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नगरपरिषद के पुराने कार्यालय को हवन के साथ किया खाली
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:52 PM IST
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नगर परिषद के पुराने कार्यालय को हवन के साथ किया खाली
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। टाउन हॉल स्थित नगर परिषद के पुराने कार्यालय को तोड़ने से पहले शुक्रवार को यहां हवन किया गया। जिस प्रकार कर्मचारी की सेवानिवृत्त पर कार्यक्रम होता है, ठीक उसी प्रकार नगर परिषद भवन को भी विदाई दी गई। इस दौरान भाजपा के प्रदेश सचिव व चेयरमैन पूनम सैनी के पति ने कहा कि जब वे पार्षद थे तो, प्रधान के चहेते नहीं थे। इसके चलते वे अपने वार्ड में न तो एक भी ईंट लगवा पाए और न ही एक भी स्ट्रीट लाइट लगवा पाए। जवाहर सैनी ने कहा कि वर्तमान नगर परिषद में ऐसा नहीं है। अब हर वार्ड में बराबर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वार्ड पार्षद चेयरमैन के साथ है या नहीं। इस दौरान नगर परिषद से जुडे पूर्व लोगों ने अपने विचार सांझा किए। नगर परिषद के पूर्व उप प्रधान रहे मंगल सिंह ने कहा कि वे 1987 में उप प्रधान बने। उस समय लोग सादे होते थे और जबरदस्ती ही पार्षद बना देते थे, लेकिन अब नगर परिषद में बहुत अधिक राजनीति होती है। वहीं कार्यक्रम के दौरान 1991 में एमसी रहे अशोक कपूर ने कहा कि उनके समय में यदि दो लाख रुपये की ग्रांट आ जाती थी तो पार्षदों में भारी खुशी होती थी, अब तक करोड़ों रुपये की ग्रांट आती हैं। गौरतलब है कि नगर परिषद के पुराने भवन को कंडम घोषित कर इसे तोड़ने की योजना है। इसके बाद प्रशासन यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहा है। इसका डिजाइन भी तैयार हो चुका है।
नगर परिषद की जमीन पर विवाद की आहट
नगर परिषद द्वारा खाली किए जा रहे कार्यालय की जमीन पर विवाद की आहट भी आ रही है। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार यह जमीन खाली होने पर कुछ लोग इस पर अपना दावा ठोकने की तैयारी में हैं। शहर की प्राइम लोकेशन पर करीब 1500 गज में यह कार्यालय बना हुआ है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। टाउन हॉल स्थित नगर परिषद के पुराने कार्यालय को तोड़ने से पहले शुक्रवार को यहां हवन किया गया। जिस प्रकार कर्मचारी की सेवानिवृत्त पर कार्यक्रम होता है, ठीक उसी प्रकार नगर परिषद भवन को भी विदाई दी गई। इस दौरान भाजपा के प्रदेश सचिव व चेयरमैन पूनम सैनी के पति ने कहा कि जब वे पार्षद थे तो, प्रधान के चहेते नहीं थे। इसके चलते वे अपने वार्ड में न तो एक भी ईंट लगवा पाए और न ही एक भी स्ट्रीट लाइट लगवा पाए। जवाहर सैनी ने कहा कि वर्तमान नगर परिषद में ऐसा नहीं है। अब हर वार्ड में बराबर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वार्ड पार्षद चेयरमैन के साथ है या नहीं। इस दौरान नगर परिषद से जुडे पूर्व लोगों ने अपने विचार सांझा किए। नगर परिषद के पूर्व उप प्रधान रहे मंगल सिंह ने कहा कि वे 1987 में उप प्रधान बने। उस समय लोग सादे होते थे और जबरदस्ती ही पार्षद बना देते थे, लेकिन अब नगर परिषद में बहुत अधिक राजनीति होती है। वहीं कार्यक्रम के दौरान 1991 में एमसी रहे अशोक कपूर ने कहा कि उनके समय में यदि दो लाख रुपये की ग्रांट आ जाती थी तो पार्षदों में भारी खुशी होती थी, अब तक करोड़ों रुपये की ग्रांट आती हैं। गौरतलब है कि नगर परिषद के पुराने भवन को कंडम घोषित कर इसे तोड़ने की योजना है। इसके बाद प्रशासन यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहा है। इसका डिजाइन भी तैयार हो चुका है।
नगर परिषद की जमीन पर विवाद की आहट
नगर परिषद द्वारा खाली किए जा रहे कार्यालय की जमीन पर विवाद की आहट भी आ रही है। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार यह जमीन खाली होने पर कुछ लोग इस पर अपना दावा ठोकने की तैयारी में हैं। शहर की प्राइम लोकेशन पर करीब 1500 गज में यह कार्यालय बना हुआ है।
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