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Jind News: पिंडारा तीर्थ में उमड़ा आस्था का सैलाब, पितरों की शांति के लिए किया पिंडदान
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18जेएनडी37: तीर्थ में पिंडदान करते हुए श्रद्धालु। श्रद्धालु
- फोटो : 1
जींद। पांडू पिंडारा स्थित प्राचीन पिंडतारक तीर्थ पर चैत्र अमावस्या के अवसर पर बुधवार को श्रद्धा और आस्था का विशेष संगम देखने को मिला। सुबह होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरोवर में स्नान करने के लिए पहुंचने लगे और पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा।
मंगलवार शाम से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। रातभर तीर्थ परिसर की धर्मशालाओं में भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन हुआ जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बुधवार तड़के श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
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हालांकि सरोवर में जल स्तर कम होने के कारण कुछ दिक्कतें जरूर सामने आईं लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। सीमित पानी के बावजूद लोगों ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ किया। तीर्थ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरे दिन मुस्तैद रहा।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वाहनों की पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे आवागमन में कोई बाधा न हो। पिंडतारक तीर्थ का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है।
मान्यता है कि युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां कठोर तप किया और उचित समय आने पर पिंडदान किया। तभी से यह स्थल पितृ तर्पण के लिए विशेष महत्व रखता है और यहां किए गए कर्मकांड से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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मंगलवार शाम से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। रातभर तीर्थ परिसर की धर्मशालाओं में भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन हुआ जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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बुधवार तड़के श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
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हालांकि सरोवर में जल स्तर कम होने के कारण कुछ दिक्कतें जरूर सामने आईं लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। सीमित पानी के बावजूद लोगों ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ किया। तीर्थ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरे दिन मुस्तैद रहा।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वाहनों की पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे आवागमन में कोई बाधा न हो। पिंडतारक तीर्थ का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है।
मान्यता है कि युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां कठोर तप किया और उचित समय आने पर पिंडदान किया। तभी से यह स्थल पितृ तर्पण के लिए विशेष महत्व रखता है और यहां किए गए कर्मकांड से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।