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Jind News: सोमवती अमावस्या पर लगाई आस्था की डुबकी
Tue, 03 Sep 2024 02:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 03 Sep 2024 02:03 AM IST
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जींद। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ के सरोवर में सोमवती अमवास्या पर श्रद्धालुओं ने स्नान करने के अलावा पिंडदान किया।
ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर रविवार शाम से ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। रविवार पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन का आयोजन चलता रहा। सोमवार को तड़के से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। सूर्य को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की। इसकी वजह से गोहाना रोड पर पूरा दिन जाम की स्थिति बनी रही। यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या किया था। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग आते हैं।
शहर में पूरे दिन जाम जैसी स्थिति रही
सोमवती अमावस्या को देखते हुए गोहाना रोड पर दोपहर तक जाम जैसी स्थिति बनी रही। पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। पुलिसकर्मी पूरा दिन जाम में फंसे वाहनों को निकालने में लगे रहे। पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल को तैनात किया गया था। सरोवर में नहाते हुए कोई अनहोनी न हो, इसके लिए गोताखोर व किश्ती का विशेष प्रबंध किया गया था।
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पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा पाठ हुए : शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रही। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके चलते इस दिन पूजा-पाठ व पितृ तर्पण का विशेष महत्व बढ़ गया है। अब इस साल सोमवती अमावस्या का योग 30 दिसंबर को बन रहा है ।
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ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर रविवार शाम से ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। रविवार पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन का आयोजन चलता रहा। सोमवार को तड़के से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। सूर्य को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की। इसकी वजह से गोहाना रोड पर पूरा दिन जाम की स्थिति बनी रही। यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या किया था। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग आते हैं।
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शहर में पूरे दिन जाम जैसी स्थिति रही
सोमवती अमावस्या को देखते हुए गोहाना रोड पर दोपहर तक जाम जैसी स्थिति बनी रही। पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। पुलिसकर्मी पूरा दिन जाम में फंसे वाहनों को निकालने में लगे रहे। पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल को तैनात किया गया था। सरोवर में नहाते हुए कोई अनहोनी न हो, इसके लिए गोताखोर व किश्ती का विशेष प्रबंध किया गया था।
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पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा पाठ हुए : शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रही। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके चलते इस दिन पूजा-पाठ व पितृ तर्पण का विशेष महत्व बढ़ गया है। अब इस साल सोमवती अमावस्या का योग 30 दिसंबर को बन रहा है ।