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Jind News: पाजू कलां में बनेगा बायोगैस प्लांट, ग्रामीणों की रसोई में होगी सप्लाई
Wed, 12 Mar 2025 12:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 12 Mar 2025 12:35 AM IST
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11जेएनडी12-पाजू कलां में चल रहा बायोगैस प्लांट का निर्माण। संवाद
जींद। गोवर्धन योजना के तहत पाजू कलां में बायोगैस प्लांट बनेगा। इस पर 93 लाख के करीब की राशि खर्च की जा रही है। इसमें गोबर से गैस बनाई जाएगी और फिर आसपास के गांव में रहने वाले लोगों के घरों तक गैस पहुंचाई जाएगी। इसको लेकर पाजू कलां में तो पाइप बिछा भी दी गई है। वहीं लगभग 70 घरों में सप्लाई के लिए कनेक्शन भी दे दिए हैं। इस बायोगैस प्लांट का कार्य 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। काम पूरा होने के बाद पाइप लाइन को चेक किया जाएगा, ताकि पता चल सके कि कहीं लीकेज तो नहीं है। उसके बाद पाइपों से गैस चालू कर दी जाएगी। फिर गैस ग्रामीणों की रसोई तक पहुंचेगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफीदों हलका के गांव पाजू कलां में बायोगैस प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इसमें गोबर से ईंधन गैस बनाई जाएगी। इस प्लांट की क्षमता 400 क्यूम है। उसके बाद गैस की जरूरत बढ़ने पर क्षमता को और बढ़ा दिया जाएगा। गोबर को गांव और आसपास की गोशालाओं से एकत्रित किया जाएगा। बायोगैस में मीथेन (55 से 60 प्रतिशत), कार्बन डाइऑक्साइड (35 से 40 प्रतिशत) और अन्य गैस होती है। इसका उपयोग खाना बनाने में होता है। इसके लिए सिंगल बर्नर व डबल बर्नर काम के लिए जाते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि गाय के गोबर का प्रयोग किया जाए। इससे बायोगैस प्लांट के माध्यम से गैस बनाकर खाना पकाया जाए। हालांकि पहले गाय के गोबर का प्रबंधन सही तरीके से नहीं हो पाता था। अब बायो गैस के प्लांट में गाय के गोबर का सही प्रयोग किया जाएगा।
ग्रामीणों को 14-15 रुपये प्रति किग्रा. के हिसाब से मिलेगी गैस
बायोगैस प्लांट बनने के बाद ग्रामीणों को 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गैस दी जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों को एलपीजी गैस 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रही है, लेकिन प्लांट में बनने वाली गैस एलपीजी से 34-35 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती मुहैया होगी। यह गैस पाइप लाइन के माध्यम से ग्रामीणों की रसोई तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि अभी 70 परिवारों को ही गैस के कनेक्शन दिए हैं। नए कनेक्शन देने के लिए एक किलोमीटर लंबी पाइप बिछाई जा रही है। यदि नए कनेक्शनों की मांग बढ़ती है तो उसके अनुसार पाइप बिछा दी जाएगी। इसके बाद अन्य दूसरे गांवों से भी गैस कनेक्शन की मांग आती है तो वहां भी गैस पहुंचाई जाएगी।
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पंचायत की बढ़ेगी आमदनी
बायोगैस प्लांट में गोबर डालने के लिए गांव और आसपास गोशालाओं से एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद गोबर से ईंधन गैस तैयार की जाएगी। फिर गोबर को बाहर निकाला जाएगा। संयंत्र से प्राप्त घोल का उपयोग, गीले घोल को सुखाकर कार्बनिक खाद के रूप में किया जाएगा। उसके बाद उसे बेच दिया जाएगा। ग्रामीण उसको खाद के रूप में खेतों में प्रयोग करेंगे, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पैदावार में भी इजाफा होगा। इसके अलावा गांव से फलों और सब्जियों के छिलकों को भी प्लांट तक लाया जाएगा। उनका भी गैस बनाने में प्रयोग किया जाएगा। इसका यह फायदा होगा कि गांव में कहीं भी गोबर खुले में दिखाई नहीं देगा, जिससे गांव साफ और स्वच्छ नजर आएगा।
