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Jind News: सीआरएसयू में एबीवीपी ने प्रोफेसर के कार्यालय में लगी एसी के काटे तार
Wed, 23 Apr 2025 02:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 23 Apr 2025 02:04 AM IST
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22जेएनडी28: सीआरएसयू में एसी के तार काटते हुए एबीवीपी के सदस्य। एबीवीपी
जींद। सीआरएसयू में छात्र संगठन एबीवीपी ने मंगलवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रोफेसर के दफ्तरों के एसी के तार काट दिए। उन्होंने कहा कि जब तक क्लास रूम में एसी नहीं लगते तब तक प्रोफेसर को भी गर्मी झेलनी पड़ेगी। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी की।
एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रोहन सैनी ने कहा कि सरकार की तरफ से छात्र कल्याण के लिए दी जा रही राशि का प्रोफेसर अपनी सुख सुविधाओं के लिए गलत प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्र कल्याण के लिए बजट का प्रयोग अपनी सुख सुविधाओं को पूरा करने एसी, फर्नीचर आदि को खरीदने में खर्च करते हैं और विद्यार्थियों पर महंगी फीस थोपी जा रही है। इकाई अध्यक्ष राहुल कक्कड़ ने कह कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष करोड़ों रुपये के एसी खरीदे। हर क्लर्क, प्रोफेसर के कमरे में एसी लगवा दिया, जबकि किसी भी क्लास रूम में कोई एसी नहीं लगा। एबीवीपी ने सवाल किया कि क्या छात्र इंसान नहीं हैं। क्या उन्हें ठंडी हवा में पढ़ने का हक नहीं है। इकाई उपाध्यक्ष हिमेश यादव व राखी ने कहा कि सरकार द्वारा यह पैसा छात्रों को सस्ती शिक्षा, देने के लिए दिया जाता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कभी इससे एसी खरीद लेता है, तो कभी महंगा फर्नीचर पहले से ही फर्नीचर होने के बावजूद अपने लिए नया फर्नीचर खरीद लेता है। छात्रों के बैठने के लिए बेंच नहीं हैं, परंतु अधिकारियों के लिए दोबारा से फर्नीचर खरीदे जा रहे हैं। कभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं। जब फंड की कमी हो जाती है तो छात्रों से यह पैसा मोटी फीस के रूप में वसूला जाता है। एक एसी लगने के बाद प्रति माह विश्वविद्यालय को आठ से 10 लाख रुपये बिजली का बिल भी देना पड़ता है। यह भी छात्रों की फीस से वसूला जाता है।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की फीस अन्य विश्वविद्यालय से दो से तीन गुना अधिक है, और उसका कारण यही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार से मिले फंड का प्रयोग अपने सुख सुविधाओं को पूरा करने के लिए करता है। छात्रों को इसका बोझ सहना पड़ता है। इससे सरकार भी बदनाम हो रही है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कार्यकारिणी सदस्य रोहन सैनी की अगुवाई में एबीवीपी ने सभी क्लर्क और प्रोफेसर के कमरे से एसी के तार काट दिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक छात्रों को एसी मिलेंगे, तब तक दूसरों के एसी भी नहीं चलेंगे। गर्मी से अधिकारियों को ही परेशानी नहीं होती, छात्रों को भी होती है। इस मौके पर मयंक बंसल, प्रतीक शर्मा व दीपक समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
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प्रोफेसर्स ने जताया एतराज
इस दौरान कुछ प्रोफेसर ने उनके कमरों के एसी के तार काटे जाने पर एतराज किया तो छात्रों ने भी इस बात पर रोष जताया कि आपकी स्वयं की सुविधा कट रही है, तो इतनी बेचैनी हो रही है। एबीवीपी का कहना है कि वह भी विश्वविद्यालय प्रशासन को यही बात कर रहे हैं कि सरकार की ओर से दिया गया पैसा छात्रों का है और उसका प्रयोग सबसे पहले छात्रों को सस्ती शिक्षा और वह भी अच्छे शिक्षकों से दिलवाने पर खर्च करना चाहिए।
