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ईंटल कलां का अटल तीर्थ भी पहुंचा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। गांव ईंटल कलां में स्थित अटल तीर्थ भी अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की परिधि में शामिल हो गया। रविवार को गांव में पहुंचे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य डॉ. ओमप्रकाश पहल ने इस तीर्थ को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की परिधि में शामिल करने की घोषणा। उन्होंने ग्रामीणों को जल्द एक कमेटी बनाकर उसकी सूची सौंपने को कहा ताकि सरकार की तरफ से इस तीर्थ के विकास के लिए ग्रांट दिलाई जा सके।
अटल तीर्थ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल के समय भगवान परशुराम रामराय गांव में तप करने आए थे। उस समय वे सुबह घूमते हुए ईंटल कलां गांव भी पहुंचते थे। यहां उन्होंने एक कुंड का निर्माण किया था। इसका नाम अटल रखा गया था। इसके बाद पांडव जब पांडु पिंडारा गांव में आए तो वे यहां इस कुंड के दर्शनों के लिए भी आए थे। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व है। लगभग 800-900 वर्ष पहले यहां ईंटल कलां गांव बसाया गया। उस समय खुदाई के दौरान यहां काफी कुछ प्राचीन वस्तुएं मिली थीं।
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जींद। गांव ईंटल कलां में स्थित अटल तीर्थ भी अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की परिधि में शामिल हो गया। रविवार को गांव में पहुंचे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य डॉ. ओमप्रकाश पहल ने इस तीर्थ को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की परिधि में शामिल करने की घोषणा। उन्होंने ग्रामीणों को जल्द एक कमेटी बनाकर उसकी सूची सौंपने को कहा ताकि सरकार की तरफ से इस तीर्थ के विकास के लिए ग्रांट दिलाई जा सके।
अटल तीर्थ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल के समय भगवान परशुराम रामराय गांव में तप करने आए थे। उस समय वे सुबह घूमते हुए ईंटल कलां गांव भी पहुंचते थे। यहां उन्होंने एक कुंड का निर्माण किया था। इसका नाम अटल रखा गया था। इसके बाद पांडव जब पांडु पिंडारा गांव में आए तो वे यहां इस कुंड के दर्शनों के लिए भी आए थे। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व है। लगभग 800-900 वर्ष पहले यहां ईंटल कलां गांव बसाया गया। उस समय खुदाई के दौरान यहां काफी कुछ प्राचीन वस्तुएं मिली थीं।
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