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Jind News: एक्यूआई <bha>@</bha>301...बारिश के बाद भी जिले की हवा में जहर
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05जेएनडी25: पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक गांव में धान के अवशेषों में रात के समय लगाई गई आग। संवाद
जींद। बारिश के बाद भी जिले का एक्यूआई 301 दर्ज किया गया जो खतरनाक श्रेणी में आता है। पिछले लगभग 15 दिन से जिले में ग्रैप दो भी लागू किया है लेकिन इसकी पालना नहीं हो रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की गति कम होना, तापमान में उतार-चढ़ाव, वाहनों से निकलने वाला धुआं, फसल अवशेष जलाना और औद्योगिक गतिविधियां मुख्य कारण हैं जिससे प्रदूषक हवा में जमा हो रहे हैं। इस स्थिति में सभी नागरिकों को घर के अंदर रहने और बाहरी गतिविधियों को न्यूनतम करने की सलाह दी जा रही है।
40 प्रतिशत की मरीजों की वृद्धि
बढ़ते प्रदूषण के कारण नागरिक अस्पताल में एक सप्ताह में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एक्यूआई बढ़ने से अस्थमा, खांसी, गले में जलन और आंखों की समस्या वाले मरीज बढ़े हैं। रोजाना 150 से अधिक ओपीडी प्रदूषण से संबंधित मरीजों की हो रही हैं।
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हवा की गति तेज
बरसात के बाद आमतौर पर प्रदूषण कम होता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति मात्र 2-4 किलोमीटर प्रति घंटा रही जो प्रदूषण को कम नहीं होने दे रही। इसके कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
15 लोगों पर पराली जलाने मामले आए सामने
पराली जलाने के मामले भी आए दिन आ रहे हैं। हालांकि अब दिन में नहीं रात को धान के अवशेष जलाए जा रहे हैं। इन पर भी नियंत्रण नहीं है। जिले में 15 लोगों पर धान के अवशेष जलाने पर एफआईआर दर्ज हुई है। इसके अलावा कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर निगरानी कर रहे हैं, लेकिन औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले धुंए पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है।
वर्जन
आमजन को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। हर व्यक्ति को फिलहाल मास्क लगाकर घर से बाहर निकलने की जरूरत है।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल, जींद
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विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की गति कम होना, तापमान में उतार-चढ़ाव, वाहनों से निकलने वाला धुआं, फसल अवशेष जलाना और औद्योगिक गतिविधियां मुख्य कारण हैं जिससे प्रदूषक हवा में जमा हो रहे हैं। इस स्थिति में सभी नागरिकों को घर के अंदर रहने और बाहरी गतिविधियों को न्यूनतम करने की सलाह दी जा रही है।
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40 प्रतिशत की मरीजों की वृद्धि
बढ़ते प्रदूषण के कारण नागरिक अस्पताल में एक सप्ताह में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एक्यूआई बढ़ने से अस्थमा, खांसी, गले में जलन और आंखों की समस्या वाले मरीज बढ़े हैं। रोजाना 150 से अधिक ओपीडी प्रदूषण से संबंधित मरीजों की हो रही हैं।
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हवा की गति तेज
बरसात के बाद आमतौर पर प्रदूषण कम होता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति मात्र 2-4 किलोमीटर प्रति घंटा रही जो प्रदूषण को कम नहीं होने दे रही। इसके कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
15 लोगों पर पराली जलाने मामले आए सामने
पराली जलाने के मामले भी आए दिन आ रहे हैं। हालांकि अब दिन में नहीं रात को धान के अवशेष जलाए जा रहे हैं। इन पर भी नियंत्रण नहीं है। जिले में 15 लोगों पर धान के अवशेष जलाने पर एफआईआर दर्ज हुई है। इसके अलावा कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर निगरानी कर रहे हैं, लेकिन औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले धुंए पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है।
वर्जन
आमजन को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। हर व्यक्ति को फिलहाल मास्क लगाकर घर से बाहर निकलने की जरूरत है।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल, जींद