{"_id":"6940503a1a393a452d01c793","slug":"amid-the-groundwater-crisis-residents-protested-against-a-water-bottle-packaging-factory-operating-in-the-village-jind-news-c-198-1-rew1001-230477-2025-12-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: भूजल संकट के बीच गांव में चल रही पानी बोतल की पैकिंग फैक्टरी का लोगों ने किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: भूजल संकट के बीच गांव में चल रही पानी बोतल की पैकिंग फैक्टरी का लोगों ने किया विरोध
विज्ञापन
भूजल संकट के बीच गांव में चल रही पानी बोतल की पैकिंग फैक्टरी का विरोध करते लोग। संवाद
भिवाड़ी। टपूकड़ा क्षेत्र स्थित मायापुर गांव में गंभीर जल संकट के बावजूद कृषि भूमि पर पानी की बोतल पैकिंग फैक्टरी संचालित होने से ग्रामीण आक्रोशित हैं। गांव में भूजल स्तर पहले ही 20 मीटर से अधिक गहरा हो चुका है फिर भी फैक्टरी द्वारा बोरवेल से लगातार पानी निकाले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इसको लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने टपूकड़ा एसडीएम लाखन सिंह को ज्ञापन सौंपा और फैक्टरी को तुरंत बंद कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि फैक्टरी शुरू होने के बाद गांव के कई खेतों के बोरवेल और हैंडपंप सूखने लगे हैं। सिंचाई के लिए पानी की कमी से फसलें प्रभावित हो रही हैं जिससे किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया कि गांव का पानी निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि स्थानीय लोग खुद पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी जिस भूमि पर चल रही है वह अभी भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है और उद्योग लगाने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) की अनुमति नहीं ली गई है।
विज्ञापन
फैक्टरी से पानी निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शुद्धिकरण प्रक्रिया में निकलने वाले अपशिष्ट जल के निपटान की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से खेतों और आसपास की जमीन को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले की मौके पर जांच कराई जाए, यदि अवैध पाया जाए तो बोरवेल को सील किया जाए और कृषि भूमि पर चल रही फैक्टरी को तत्काल बंद कराया जाए।
चेतावनी दी है कि यदि समय पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में गांव में पीने का पानी और खेती दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।
विज्ञापन
इसको लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने टपूकड़ा एसडीएम लाखन सिंह को ज्ञापन सौंपा और फैक्टरी को तुरंत बंद कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि फैक्टरी शुरू होने के बाद गांव के कई खेतों के बोरवेल और हैंडपंप सूखने लगे हैं। सिंचाई के लिए पानी की कमी से फसलें प्रभावित हो रही हैं जिससे किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन
किसानों ने आरोप लगाया कि गांव का पानी निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि स्थानीय लोग खुद पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी जिस भूमि पर चल रही है वह अभी भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है और उद्योग लगाने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) की अनुमति नहीं ली गई है।
विज्ञापन
फैक्टरी से पानी निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शुद्धिकरण प्रक्रिया में निकलने वाले अपशिष्ट जल के निपटान की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से खेतों और आसपास की जमीन को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले की मौके पर जांच कराई जाए, यदि अवैध पाया जाए तो बोरवेल को सील किया जाए और कृषि भूमि पर चल रही फैक्टरी को तत्काल बंद कराया जाए।
चेतावनी दी है कि यदि समय पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में गांव में पीने का पानी और खेती दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।