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जमीन की फर्द देने की एवज में रिश्वत लेने वाले पटवरी को चार साल की सजा
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:24 AM IST
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नरवाना में दो साल पहले जमीन की फर्द की एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले पटवारी सुभाष को अदालत ने चार साल कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अभियोग के अनुसार 2016 में एक जनवरी को गांव हंसडेहर निवासी दर्शन ने विजिलेंस को दी शिकायत में कहा कि उसने उसकी कृषि योग्य जमीन पर बैंक से लोन लेना है। इसके लिए बैंक ने उसकी जमीन की फर्द मांगी है। जब वह फर्द लेने के लिए पटवारी सुभाष के पास गया तो उसने फर्द देने की एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। जब उसने पैसे देने से मना किया तो उसने फर्द देने से मना कर दिया। शिकायत पर विजिलेंस की टीम ने छापामार दल का गठन किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस टीम द्वारा दिए गए पैसे पटवारी सुभाष को थमा दिए। इशारा मिलते ही विजिलेंस टीम ने पटवारी सुभाष को काबू कर लिया। तलाशी लिए जाने पर उसकी जेब से पाउडर युक्त नोट बरामद हुए। विजिलेंस ने सुभाष के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए सुभाष को दोषी ठहराते हुए चार साल की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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नरवाना में दो साल पहले जमीन की फर्द की एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले पटवारी सुभाष को अदालत ने चार साल कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अभियोग के अनुसार 2016 में एक जनवरी को गांव हंसडेहर निवासी दर्शन ने विजिलेंस को दी शिकायत में कहा कि उसने उसकी कृषि योग्य जमीन पर बैंक से लोन लेना है। इसके लिए बैंक ने उसकी जमीन की फर्द मांगी है। जब वह फर्द लेने के लिए पटवारी सुभाष के पास गया तो उसने फर्द देने की एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। जब उसने पैसे देने से मना किया तो उसने फर्द देने से मना कर दिया। शिकायत पर विजिलेंस की टीम ने छापामार दल का गठन किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस टीम द्वारा दिए गए पैसे पटवारी सुभाष को थमा दिए। इशारा मिलते ही विजिलेंस टीम ने पटवारी सुभाष को काबू कर लिया। तलाशी लिए जाने पर उसकी जेब से पाउडर युक्त नोट बरामद हुए। विजिलेंस ने सुभाष के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए सुभाष को दोषी ठहराते हुए चार साल की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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