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Jind News: भद्रा के बाद आज बहनें बांध सकेंगी रक्षासूत्र

Sun, 18 Aug 2024 10:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sun, 18 Aug 2024 10:44 PM IST
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After Bhadra, sisters will be able to tie Raksha Sutra today
जींद। भाई और बहन के सौहार्द का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा। सोमवार को ही सावन माह का अंतिम सोमवार भी है। सोमवार को रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने का शुभ मुहूर्त भद्रा काल के बाद है। सोमवार को दोपहर 1:30 से लेकर रात्रि 09:07 तक शुभ मुहूर्त है।
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राखी के त्योहार को लेकर बाजार में ग्राहकों की खूब चहल-पहल है। बहनें अपने भाइयों के लिए रक्षासूत्र खरीद रही हैं तो सूट व चांदी की राखियां भी उनकी पहली पसंद बनी हुई है। रक्षाबंधन पर्व के साथ सोमवार को सावन माह का अंतिम सोमवार भी है। ऐसे में शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी उमड़ेगी।
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जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिवपुराण कथा का भी आयोजन किया गया है। इसमें प्रतिदिन श्रद्धालु शिव पुराण को सुनते हैं। इस कथा का रविवार को समापन हुआ है। रक्षाबंधन की कहानी सुनाते हुए नवीन शास्त्री ने बताया कि चित्तौड़ की रानी कर्मवती ने दिल्ली के मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजकर अपना भाई बनाया और इसी राखी की इज्जत के कारण हुमायूं ने गुजरात के राजा से युद्ध कर रानी कर्मवती की रक्षा की। इसके अलावा हमारी धार्मिक पुस्तकों में भी रक्षाबंधन मनाने की कुछ मान्यताओं का जिक्र है। पुजारी ने कहा कि महाभारत में इस त्योहार की मान्यता का वर्णन है। द्रौपदी ने एक बार त्रेतायुग में भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग जाने पर अपनी साड़ी से टुकड़ा फाड़कर बांधा था। उसी चीर बांधने के कारण श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की थी। पुराणों में इस त्योहार का जिक्र उस समय हुआ, जब देवासुर संग्राम हुआ। विष्णु पुराण में इसका वर्णन अध्याय नवम में किया गया है। पुराण में लिखा है कि देवताओं और असुरों का संग्राम 12 वर्षों तक चला था। इस संग्राम में देवताओं की हार हुई और असुरों की जीत। असुरों ने देवताओं के राजा इंद्र को हराकर तीनों लोक पर अपना अधिकार कर लिया। देवता परास्त होकर जब ब्रह्मा जी के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि हे देवगण आप दुष्टों का संहार करने वाले भगवान विष्णु के पास जाओ। वह ही संसार की उत्पत्ति, स्थिति और संहार के कारण हैं। वहां जाने से आपका कल्याण होगा। तब देवता गण के साथ लोक पितामह श्री ब्रह्मा जी स्वयं क्षीर सागर के तट पर गए और वहां पहुंचकर उन्होंने भगवान विष्णु की स्तुति की। स्तुति के पश्चात भगवान विष्णु प्रकट हुए और देवताओं को मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद देवताओं ने अपने गुरु बृहस्पति से विचार विमर्श किया और रक्षा विधान के लिए कहा। तब सावन की पूर्णिमा को प्रात काल रक्षा का विधान सम्पन्न किया गया।
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