वर्जन
पाजू कलां में बायोगैस सयंत्र प्लांट बन रहा है, जिसका 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस पर 93 लाख की राशि खर्च की जा रही है। फिलहाल 70 घरों को कनेक्शन दे दिए गए हैं वहीं पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी चल रहा है।
-- आशीष मेहरा, एसडीओ, जींद
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफीदों हलका के गांव पाजू कलां में बायोगैस प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इसमें गोबर से ईंधन गैस बनाई जाएगी। इस प्लांट की क्षमता 400 क्यूम है। उसके बाद गैस की जरूरत बढ़ने पर क्षमता को और बढ़ा दिया जाएगा। गोबर को गांव और आसपास की गोशालाओं से एकत्रित किया जाएगा। बायोगैस में मीथेन (55 से 60 प्रतिशत), कार्बन डाइऑक्साइड (35 से 40 प्रतिशत) और अन्य गैस होती है। इसका उपयोग खाना बनाने में होता है। इसके लिए सिंगल बर्नर व डबल बर्नर काम के लिए जाते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि गाय के गोबर का प्रयोग किया जाए। इससे बायोगैस प्लांट के माध्यम से गैस बनाकर खाना पकाया जाए। हालांकि पहले गाय के गोबर का प्रबंधन सही तरीके से नहीं हो पाता था। अब बायो गैस के प्लांट में गाय के गोबर का सही प्रयोग किया जाएगा।
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ग्रामीणों को 14-15 रुपये प्रति किग्रा. के हिसाब से मिलेगी गैस
बायोगैस प्लांट बनने के बाद ग्रामीणों को 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गैस दी जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों को एलपीजी गैस 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रही है, लेकिन प्लांट में बनने वाली गैस एलपीजी से 34-35 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती मुहैया होगी। यह गैस पाइप लाइन के माध्यम से ग्रामीणों की रसोई तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि अभी 70 परिवारों को ही गैस के कनेक्शन दिए हैं। नए कनेक्शन देने के लिए एक किलोमीटर लंबी पाइप बिछाई जा रही है। यदि नए कनेक्शनों की मांग बढ़ती है तो उसके अनुसार पाइप बिछा दी जाएगी। इसके बाद अन्य दूसरे गांवों से भी गैस कनेक्शन की मांग आती है तो वहां भी गैस पहुंचाई जाएगी।
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पंचायत की बढ़ेगी आमदनी
बायोगैस प्लांट में गोबर डालने के लिए गांव और आसपास गोशालाओं से एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद गोबर से ईंधन गैस तैयार की जाएगी। फिर गोबर को बाहर निकाला जाएगा। संयंत्र से प्राप्त घोल का उपयोग, गीले घोल को सुखाकर कार्बनिक खाद के रूप में किया जाएगा। उसके बाद उसे बेच दिया जाएगा। ग्रामीण उसको खाद के रूप में खेतों में प्रयोग करेंगे, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पैदावार में भी इजाफा होगा। इसके अलावा गांव से फलों और सब्जियों के छिलकों को भी प्लांट तक लाया जाएगा। उनका भी गैस बनाने में प्रयोग किया जाएगा। इसका यह फायदा होगा कि गांव में कहीं भी गोबर खुले में दिखाई नहीं देगा, जिससे गांव साफ और स्वच्छ नजर आएगा।
वर्जन
पाजू कलां में बायोगैस सयंत्र प्लांट बन रहा है, जिसका 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस पर 93 लाख की राशि खर्च की जा रही है। फिलहाल 70 घरों को कनेक्शन दे दिए गए हैं वहीं पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी चल रहा है।