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दो वर्ष बाद अप्रैल में फिर से शुरू हो सकते हैं आयु जांच मेडिकल कैंप
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कोरोना महामारी के कारण दो साल से बंद पड़े आयु जांच मेडिकल शिविर को फिर से शुरू होने का लोग इंतजार कर रहे हैं। जिले के लगभग पांच हजार लोग ऐसे हैं जो इन शिविरों का इंतजार कर रहे हैं। यह लोग अपनी पेंशन बनवाने के लिए कभी समाज कल्याण विभाग के तो कभी नागरिक अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। वहीं समाज कल्याण विभाग ने डीसी डॉ. मनोज कुमार से शिविर लगवाने की अनुमति मांगी है। अप्रैल महीने की शुरुआत में ही यह शिविर फिर से लगने की संभावना है।
जिन लोगों के पास आयु का कोई प्रमाण नहीं है, ऐसे बुजुर्ग लोगों की आयु का पता लगाने के लिए आयु जांच कैंप लगाए जाते थे। इस कैंप में दो चिकित्सक बैठते थे तथा अपने अनुभव व व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को देखकर उसकी आयु का प्रमाण-पत्र बनाते थे। इस प्रकार के कैंपों में काफी भीड़ जुट रही थी। कोरोना महामारी की शुरुआत में ही दो वर्ष पहले यह शिविर बंद कर दिए गए। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनकी आयु का कोई प्रमाण नहीं है। वृद्धावस्था सम्मान पेंशन के लिए व्यक्ति की आयु 60 वर्ष अनिवार्य है। इसके लिए उसकी आयु का प्रमाण पत्र मांगा जाता है। इसमें चाहे कोई शैक्षणिक प्रमाण पत्र हो या फिर जन्म प्रमाण-पत्र। यदि इस प्रकार का कोई भी दस्तावेज व्यक्ति के पास नहीं है तो उसकी आयु जांच के लिए सरकार ने मेडिकल कैंप लगवाए थे। इसमें चिकित्सक व्यक्ति की आयु का प्रमाण पत्र बनाते थे। कोरोना के कारण इस प्रकार के शिविर दो वर्ष से बंद हैं। ऐसे में लोग अपने आयु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कभी नागरिक अस्पताल तो कभी समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
नहीं बन पा रही पेंशन
पटियाला चौक निवासी रिसाला, सरूपा, जलालपुर कलां निवासी राममेहर, रामेश्वर ने बताया कि उनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है लेकिन उनके पास आयु का कोई प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसे में वह नागरिक अस्पताल तथा समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। यदि आयु जांच शिविर शुरू हो जाएं तो उनकी पेंशन बन सकती है।
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कोरोना के कारण आयु जांच शिविरों को बंद कर दिया था। जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आयु को कोई दस्तावेज है, उनकी पेंशन बनाई जा रही है। आयु जांच शिविर लगवाने के लिए डीसी डॉ. मनोज कुमार से अनुमति मांगी गई है। जैसे ही अनुमति मिलेगी, शिविर लगाने शुरू कर दिए जाएंगे। उम्मीद है अप्रैल महीने में यह शुरू हो जाएं।
-सरोज बाला, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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जिन लोगों के पास आयु का कोई प्रमाण नहीं है, ऐसे बुजुर्ग लोगों की आयु का पता लगाने के लिए आयु जांच कैंप लगाए जाते थे। इस कैंप में दो चिकित्सक बैठते थे तथा अपने अनुभव व व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को देखकर उसकी आयु का प्रमाण-पत्र बनाते थे। इस प्रकार के कैंपों में काफी भीड़ जुट रही थी। कोरोना महामारी की शुरुआत में ही दो वर्ष पहले यह शिविर बंद कर दिए गए। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनकी आयु का कोई प्रमाण नहीं है। वृद्धावस्था सम्मान पेंशन के लिए व्यक्ति की आयु 60 वर्ष अनिवार्य है। इसके लिए उसकी आयु का प्रमाण पत्र मांगा जाता है। इसमें चाहे कोई शैक्षणिक प्रमाण पत्र हो या फिर जन्म प्रमाण-पत्र। यदि इस प्रकार का कोई भी दस्तावेज व्यक्ति के पास नहीं है तो उसकी आयु जांच के लिए सरकार ने मेडिकल कैंप लगवाए थे। इसमें चिकित्सक व्यक्ति की आयु का प्रमाण पत्र बनाते थे। कोरोना के कारण इस प्रकार के शिविर दो वर्ष से बंद हैं। ऐसे में लोग अपने आयु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कभी नागरिक अस्पताल तो कभी समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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नहीं बन पा रही पेंशन
पटियाला चौक निवासी रिसाला, सरूपा, जलालपुर कलां निवासी राममेहर, रामेश्वर ने बताया कि उनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है लेकिन उनके पास आयु का कोई प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसे में वह नागरिक अस्पताल तथा समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। यदि आयु जांच शिविर शुरू हो जाएं तो उनकी पेंशन बन सकती है।
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कोरोना के कारण आयु जांच शिविरों को बंद कर दिया था। जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आयु को कोई दस्तावेज है, उनकी पेंशन बनाई जा रही है। आयु जांच शिविर लगवाने के लिए डीसी डॉ. मनोज कुमार से अनुमति मांगी गई है। जैसे ही अनुमति मिलेगी, शिविर लगाने शुरू कर दिए जाएंगे। उम्मीद है अप्रैल महीने में यह शुरू हो जाएं।
-सरोज बाला, जिला समाज कल्याण अधिकारी।