रजिस्ट्रार से मिला प्रतिनिधिमंडल
एबीवीपी प्रतिनिधिमंडल ने बाद में रजिस्ट्रार प्रो लवलीन मोहन से मुलाकात की और कहा कि छात्रों को भी क्लर्कों और प्रोफेसर की तरह क्लास रूम में एसी चाहिए। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वीसी का पुतला फूंका जाएगा।
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एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रोहन सैनी ने कहा कि सरकार की तरफ से छात्र कल्याण के लिए दी जा रही राशि का प्रोफेसर अपनी सुख सुविधाओं के लिए गलत प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्र कल्याण के लिए बजट का प्रयोग अपनी सुख सुविधाओं को पूरा करने एसी, फर्नीचर आदि को खरीदने में खर्च करते हैं और विद्यार्थियों पर महंगी फीस थोपी जा रही है। इकाई अध्यक्ष राहुल कक्कड़ ने कह कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष करोड़ों रुपये के एसी खरीदे। हर क्लर्क, प्रोफेसर के कमरे में एसी लगवा दिया, जबकि किसी भी क्लास रूम में कोई एसी नहीं लगा। एबीवीपी ने सवाल किया कि क्या छात्र इंसान नहीं हैं। क्या उन्हें ठंडी हवा में पढ़ने का हक नहीं है। इकाई उपाध्यक्ष हिमेश यादव व राखी ने कहा कि सरकार द्वारा यह पैसा छात्रों को सस्ती शिक्षा, देने के लिए दिया जाता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कभी इससे एसी खरीद लेता है, तो कभी महंगा फर्नीचर पहले से ही फर्नीचर होने के बावजूद अपने लिए नया फर्नीचर खरीद लेता है। छात्रों के बैठने के लिए बेंच नहीं हैं, परंतु अधिकारियों के लिए दोबारा से फर्नीचर खरीदे जा रहे हैं। कभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं। जब फंड की कमी हो जाती है तो छात्रों से यह पैसा मोटी फीस के रूप में वसूला जाता है। एक एसी लगने के बाद प्रति माह विश्वविद्यालय को आठ से 10 लाख रुपये बिजली का बिल भी देना पड़ता है। यह भी छात्रों की फीस से वसूला जाता है।
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चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की फीस अन्य विश्वविद्यालय से दो से तीन गुना अधिक है, और उसका कारण यही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार से मिले फंड का प्रयोग अपने सुख सुविधाओं को पूरा करने के लिए करता है। छात्रों को इसका बोझ सहना पड़ता है। इससे सरकार भी बदनाम हो रही है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कार्यकारिणी सदस्य रोहन सैनी की अगुवाई में एबीवीपी ने सभी क्लर्क और प्रोफेसर के कमरे से एसी के तार काट दिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक छात्रों को एसी मिलेंगे, तब तक दूसरों के एसी भी नहीं चलेंगे। गर्मी से अधिकारियों को ही परेशानी नहीं होती, छात्रों को भी होती है। इस मौके पर मयंक बंसल, प्रतीक शर्मा व दीपक समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
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प्रोफेसर्स ने जताया एतराज
इस दौरान कुछ प्रोफेसर ने उनके कमरों के एसी के तार काटे जाने पर एतराज किया तो छात्रों ने भी इस बात पर रोष जताया कि आपकी स्वयं की सुविधा कट रही है, तो इतनी बेचैनी हो रही है। एबीवीपी का कहना है कि वह भी विश्वविद्यालय प्रशासन को यही बात कर रहे हैं कि सरकार की ओर से दिया गया पैसा छात्रों का है और उसका प्रयोग सबसे पहले छात्रों को सस्ती शिक्षा और वह भी अच्छे शिक्षकों से दिलवाने पर खर्च करना चाहिए।
रजिस्ट्रार से मिला प्रतिनिधिमंडल
एबीवीपी प्रतिनिधिमंडल ने बाद में रजिस्ट्रार प्रो लवलीन मोहन से मुलाकात की और कहा कि छात्रों को भी क्लर्कों और प्रोफेसर की तरह क्लास रूम में एसी चाहिए। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वीसी का पुतला फूंका जाएगा।