हैं। नगर परिषद टेंडर छोड़कर इन पशुओं को गोशाला में छुड़वाती भी है लेकिन इसके बावजूद सड़कों से बेसहारा पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
आठ महीने से नहीं कोई टेंडर
नगर परिषद द्वारा डेढ़ वर्ष पहले बेसहारा पशुओं को गोशाला में छोडने का टेंडर दिया गया था। यह टेंडर 400 रुपये प्रति पशु था। ठेकेदार के रिकार्ड के अनुसार उसने लगभग 900 पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा था। उस समय शहर में इक्का-दुक्का ही सड़कों पर पशु दिखाई देते थे लेकिन अब फिर से पशुओं की भरमार सड़क पर हो गई है। आठ महीने पहले ही यह टेंडर खत्म हो चुका है। अब फिर दोबारा यह टेंडर छोड़ा जाएगा।
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पूर्व विधायक को मारी थी सांड़ ने टक्कर
लगभग दस वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा को भी एक सांड़ ने टक्कर मारी थी। इसके बाद डॉ. हरिचंद मिड्ढा ठीक नहीं हो पाए थे और उनकी मौत हो गई थी। लगभग 15 वर्ष पहले नागरिक अस्पताल से निकलते समय डॉ. अश्विनी की कार के सामने एक गाय आ गई थी। उसे बचाने के चक्कर में उनकी कार पलट गई थी और उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा बेसहारा पशुओं से टकराकर चोटिल होने के मामले तो अनेक हैं। पुरानी सब्जीमंडी मोड पर भी लगभग छह वर्ष पहले दो सांड आपस में लड़ते हुए एक रिक्शा पर गिर गए थे। इससे रिक्शा चालक की मौत हो गई थी।
अगले सप्ताह नगर परिषद की आम बैठक होगी। इसमें बेसहारा पशुओं को पकडने के लिए टेंडर छोडने पर विचार किया जाएगा। इस बार टेंडर में ऐसे नियम व शर्तें बनाए जाएंगे, जिससे बेहसहारा पशु दोबारा सड़कों पर नहीं आ पाएं। ठेकेदार से इस प्रकार की गारंटी ली जाएगी कि यदि वह पशु दोबारा सड़क पर आया तो उसके पैसे ठेकेदार से वसूल किए जाएंगे।
-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।
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अकेले जींद शहर में लगभग पांच हजार बेसहारा पशु घूम रहे हैं। हर कॉलोनी की गलियों व सड़कों पर यह पशु देखे जा सकते हैं। शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर तो जेल से लेकर रेलवे स्टेशन पर रात के समय इन पशुओं का जमावड़ा हो जाता है। शहर की स्ट्रीट लाइट अधिकतर समय खराब रहती हैं। इस कारण कई वाहन इन पशुओं से टकरा जाते हैं। इससे पशु को तो चोट लगती ही है, साथ ही वाहन चालक भी घायल हो जाते हैं। शहर के लोग बार-बार इन पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोडने की गुहार लगाते हैं। नगर परिषद टेंडर छोड़कर इन पशुओं को गोशाला में छुड़वाती भी है लेकिन इसके बावजूद सड़कों से बेसहारा पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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आठ महीने से नहीं कोई टेंडर
नगर परिषद द्वारा डेढ़ वर्ष पहले बेसहारा पशुओं को गोशाला में छोडने का टेंडर दिया गया था। यह टेंडर 400 रुपये प्रति पशु था। ठेकेदार के रिकार्ड के अनुसार उसने लगभग 900 पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा था। उस समय शहर में इक्का-दुक्का ही सड़कों पर पशु दिखाई देते थे लेकिन अब फिर से पशुओं की भरमार सड़क पर हो गई है। आठ महीने पहले ही यह टेंडर खत्म हो चुका है। अब फिर दोबारा यह टेंडर छोड़ा जाएगा।
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पूर्व विधायक को मारी थी सांड़ ने टक्कर
लगभग दस वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा को भी एक सांड़ ने टक्कर मारी थी। इसके बाद डॉ. हरिचंद मिड्ढा ठीक नहीं हो पाए थे और उनकी मौत हो गई थी। लगभग 15 वर्ष पहले नागरिक अस्पताल से निकलते समय डॉ. अश्विनी की कार के सामने एक गाय आ गई थी। उसे बचाने के चक्कर में उनकी कार पलट गई थी और उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा बेसहारा पशुओं से टकराकर चोटिल होने के मामले तो अनेक हैं। पुरानी सब्जीमंडी मोड पर भी लगभग छह वर्ष पहले दो सांड आपस में लड़ते हुए एक रिक्शा पर गिर गए थे। इससे रिक्शा चालक की मौत हो गई थी।
अगले सप्ताह नगर परिषद की आम बैठक होगी। इसमें बेसहारा पशुओं को पकडने के लिए टेंडर छोडने पर विचार किया जाएगा। इस बार टेंडर में ऐसे नियम व शर्तें बनाए जाएंगे, जिससे बेहसहारा पशु दोबारा सड़कों पर नहीं आ पाएं। ठेकेदार से इस प्रकार की गारंटी ली जाएगी कि यदि वह पशु दोबारा सड़क पर आया तो उसके पैसे ठेकेदार से वसूल किए जाएंगे।
-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।