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यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी मांऊट अल्बूरस पर मोहनी नेहरा फहराया तिरंगा
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माउंट अलब्रुस पर मोहनी ने फहराया तिरंगा
अमर उजाला ब्यूरो
अलेवा। शामदों निवासी मोहनी नेहरा ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट अलब्रुस पर भारत का तिरंगा फहराकर देश व प्रदेश नाम रोशन किया। इससे पहले मोहनी ने कई चोटियों को फतह कर चुकी है। मोहनी नेहरा ने पिछली बार दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारों की चढ़ाई की थी। मोहनी ने बताया कि यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट अलब्रुस है। वह माउंट एवरेस्ट विजेता संतोष यादव से प्रेरणा लेकर माउंटेनरिंग फील्ड में कदम रखा है। मोहनी ने बताया कि अपने पर्वतारोहण की शुरूआत में जम्मू कश्मीर के पहलगाम स्थित जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ विंटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट से बेसिक कोर्स की ट्रेनिंग लेकर की।
मोहनी नेहरा ने बताया कि श्रीनगर स्थित पहली चोटी क्रिस्टल और दूसरी चोटी व्हील और दक्षिण अफ्रीका की सबसे चोटी माउंट किलिमंजारों को पार करने के बाद उनका हौसला बढ़ा और 29 दिसंबर से शुरू किया अभियान एक जनवरी को रात छह बजे यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी को फतेह कर पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना है।
गाइड ने बनाया विजेता
मोहनी नेहरा ने उक्त चोटी को पार करने का श्रेय जहां गाइड संतोष यादव, रोहतास व अशोक शुक्ला के अलावा माता सुनीता और पिता अध्यापक जयभगवान को दिया है। जिन्होंने हर कदम पर उनका बखूबी साथ दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
अलेवा। शामदों निवासी मोहनी नेहरा ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट अलब्रुस पर भारत का तिरंगा फहराकर देश व प्रदेश नाम रोशन किया। इससे पहले मोहनी ने कई चोटियों को फतह कर चुकी है। मोहनी नेहरा ने पिछली बार दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारों की चढ़ाई की थी। मोहनी ने बताया कि यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट अलब्रुस है। वह माउंट एवरेस्ट विजेता संतोष यादव से प्रेरणा लेकर माउंटेनरिंग फील्ड में कदम रखा है। मोहनी ने बताया कि अपने पर्वतारोहण की शुरूआत में जम्मू कश्मीर के पहलगाम स्थित जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ विंटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट से बेसिक कोर्स की ट्रेनिंग लेकर की।
मोहनी नेहरा ने बताया कि श्रीनगर स्थित पहली चोटी क्रिस्टल और दूसरी चोटी व्हील और दक्षिण अफ्रीका की सबसे चोटी माउंट किलिमंजारों को पार करने के बाद उनका हौसला बढ़ा और 29 दिसंबर से शुरू किया अभियान एक जनवरी को रात छह बजे यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी को फतेह कर पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना है।
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गाइड ने बनाया विजेता
मोहनी नेहरा ने उक्त चोटी को पार करने का श्रेय जहां गाइड संतोष यादव, रोहतास व अशोक शुक्ला के अलावा माता सुनीता और पिता अध्यापक जयभगवान को दिया है। जिन्होंने हर कदम पर उनका बखूबी साथ दिया है।
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